अमेरिकी नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के प्रमुख जोसेफ केंट का इस्तीफ़ा डोनाल्ड ट्रंप के लिए कितना बड़ा झटका है, यह इससे समझा जा सकता है कि अब व्हाइट हाउस सफ़ाई देता फिर रहा है। यही नहीं, वह अब उसकी तलाश करेगा जिसने ईरान पर हमले से जुड़े फ़ैसले को लीक किया। तो क्या केंट के इस्तीफ़े ने ट्रंप की पूरी पोल खोल कर रख दी है और व्हाइट हाउस की अब कार्रवाई वही संकेत देती है?

लीक की जाँच क्यों?

केंट के इस्तीफ़े से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में बड़े स्तर पर हलचल मची हुई है। केंट का यह इस्तीफा ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य हमलों के विरोध में दिया गया है। व्हाइट हाउस ने बुधवार को इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि जो केंट का ईरान ऑपरेशन में कोई रोल नहीं था और प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि प्रशासन के अंदर से कोई लीक कर रहा है या नहीं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा, 'जो केंट ने ईरान ऑपरेशन से जुड़ी किसी भी चर्चा में हिस्सा नहीं लिया था।' उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन के मुख्य फैसले लेने वाले लोग इससे अलग हैं। व्हाइट हाउस ने केंट के इस्तीफे को लेकर उठे सवालों को कम करने की कोशिश की है और कहा है कि प्रशासन में किसी भी अनधिकृत जानकारी के लीक होने की जांच शुरू कर दी गई है।

केंट ने इस्तीफे की वजह क्या बताई?

जोसेफ़ केंट ने इस्तीफा देते हुए एक्स पर मंगलवार को अपना पत्र पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, 'मैं अच्छे विवेक से ईरान में चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता।' केंट का कहना था कि ईरान ने अमेरिका के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं पैदा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह युद्ध इसराइल और अमेरिका में उसके प्रभावशाली लॉबी के दबाव में शुरू किया गया। केंट ने कहा कि यह युद्ध ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को कमजोर कर रहा है।

ट्रंप ने भी केंट के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा केंट को सुरक्षा मामलों में कमजोर माना था और उनका जाना अच्छी बात है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इसराइली सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी से चल रही है। इस युद्ध में अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, नेताओं और सुविधाओं पर हमले किए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत भी इन हमलों में हुई बताई जाती है।

क्या केंट को थी हटाने की तैयारी?

केंट के इस्तीफे से पहले न्यूयॉर्क पोस्ट में एक रिपोर्ट आई थी। इसमें पूर्व व्हाइट हाउस डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ टेलर बडोविच ने दावा किया कि केंट राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी लीक से जुड़े थे और वे कमांड चेन से टकराव में थे। बडोविच ने कहा कि केंट का इस्तीफा पूरी तरह स्वैच्छिक नहीं था, उन्हें हटाया जा रहा था। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की, लेकिन लीक की जांच को प्राथमिकता बताया है।

ईरान युद्ध पर अमेरिका में मंथन

ईरान युद्ध को लेकर सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी में जल्द सुनवाई होने वाली है। इसमें ग्लोबल थ्रेट्स पर चर्चा होगी। डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गब्बर्ड और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ जैसे अधिकारी सवालों का सामना करेंगे। ईरान युद्ध के उद्देश्य, आंतरिक असहमति और केंट के इस्तीफे पर सवाल उठेंगे।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में इस युद्ध पर मतभेद हैं। रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन ने इसे 'बहुत सफल' बताया और कहा कि इससे ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर क्षमता खत्म हो जाएगी। वहीं डेमोक्रेट्स ने इसे 'चुनिंदा युद्ध' कहा है। सीनेटर मार्क वार्नर ने कहा कि अमेरिका या उसके सहयोगियों पर कोई तत्काल खतरा नहीं था।
कई मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप को हमले से पहले इंटेलिजेंस रिपोर्ट में ईरान के जवाबी हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में रुकावट की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन के कुछ दावे इंटेलिजेंस से पूरी तरह मेल नहीं खाते।
जोसेफ केंट का इस्तीफा, लीक के आरोप और राजनीतिक दबाव से व्हाइट हाउस पर ईरान युद्ध की रणनीति समझाने का दबाव बढ़ गया है। हाउस इंटेलिजेंस कमिटी गुरुवार को इसी तरह की सुनवाई करेगी। वाशिंगटन में यह मुद्दा लगातार नजरों में बना हुआ है। यह घटना ट्रंप प्रशासन में आंतरिक मतभेदों को दिखाती है और ईरान युद्ध के भविष्य पर सवाल खड़े करती है।