इसराइल एक तरफ ईरान से युद्ध लड़ रहा है। दूसरी तरफ इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अपराधों को माफ करने की कार्रवाई राष्ट्रपति के पास जोरशोर से जारी है। मंगलवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं। विपक्ष सवाल पूछ रहा है कि क्या इसीलिए युद्ध लंबा खींचा जा रहा है।
इसराइली पीएम नेतन्याहू के करप्शन अपराधों को माफ करने की कार्रवाई तेज़
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ 2020 में करप्शन के आरोपों में मुकदमा शुरू हुआ जो अब जिरह के स्तर पर अदालत में चल रहा है। अदालत का रुख काफी कड़ा है। लेकिन नेतन्याहू की सरकार ने इस दौरान तीन युद्ध लड़ डाले और अभी भी युद्धरत है। 2023 में जब नेतन्याहू के करप्शन के खिलाफ इसराइल की जनता सड़कों पर थी तो हमास के खिलाफ इसराइल ने युद्ध छेड़ा और कहा कि हमास के खत्म होने तक युद्ध जारी रहेगा। जून 2025 में नेतन्याहू ने हमास की मदद का आरोप लगाते हुए ईरान पर हमला किया और 12 दिनों तक युद्ध चला। अमेरिका के दबाव पर युद्ध खत्म हुआ। अब 28 फरवरी 2026 को ईरान पर इसराइल ने फिर हमला किया और युद्ध जारी है। लेकिन मंगलवार 24 मार्च को नेतन्याहू के करप्शन अपराधों को राष्ट्रपति द्वारा माफ करने की कार्रवाई तेज़ हो गई।
मंगलवार 24 मार्च को प्रधानमंत्री नेतन्याहू की माफी (पार्डन) याचिका प्रक्रिया तब आगे बढ़ी, जब हेरिटेज मंत्री अमिचाई एलियाहू (Amichai Eliyahu) ने राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग (Isaac Herzog) को अपनी राय देते हुए ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही जस्टिस मिनिस्ट्री के माफी विभाग (पार्डन्स डिपार्टमेंट) के कानूनी मूल्यांकन और संबंधित दस्तावेज भी भेजे गए।
इसराइली राष्ट्रपति दफ्तर ने बताया कि अब यह फाइल आंतरिक कानूनी समीक्षा प्रक्रिया के अगले चरण में जाएगी। माफी याचिका के निपटान की जिम्मेदारी एलियाहू ने जस्टिस मंत्री यारिव लेविन (Yariv Levin) से अपने हाथ में ली है। यानी यह काम देखने वाला मंत्री बदल गया। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, हर्ज़ोग ने एलियाहू और माफी विभाग का धन्यवाद किया और उनके काम को “संबंधित प्रक्रियाओं के अनुरूप किया गया गहन और व्यापक कार्य” बताया।
यह मामला इसराइल की सबसे असामान्य क्षमादान प्रक्रियाओं में से एक है। मंगलवार का घटनाक्रम इसीलिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि नेतन्याहू का आपराधिक मुकदमा अभी भी जारी है। नेतन्याहू ने 30 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के सामने माफी याचिका दायर की थी। उस समय राष्ट्रपति कार्यालय ने इस “असाधारण कदम, जिसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं” जैसी टिप्पणी की थी।
उस समय बताई गई स्टैंडर्ड प्रक्रिया के अनुसार, याचिका को पहले जस्टिस मंत्रालय के माफी विभाग को भेजा गया, जिसके आकलन के बाद कानूनी समीक्षा के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाना था। अंतिम निर्णय राष्ट्रपति हर्ज़ोग द्वारा लिया जाना है। यानी मंगलवार का घटनाक्रम तेज़ रहा, अब हर्ज़ोग भी जल्द ही निर्णय लेंगे। बहुत मुमकिन है कि राष्ट्रपति हर्ज़ोग इस युद्ध के खत्म होने से पहले नेतन्याहू के अपराधों को माफ कर दें।
यरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत से ही यह याचिका मुकदमे को रोकने के लिए चल रहे सार्वजनिक और राजनीतिक अभियान के बीच आगे बढ़ती रही। जून 2025 में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इसराइल से नेतन्याहू को माफ करने या मुकदमा पूरी तरह रद्द करने की अपील की थी। इससे नेतन्याहू के समर्थकों की ओर से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग और तेज हो गई। जून 2025 वही समय है, जब इसराइल ने ईरान पर हमला किया था, और युद्ध को 12 दिनों तक खींचा गया।
