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युद्ध की आहट के बीच मिलने को राजी हुए बाइडेन और पुतिन 

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने की आहट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मिलने जा रहे हैं। लेकिन इसके लिए शर्त यह रखी गई है कि रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। मुलाकात का प्रस्ताव फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से रखा गया है। फ्रेंच प्रेसीडेंसी की ओर से जारी बयान में यह बात कही गई है। 

दूसरी ओर रूस ने युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है और इसके जरिए उसने दुनिया को अपनी एटमी ताकत दिखाने की कोशिश की है।

फ्रेंच प्रेसीडेंसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने बाइडेन और पुतिन दोनों से बात की है और इनके बीच बैठक कराने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को दोनों देशों के प्रमुखों ने मान लिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि वह इस मामले से जुड़े दूसरे लोगों से भी बात करेंगे।

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इस बीच भारत ने यूक्रेन में रह रहे अपने तमाम नागरिकों और छात्रों से देश छोड़ने के लिए कहा है। यूक्रेन में स्थित भारतीय दूतावास के स्टाफ को भी घर वापस आने के लिए कहा गया है। भारत की ओर से तीन विशेष विमान 22, 24 और 26 फरवरी को यूक्रेन भेजे जाएंगे और इसके जरिए वहां रह रहे भारतीयों को वापस लाया जाएगा।

बाइडेन ने बीते शुक्रवार को कहा था कि रूसी सेनाएं हमले की योजना बना रही हैं और आने वाले कुछ दिनों में वह यूक्रेन पर हमला कर सकती हैं।

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रूस की पूरी तैयारी 

कुछ हाई रिजोल्यूशन की सेटेलाइट तसवीरों से यह बात सामने आई है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा के आसपास अपने सैन्य लड़ाकू विमानों को अहम रणनीतिक जगहों पर तैनात कर दिया है। तसवीरों से यह भी पता चला है कि युद्ध में काम आने वाले तमाम सैन्य उपकरण भी इस इलाके में तैनात हैं। रूस ने यूक्रेन की सीमा पर डेढ़ लाख से ज्यादा जवानों को तैनात किया हुआ है और बीते कुछ दिनों में उनकी गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है। 

लेकिन अगर बाइडेन और पुतिन मिलते हैं तो यह माना जा सकता है कि ऐसे हालात में युद्ध नहीं होगा। क्योंकि दोनों नेताओं की मुलाकात के लिए शर्त यही रखी गई है कि रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। अमेरिका और यूरोपीय देश रूस को चेता चुके हैं कि अगर उसने हमला किया तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। 

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