ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई ने कहा, 'अगर फ़ारस की खाड़ी के देश और सरकारें इस्लाम के झंडे तले एकजुट हो जाएं तो क्या उनमें हज़ारों किलोमीटर दूर से आए भ्रष्ट और बिना पहचान वाले बदमाशों को हमारी ज़मीन और संपत्ति पर नज़रें गड़ाने की हिम्मत होगी?'
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई ने कहा है कि मुस्लिम देशों को अपने 'असली दुश्मन' की पहचान करनी चाहिए और उसके खिलाफ मिलकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन के अवसर पर मुस्लिम देशों और उनकी सरकारों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने अमेरिका और इसराइल की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि ये ताकतें मुस्लिम देशों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
खामेनेई का यह संदेश उनके आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर लिखित बयान के रूप में जारी किया गया। अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि मुस्लिम देशों के दुश्मन नस्ल, संस्कृति, भाषा, राजनीति और भौगोलिक अंतर को बहाना बनाकर इस्लामी दुनिया में फूट डालना चाहते हैं।
खामेनेई ने कहा कि इन ताक़तों का मक़सद मुस्लिम देशों को कमजोर करना है ताकि सही समय आने पर उन पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया जा सके। उन्होंने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि वे किसी भी ऐसे क़दम से बचें, जिससे इस्लामी देशों के बीच मतभेद बढ़ें।
अमेरिका और इसराइल पर साधा निशाना
खामेनेई ने अपने बयान में अमेरिका और इसराइल का नाम लिए बिना पहले 'असली दुश्मन' का ज़िक्र किया और बाद में साफ़ तौर पर कहा कि अमेरिका और 'फर्जी जियोनिस्ट शासन' (इसराइल) इस्लामी एकता के सबसे बड़े विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि ये केवल ईरान या तथाकथित 'इस्लामी रेजिस्टेंस' के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया और पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका के देशों के भी विरोधी हैं।
'अगर मुस्लिम देश एकजुट होते तो...'
खामेनेई ने सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर मुस्लिम देश एकजुट होते तो क्या फिलिस्तीन के लोग आज इस तरह अत्याचार और कब्जे का शिकार होते?' उन्होंने आगे कहा,
अगर फारस की खाड़ी के देश और सरकारें इस्लाम के झंडे तले एकजुट हो जाएं तो क्या हजारों किलोमीटर दूर से आए भ्रष्ट और बिना पहचान वाले लोग उनकी जमीन और संपत्ति पर नजर डालने की हिम्मत कर सकते हैं?
उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों की रक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग और पारस्परिक सुरक्षा की भावना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने मुसलमानों को बांटने वाले किसी भी कदम के खिलाफ़ अपील की।
कई महीनों से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे
मुजतबा खामेनेई पिछले क़रीब छह महीनों से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नज़र नहीं आए हैं। अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध के दौरान हुए हवाई हमलों में उनके घायल होने की ख़बरें सामने आई थीं। उसी संघर्ष में उनके पिता और तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी।हाल के महीनों में मुजतबा के स्वास्थ्य और ठिकाने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि मुजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं।
आर्थिक चुनौतियों का भी किया जिक्र
मुजतबा खामेनेई ने एक अन्य लिखित संदेश में ईरान के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से महंगाई, बेरोजगारी, बाजार में कीमतों पर नियंत्रण और आम लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जिससे लोगों की आर्थिक परेशानियां कम हों और बाजार में स्थिरता आए।
'कूटनीति और रक्षा दोनों जरूरी'
ईरान सरकार ने भी हाल ही में कहा है कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कूटनीति और रक्षा दोनों समान रूप से जरूरी हैं। सरकार के अनुसार, बातचीत और मजबूत रक्षा व्यवस्था एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के संतुलन से ही देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुरक्षित रखी जा सकती है।
बहरहाल, मुजतबा खामेनेई का यह संदेश तब आया है जब ईरान अमेरिका के प्रतिबंधों, युद्ध के आर्थिक प्रभाव और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में उन्होंने मुस्लिम देशों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की अपील की।