बाद में ट्रंप का यह दबाव सार्वजनिक बयानबाज़ी से औपचारिक स्तर तक पहुंच गया। अक्टूबर 2025 में कई वरिष्ठ मंत्रियों ने हर्ज़ोग को पत्र लिखकर कहा कि यह मुकदमा सामाजिक रूप से विनाशकारी बन गया है और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। यह 2020 में शुरू हुए उस मामले को रोकने की कोशिशों में और वृद्धि थी, जो अब जिरह (क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन) के अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
ट्रंप ने नेतन्याहू की माफी के लिए दो बार कोशिश की
इसके बाद ट्रंप ने भी हर्ज़ोग को अपना हस्ताक्षर वाला पत्र भेजकर नेतन्याहू को माफ करने की अपील की और इस मामले को “राजनीतिक उत्पीड़न” बताया। उसी महीने बाद में नेतन्याहू ने अपनी औपचारिक माफी याचिका भी दायर कर दी।युद्ध के बीच नेतन्याहू के मुकदमे में अभूतपूर्व कदमः कुछ इसराइली अखबारों ने लिखा है कि मंगलवार 24 मार्च का यह घटनाक्रम इसराइल में एक ऐसे प्रयास को आगे बढ़ाता है, जिसकी बहुत कम मिसालें हैं- यानी देश के सबसे महत्वपूर्ण चल रहे आपराधिक मुकदमे को उस समय रोकने की कोशिश है, जब आरोपी अभी भी पद पर है, युद्ध जारी है और सुरक्षा दबाव सार्वजनिक जीवन पर हावी हैं।
नेतन्याहू पर केस नंबर 1000, 2000 और 4000 में रिश्वत, धोखाधड़ी और विश्वासघात (ब्रिच-ऑफ-ट्रस्ट) के आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें उन्होंने खारिज किया है और खुद को निर्दोष बताया है।
केस नंबर 1000
अरबपति अर्नोन मिल्चन और जेम्स पैकर से लगभग 2 लाख डॉलर के महंगे तोहफे (सिगार, शैंपेन, गहने) लिए; बदले में उन्हें अमेरिकी वीजा और टैक्स में छूट दिलाने की कोशिश की। आरोप: धोखाधड़ी और विश्वासघात।
केस नंबर 2000
अखबार ‘येदियोत अहरोनोत’ के मालिक अर्नोन मोझेस से गुप्त समझौता किया कि वो कानून बनाकर प्रतिद्वंद्वी अखबार ‘इसराइल ह्यूम’ को नुकसान पहुंचाएंगे, बदले में नेतन्याहू को पॉजिटिव कवरेज मिलेगा। आरोप: धोखाधड़ी और विश्वासघात
केस नंबर 4000 (सबसे गंभीर)
संचार मंत्री रहते हुए बेजेक टेलीकॉम को सैकड़ों मिलियन का फायदा पहुंचाया; बदले में उसकी न्यूज़ वेबसाइट ‘वाला’ पर नेतन्याहू की तारीफ और विरोधियों पर हमलों की खबरें छपवाई गईं। आरोप: रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात
- इसराइल में रिश्वतखोरी की सजा अधिकतम 10 साल तक हो सकती है। 2020 में शुरू हुआ यह मुकदमा अभी जिरह के चरण में है। राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने कहा है कि माफी पर कोई भी फैसला वे स्वतंत्र रूप से, इसराइली कानून और अपनी अंतरात्मा के अनुसार लेंगे।
इसराइल में नेतन्याहू और युद्ध के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। फाइल फोटो
राजनीतिक लाभ के लिए नेतन्याहू युद्ध लंबा खींच रहेः इसराइली विपक्ष
दो दिन पहले बैलिस्टिक मिसाइल हमले से प्रभावित दक्षिणी इसराइल के अराद शहर के दौरे के दौरान, डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर राजनीतिक लाभ के लिए संघर्ष को लंबा खींचने का आरोप लगाया। गोलान एक पूर्व जनरल भी हैं। गोलान ने कहा कि नेतन्याहू इसराइल को युद्ध की स्थिति में रखना चाहते हैं क्योंकि लड़ाई समाप्त होने पर चुनाव होंगे। गोलान ने कहा, "नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए एक हथियार बना लिया है। यही कारण है कि हम ढाई साल से एक अंतहीन युद्ध में फंसे हुए हैं। निर्णायक जीत की ओर बढ़ने और कूटनीति का उपयोग करके स्थिति को स्थिर करने के बजाय, वह युद्ध को लंबा खींच रहे हैं क्योंकि इसके समाप्त होने पर चुनाव और सरकार में परिवर्तन होना ही है।" बता दें कि इसराइल में अक्टूबर तक चुनाव होने हैं। युद्ध के दौरान विपक्षी नेता शुरू में नेतन्याहू की आलोचना करने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन अब वे संघर्ष से निपटने के सरकार के तरीके और नेसेट में विवादास्पद गैर-युद्ध संबंधी कानूनों को फिर से आगे बढ़ाने के उसके फैसले दोनों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
