ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका को एक नए समझौते का प्रस्ताव दिया है। इसमें होर्मुज समुद्री रास्ते को फिर से खोलना, चल रहे युद्ध को खत्म करना और अंत में परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शामिल है।
मुजतबा खामेनेई और ट्रंप (दाएं)
ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, हार्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद में टालने पर जोर दिया गया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया है, जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। Axios की रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का नया सौदा मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है:
हार्मुज जलडमरूमध्य: इस रणनीतिक जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। प्रस्ताव में इसे फिर से खोलने और अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकाबंदी को हटाने की मांग की गई है।
युद्ध का अंत: युद्धविराम को लंबे समय तक बढ़ाया जाए या ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी रूप से शत्रुता समाप्त करने पर सहमति बनाई जाए।
परमाणु बातचीत बाद में: परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत बाद के चरण में शुरू की जाए, जब जलडमरूमध्य खुल जाए और नाकाबंदी हट जाए।
व्हाइट हाउस को यह प्रस्ताव मिल चुका है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन इसे स्वीकार करने या आगे बढ़ाने को तैयार होगा या नहीं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने Axios को बताया कि अमेरिका प्रेस के जरिए इतने संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दों पर बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, अमेरिका के पास कार्ड्स हैं और वह केवल वही सौदा करेगा जो अमेरिकी लोगों को प्राथमिकता दे। हम कभी भी ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे।”
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगभग दो महीने का हो चुका है और शांति वार्ता ठप पड़ी हुई है। कुछ दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान जाने वाले अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर की यात्रा रद्द कर दी थी। ट्रंप ने कहा था कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची पाकिस्तान से चले जाने के बाद 18 घंटे की उड़ान भेजने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर वे (ईरान) बात करना चाहते हैं तो बस कॉल कर दें।”
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची पाकिस्तानी मध्यस्थों से बातचीत के लिए इस्लामाबाद लौटे थे। उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। इससे पहले वे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इसहाक डार से भी मिल चुके हैं। अरागची अब रूस पहुंचे हैं, जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने वाले हैं।
यह प्रस्ताव वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल परिवहन का प्रमुख रास्ता है।
क्या अमेरिका स्वीकार करेगा प्रस्ताव
अमेरिका के लिए ईरान का यह तीन सूत्री प्रस्ताव पूरी तरह स्वीकार करने की संभावना कम है। राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार दोहरा चुके हैं कि अमेरिका के पास “सभी कार्ड्स” हैं और वह केवल वही सौदा करेगा जो अमेरिकी हितों की रक्षा करे। मुख्य अड़चन ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए और इसके लिए ठोस, तत्काल प्रतिबद्धता जरूरी है। प्रस्ताव में परमाणु वार्ता को बाद में टालने की बात अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती, क्योंकि व्हाइट हाउस इसे “समय बिताने की रणनीति” मान रहा है।
दूसरी ओर, हार्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और युद्धविराम दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। यदि ईरान होर्मुज खोलने की गारंटी दे, तो ट्रंप प्रशासन अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हो सकता है। लेकिन पिछली बातचीत (पाकिस्तान में) के असफल होने और ब्लॉकेड जारी रखने के फैसले से साफ है कि अमेरिका बिना परमाणु कार्यक्रम पर ठोस छूट के कोई बड़ा समझौता नहीं करना चाहता।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति काम कर रही है। ईरान आर्थिक और सैन्य दबाव में है, इसलिए अमेरिका इस प्रस्ताव को आधार बनाकर आगे बातचीत कर सकता है, लेकिन मूल रूप में स्वीकार नहीं करेगा। अमेरिका शायद मांग करेगा कि परमाणु मुद्दे को पहले हल किया जाए या कम से कम ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने की लिखित गारंटी दे।
बहरहाल, ईरान के तीन सूत्री प्रस्ताव को आंशिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन पूर्ण स्वीकृति तभी संभव है जब ईरान परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अमेरिका की शर्तें मान ले। फिलहाल दोनों पक्ष मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं, इसलिए पूर्ण समझौते में अभी समय लग सकता है।