नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही आई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने गुरुवार को कहा कि नेपाल और पड़ोसी तिब्बत में आई भयानक बाढ़ और उससे बहकर आए कीचड़, पत्थरों और पानी की चपेट में आकर अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं; इनमें लगभग 300 भारतीय भी शामिल हैं। हालाँकि, नेपाल सरकार या भारत की ओर से लापता भारतीयों की सही संख्या के बारे में अभी तक कोई पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट है कि क़रीब 1500 लोग लापता हैं।

सैकड़ों की संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका है। बाढ़ के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है, जबकि भारत के बिहार में भी कोशी और गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही यूपी के महाराजगंज, कुशीनगर जैसे इलाकों में भी अलर्ट जारी किया गया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने तैयारियाँ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। 

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार बुधवार सुबह क़रीब 9 बजे तिब्बत की ओर से आने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया। देखते ही देखते यह पानी रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में फैल गया। बाढ़ इतनी तेज थी कि कई घर, पुल, सड़कें, वाहन और निर्माणाधीन परियोजनाएं बह गईं। सीमा के पास स्थित तिमुरे बाजार और कस्टम क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज बहाव में पुल बहते और मकान ताश के पत्तों की तरह गिरते दिखाई दे रहे हैं। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।

नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा नेपाल के कई पुलिस चौकियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सीमा पर तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स के 9 जवान भी लापता बताए जा रहे हैं। कई गांवों के लोगों से संपर्क टूट गया है।


अधिकारियों का कहना है कि मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई इलाकों तक अभी राहत दल पहुंच ही नहीं पाए हैं।
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105 भारतीय समेत 291 विदेशी नागरिक लापता

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। बोर्ड के अनुसार 105 भारतीय नागरिक लापता हैं। कुल 291 विदेशी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। वैसे, बोर्ड ने कहा है कि कुल 384 यात्रियों के लापता होने की ख़बर है जिसमें कई नेपाली यात्री भी शामिल हैं।
कई लोग सीमा के पास पर्यटन और निर्माण कार्यों से जुड़े हुए थे। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है, लेकिन तेज बहाव और खराब मौसम के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

हेलीकॉप्टर भी नहीं उतर पाए

नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को राहत और बचाव कार्य में लगाया है। दो सैन्य हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाकों की ओर भेजे गए, लेकिन कई स्थानों पर पानी का स्तर इतना अधिक था कि हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से उतर नहीं सके। नेपाल के प्रधानमंत्री ने आपात बैठक बुलाकर अधिकारियों को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

बिजली परियोजनाओं और पुलों को भारी नुकसान

बाढ़ से नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार करीब 430 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है, जो नेपाल की कुल जलविद्युत क्षमता का लगभग 12 प्रतिशत है। इसके अलावा कई सड़कें टूट गई हैं। नए बने पुल बह गए। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी क्षतिग्रस्त हो गया है। व्यापार और आवाजाही पर असर पड़ा है। नेपाल सरकार ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

बाढ़ की वजह क्या है?

विदेश मंत्री शिशिर कनाल ने सांसदों को बताया कि भूकंप की वजह से बर्फ और चट्टानों का खिसकना शुरू हुआ जिससे बाढ़ आई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कनाल ने कहा, 'सुबह 8:37 बजे भूकंप आया और उसकी वजह से ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया, जिससे नदी का रास्ता रुक गया; ऐसा लगता है कि इसी वजह से बाढ़ आई।' अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने उसी समय उस इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया, जिसका ज़िक्र कनाल ने किया था। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने बताया कि सुरक्षा फुटेज में दिख रहे समय से लगभग सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था।

इससे पहले नेपाल की बाढ़ पूर्वानुमान यूनिट का कहना था कि रसुवा जिले में इतनी बारिश नहीं हुई थी कि इतनी बड़ी बाढ़ आ जाए। हालाँकि उपग्रह तस्वीरों में तिब्बत की ओर भारी वर्षा दर्ज हुई है। लेकिन वैज्ञानिकों को संदेह है कि कहीं हिमनद झील फटने के कारण अचानक पानी का बहाव तो नहीं आया। अभी विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं। हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

नेपाल से लगे चीन के तिब्बती क्षेत्र ग्यिरोंग में भी भूस्खलन की खबर है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार कई लोग मारे गए हैं। कई लोग लापता हैं। सड़क, बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। चीन सरकार ने भी राहत अभियान तेज कर दिया है।
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बिहार में हाई अलर्ट

नेपाल में आई बाढ़ का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों का पानी आगे चलकर गंडक नदी में मिलता है, जो बिहार में प्रवेश करती है। बिहार सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए कोशी और गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। रिपोर्ट है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के सीएम से फोन पर बात की है और स्थिति का जायजा लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल को हर संभव मदद की पेशकश की है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।' 
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे पानी का स्तर घटेगा, लापता लोगों की तलाश और नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा। वहीं भारत और नेपाल दोनों देशों की एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।