यायर गोलान ने कहा- ”एक व्यक्ति और एक नाकाम और भ्रष्ट सरकार की वजह से, अगर किसी सेना का नेतृत्व चरमपंथी हो तो भी दुनिया की सबसे बेहतरीन सेना नहीं जीत सकती। यह सरकार सिर्फ एक नया मोर्चा खोलना और एक नया दौर शुरू करना जानती है। न उसे अपना लक्ष्य मालूम है और न कोई रणनीति।”
पिछले सोमवार 16 मार्च को वहां की संसद (नेसेट) में यिसराएल बेतेनु पार्टी के अध्यक्ष अविग्डोर लिबरमैन ने कहा था कि हमें ईरान युद्ध के लक्ष्य को फिर से परिभाषित करना होगा। लिबरमैन ने पूछा, “हमास पर ‘पूर्ण विजय’ कहाँ है?” उन्होंने तंज़ वाले लहजे में कहा “वही ‘पूर्ण विजय’ जो हम तेल अवीव में देख रहे हैं। हमें युद्ध के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से फिर से परिभाषित करना होगा। यह सरकार ऐसा करने में सक्षम नहीं है।” विपक्षी नेता यायर लैपिड ने भी नेतन्याहू की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “युद्ध के कारण हम चुप रहेंगे जबकि वे (नेतन्याहू सरकार) देश को बर्बाद कर देंगे। हम सुरक्षा बलों का समर्थन करते रहेंगे, लेकिन वे हमें चुप कराने में सफल नहीं होंगे। वे सबसे विभाजनकारी, सबसे ध्रुवीकरण करने वाले और सबसे विनाशकारी कानून पेश कर रहे हैं। युद्धकाल में ऐसे कानूनों को लाना बंकरों में रह रहे लोगों, ईरान में उड़ान भर रहे पायलटों और लेबनान में लड़ रहे सैनिकों का अपमान है।”
क्या इसराइल के राष्ट्रपति माफी दे सकते हैं
राष्ट्रपति हर्ज़ोग को क्षमादान प्रदान करने का अधिकार है, लेकिन यह एक असाधारण कदम होगा। क्योंकि इसराइल में ऐसा किसी सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री के लिए पहले कभी नहीं हुआ। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षमादान स्वीकृत होता है, तो मुकदमा समाप्त हो सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है। विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। विपक्ष के नेता यायर लापिड ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" करार दिया, जबकि अन्य ने इसे आरोपों से "भागने" का प्रयास बताया।
नेतन्याहू पूरी दुनिया में बदनामः उन्हें हत्यारा कहा गया, वारंट तक जारी हुए
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर ग़ज़ा युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों की हत्या, युद्ध अपराधों और नरसंहार के आरोप लगे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में उन्हें और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। इसराइल के अंदर भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, न्यायपालिका पर हमले और ग़ज़ा युद्ध को राजनीतिक लाभ के लिए जारी रखने के आरोपों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनों का सिलसिला 2024 से लगातार जारी है।
ICC के मुख्य अभियोजक ने कहा कि यह "नागरिकों को जीवित रहने के लिए आवश्यक वस्तुओं से वंचित करने" का मामला है। इसराइल ने इन आरोपों को "एंटी-सेमिटिक" बताकर खारिज किया, लेकिन 124 ICC सदस्य देशों ने नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। UN विशेषज्ञों ने भी कहा कि ये वारंट "लाइफ को बचाने" में मदद करेंगे।