मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के कार्यक्रम में शामिल होने वाले न्यूयॉर्क के धर्मगुरुओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें गुमराह कर मोहन भागवत के कार्यक्रम में बुलाया गया था। कार्यक्रम में शामिल हुए न्यूयॉर्क के तीन प्रमुख धर्मगुरुओं ने अब सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्हें कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी कि उसमें आरएसएस शामिल होगा, मोहन भागवत केंद्र में होंगे और हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़े संगठनों का यह कार्यक्रम होगा। उन्हें शांति और सद्भाव का कार्यक्रम बताकर निमंत्रण भेजा गया था। धर्मगुरुओं का कहना है कि अगर उन्हें पहले से पता होता कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत होंगे और आयोजन आरएसएस से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा है, तो वे इसमें शामिल नहीं होते।

रिवरसाइड चर्च की पादरी बोलीं- यह मेरी गलती थी

न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध रिवरसाइड चर्च की वरिष्ठ पादरी रेव. एड्रिएन थॉर्न ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में अपनी मौजूदगी को 'गलती' बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति से यह गलत संदेश गया कि वह, या उनका चर्च, मोहन भागवत, आरएसएस या उससे जुड़ी विचारधारा का समर्थन करता है। उन्होंने साफ कहा, 'ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैं आरएसएस या उससे जुड़ी विचारधारा का समर्थन नहीं करती।'
थॉर्न ने बताया कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान उन्हें वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलिजियस लीडर्स नाम के एक समूह की ओर से लगातार निमंत्रण भेजे गए। उनके अनुसार, निमंत्रण में बताया गया था कि यह विभिन्न धर्मों के नेताओं का सम्मेलन होगा, जहां शांति, मानव गरिमा और धार्मिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। उन्हें बताया गया था कि लगभग 200 धर्मगुरु इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि इस जानकारी के आधार पर उन्हें कार्यक्रम सामान्य अंतरधार्मिक संवाद जैसा लगा।

मुख्य अतिथि का नाम छिपाया गया

रेव. थॉर्न का आरोप है कि कार्यक्रम के आयोजकों ने कई अहम जानकारियाँ उनसे छिपाईं। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी नहीं बताया गया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोहन भागवत होंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें यह जानकारी भी नहीं दी गई कि कार्यक्रम में आरएसएस की भूमिका है या आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue यानी AHEAD Forum से जुड़ा है।
थॉर्न के मुताबिक, कार्यक्रम की जो सूची उन्हें भेजी गई थी, उसमें 'मुख्य अतिथि' वाला स्थान खाली छोड़ा गया था। बाद में उन्हें पता चला कि वह स्थान मोहन भागवत के लिए रखा गया था। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे पहले से यह जानकारी होती तो मैं कभी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होती।'

आरएसएस पर लगाए गंभीर आरोप

अपने बयान में थॉर्न ने आरोप लगाया कि आरएसएस पर भारत में मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका चर्च धार्मिक विविधता, सामाजिक न्याय और सभी समुदायों के सम्मान के सिद्धांतों पर काम करता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी तरह की धार्मिक सर्वोच्चता का समर्थन नहीं करतीं।

कैथेड्रल की डीन ने भी जताया अफसोस

कैथेड्रल ऑफ सेंट जॉन द डिवाइन की डीन विनी वर्गीज़ ने भी कहा कि उनके कई सहयोगियों को कार्यक्रम में बुलाया गया था, लेकिन उन्हें भी यह नहीं बताया गया कि मोहन भागवत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। उन्होंने कहा कि आरएसएस का नाम सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा लगता है, लेकिन उनके अनुसार संगठन पर भारत में दलितों, मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

वर्गीज़ ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि उनके कुछ साथी अनजाने में ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा बन गए, जिससे यह संदेश गया कि वे आरएसएस की विचारधारा का समर्थन करते हैं।

मुस्लिम धर्मगुरु ने भी मांगी माफी

न्यूयॉर्क के मुस्लिम धर्मगुरु और अंतरधार्मिक संवाद से जुड़े नेता इमाम शम्सी अली ने भी इस कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी को 'निर्णय लेने में गंभीर गलती' बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह नहीं बताया गया था कि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र मोहन भागवत होंगे।
इमाम अली ने कहा, 'अगर मुझे कार्यक्रम का वास्तविक उद्देश्य पहले से पता होता तो मैं इसमें कभी शामिल नहीं होता।' उन्होंने आगे कहा कि कार्यक्रम में शांति की बातें की गईं, लेकिन उनके अनुसार यह भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर उनकी चिंताओं से मेल नहीं खातीं। इमाम अली ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि वह भविष्य में ऐसे किसी कार्यक्रम से जुड़ने से पहले पूरी जानकारी सुनिश्चित करेंगे।

क्या है पूरा विवाद?

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था। अब कार्यक्रम में शामिल तीन प्रमुख धर्मगुरुओं ने दावा किया है कि उन्हें निमंत्रण देते समय यह नहीं बताया गया था कि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मोहन भागवत होंगे या इसका संबंध आरएसएस से होगा।
इन धर्मगुरुओं ने कहा है कि उनकी मौजूदगी को आरएसएस या हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है।

इस मामले में धर्मगुरुओं ने अपने बयान में आरएसएस और उसकी विचारधारा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब तक आरएसएस या कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।