ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों से पहले तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़ जमा हो गई है। ये रस्में 4 जुलाई से 9 जुलाई तक होनी हैं। लाखों लोग शोक मनाने के लिए तेहरान की सड़कों पर जमा हुए; इनमें से कई काले कपड़े पहने हुए हैं, ईरानी झंडे लहरा रहे है। लोगों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें भी है। शुरुआती तस्वीरों में खामेनेई का ताबूत एक हॉल के अंदर दिखाई दिया, जिसे ईरानी झंडे के रंगों से सजाया गया था। ताबूत को इमाम हुसैन के मज़ार से लाए गए एक पवित्र लाल झंडे से ढका गया था, जिस पर सफेद अक्षरों में क़ुरान आयतें लिखी थीं। ईरानी सरकार के अनुसार, यह झंडा "प्रतिरोध, बलिदान और सच्चाई के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक" है। इस बीच भारत से एक प्रतिनिधिमंडल ईरान रवाना हो गया है। उधर, ईरान की टॉप लीडरशिप की हत्या के इसराइली प्लान से अमेरिका ने सचेत किया है।
अमेरिका ने मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों से अपील की है कि वे ईरान को इसराइली हत्या की साजिशों के प्रति सतर्क करें। इसराइल कथित तौर पर तेहरान के शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाने की फिराक में है, जिससे अप्रैल की शुरुआत में शुरू हुई युद्धविराम वार्ता खटाई में पड़ सकती थी। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस कथित साजिश के केंद्र में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाघर गालिबफ थे।

इसराइल की युद्ध रणनीति से सहमा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि संघर्ष के सबसे भीषण दौर के दौरान, दोनों नेताओं (अराघची और गालिबफ) को इसराइल द्वारा वैध निशाना माना जा सकता था, क्योंकि वह ईरान की कट्टरपंथी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहता था। हालांकि, अप्रैल में जब गंभीर बातचीत शुरू हुई, तो अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि ऐसे किसी भी हमले से बातचीत पटरी से उतर जाएगी और लड़ाई फिर से भड़क जाएगी।
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यह युद्ध 28 फरवरी को एक इसराइली हमले के साथ शुरू हुआ था, जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। इस हमले में आंशिक रूप से अमेरिकी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया गया था। जहाँ अमेरिकी हमले ईरान की नौसेना और मिसाइल बलों पर केंद्रित थे, वहीं इसराइल ने शुरुआती चरण में नेतृत्व (लीडरशिप) को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि अधिक से अधिक शीर्ष नेताओं को मारा जा सके।
मारे गए लोगों में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी शामिल थे। इन दोनों को अधिक व्यावहारिक (प्रैग्मैटिक) नेता माना जाता था, जिनके साथ ट्रंप प्रशासन बातचीत की उम्मीद कर रहा था। ये दोनों नेता अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल थे, तभी इसराइली हवाई हमलों में उनकी मौत हो गई।

हिट लिस्ट और बाल-बाल बचे गालिबफः 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के अनुसार, अरागची और गालिबफ दोनों मार्च से ही इसराइल की हिट लिस्ट (निशाने की सूची) पर थे, लेकिन युद्धविराम वार्ता शुरू होने के बाद अमेरिका के कड़े आग्रह पर उनका नाम सूची से हटा दिया गया था। गालिबफ 2025 के बाद से दो बार मौत के मुंह से बाल-बाल बचे हैं। पहली बार पिछले साल के 12 दिनों के युद्ध के दौरान और दूसरी बार इस साल का संघर्ष शुरू होने के बाद। अधिकारियों ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को बताया कि दोनों बार उन्हें मलबे के नीचे से निकाला गया था।

डरे नहीं अरागची और गालिबफ

हालांकि, हत्या का खतरा तब फिर से मंडराने लगा जब गालिबफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के साथ बातचीत के बाद तेहरान लौट रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी खुफिया एजेंसी ने एक ऐसी जानकारी जुटाई जिससे संकेत मिले कि इसराइल गालिबफ को ले जा रहे विमान को निशाना बनाने की योजना बना रहा था और दो इसराइली लड़ाकू विमान ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस चुके थे। इसके बाद विमान की पाकिस्तानी सीमा के सबसे नजदीक ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग (इमरजेंसी लैंडिंग) कराई गई और गालिबफ बाद में सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचे। इस सब के बावजूद, ईरानी अधिकारी यात्रा करने से पीछे नहीं हटे हैं। मई में, गालिबफ और अरागची दोनों ने शांति वार्ता के लिए कतर और बाद में स्विट्जरलैंड की यात्रा की।

मुजतबा खामेनेई पिता के जनाज़े में शामिल नहीं होंगे

भारत में ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अयातुल्लाह हकीम इलाही ने कहा कि यह फ़ैसला इसराइल से कथित धमकियों और निगरानी के डर की वजह से लिया गया है, क्योंकि इन हालात में अंतिम संस्कार के दौरान मुजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से सामने आना सुरक्षित नहीं होगा।

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और अन्य नेता आज तेहरान पहुंच रहे

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और कई वरिष्ठ मंत्री शुक्रवार को ईरान पहुंच रहे हैं। वे पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जिनकी फरवरी में अमेरिका और इसराइल के हमलों में हत्या कर दी गई थी। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, "प्रधानमंत्री पाकिस्तान की जनता और सरकार की ओर से ईरान के नेतृत्व और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करेंगे और इस गहरे दुख की घड़ी में इस मित्र देश के साथ एकजुटता दोहराएंगे।"

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत सरकार ने किसको भेजा?

विदेश राज्य मंत्री (MoS) पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए शुक्रवार को ईरान जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह घोषणा की। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पवित्र मार्गेरिटा और सैयद अता हसनैन, खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 3 जुलाई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान जा रहे हैं। मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "समारोह में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों सहित सभ्यतागत रिश्तों के महत्व को रेखांकित करता है, जो राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।"

चीन से उच्चस्तरीय दल ईरान जा रहा है

चीन, तेहरान में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने शीर्ष वरिष्ठ अधिकारी को भेजेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई शुक्रवार को अंतिम संस्कार समारोह में चीन का प्रतिनिधित्व करेंगे। फरवरी में अमेरिका और इसराइल के हमलों में ईरान के पूर्व नेता की मौत के बाद से, किसी वरिष्ठ चीनी अधिकारी का ईरान का यह पहला दौरा होगा।