ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई के दौरान शनिवार को राजधानी तेहरान की सड़कें और चौक-चौराहे गहरे आक्रोश और गम में डूब गए। अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों में मारे गए खामेनेई के छह दिवसीय राजकीय शोक और जनाजे की रस्मों के दूसरे दिन तेहरान में लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरा शहर अमेरिका और इसराइल के खिलाफ नारों से गूंज उठा और भीड़ ने 'किल ट्रम्प' और "प्रतिशोध! प्रतिशोध!" के नारे लगाकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
अयातुल्लाह अली खामेनेई (86 वर्ष), जिनकी इस साल फरवरी में अमेरिका-इसराइल के हवाई हमलों में मौत हो गई थी, के पार्थिव शरीर को शनिवार को तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला (Grand Mosalla) में एक कांच के ताबूत में जनता के दर्शन के लिए रखा गया। ताबूत के ऊपर उनका पारंपरिक काला साफा (टर्बन) रखा हुआ था। खामेनेई के साथ उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के ताबूत भी वहां मौजूद थे, जिन्हें इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा की तरह दिखने वाले एक बड़े काले मंच पर रखा गया था। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, तेहरान में अगले तीन दिनों के भीतर लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मीद है। शिया परंपरा के अनुसार, लोग अपनी मातम करते हुए रो रहे थे और हाथ में खामेनेई की तस्वीरें व बैनर लिए हुए थे।

क्या मुजतबा खामेनेई सामने आएंगे

पूरे दुनिया में जिस खबर पर सबसे ज्यादा नज़र है, वो है नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का सामने आना। ईरानी राजधानी में भारी भीड़ जमा है, लेकिन उनके बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर का कोई पता नहीं है। मुजतबा खामेनेई अभी तक सबके सामने नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर शक बढ़ रहा है और यह सवाल भी उठ रहा है कि देश की कमान किसके हाथ में है। हालांकि ईरानी सरकार ने कई कार्यक्रमों की जानकारी दी है, लेकिन मुजतबा के सामने आने की कोई योजना घोषित नहीं की गई है; वैसे भी, सुरक्षा कारणों से ऐसा कोई भी फ़ैसला पहले से सार्वजनिक किए जाने की संभावना कम ही है। 
इस बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के दो सदस्यों और अंतिम संस्कार की योजना बनाने में शामिल एक व्यक्ति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 56 वर्षीय खामेनेई ने अधिकारियों से कहा है कि उन्हें 9 जुलाई को मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह पर होने वाले दफ़न के कार्यक्रम में शामिल होना दिया जाए। वो अपने पिता के पार्थिव शरीर के पास मृतकों के लिए दुआ करना चाहते हैं। लेकिन आईआरजीसी ने सुप्रीम लीडर को सार्वजनिक रूप से नहीं आने को कहा है। ईरानी सेना आईआरजीसी ही मुजतबा की सुरक्षा कर रही है।

शनिवार 4 जुलाई को को शोकग्रस्त ईरान का प्रतिनिधित्व करती तस्वीर

महबूबा मुफ्ती खामेनेई के शहादत स्थल पर पहुंचीं

इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मौके पर दुनिया भर के कई नेता और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक भी तेहरान पहुंचे हैं। भारत की ओर से गए प्रतिनिधिमंडल में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी तेहरान पहुंचकर अयातुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। महबूबा मुफ्ती ने ईरान के हुसैनिया जामरान (Husayniah Jamaran) का भी दौरा किया, जिसे वह स्थान बताया जा रहा है जहां ईरानी नेता ने 'शहादत' प्राप्त की थी। सोशल मीडिया पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए महबूबा मुफ्ती ने इसे एक "बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला अनुभव" बताया। उन्होंने लिखा: "तेहरान में मौजूद रहकर खामेनेई साहब के निधन पर अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त करना मेरे लिए सम्मान की बात है। वह एक ऐसे सम्मानित नेता थे जिन्होंने समय की विपरीत धाराओं के खिलाफ खड़े होने का साहस किया और हमेशा मजलूमों (दबे-कुचले लोगों) के हक की लड़ाई लड़ी।"

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भी दी श्रद्धांजलि

भारत के अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भी शुक्रवार को तेहरान पहुंचकर दिवंगत सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि दी। पीएम शरीफ ने खामेनेई के योगदान को याद करते हुए उन्हें "असाधारण बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता वाला नेता" बताया और कहा कि आने वाली पीढ़ियां उनके नेतृत्व को याद रखेंगी।
उधर, युद्ध के बाद बदले हालातों पर ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को अब क्षेत्र की बदली हुई वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ओमान और ईरान के संयुक्त प्रबंधन से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी दखल कम होगा, जिससे व्यापारिक रिश्ते और बेहतर होंगे। गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को खामेनेई के जनाज़े पर बेतहाशा रोते हुए देखा गया।