वेनेजुएला के काराकस में विस्फोटों की ख़बर आने के कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पकड़े जाने की ख़बर आ गई। तो क्या मुदुरो को पकड़ना इतना आसान था? या फिर अमेरिका ने इसके लिए कोई लंबी और बड़ी योजना बनाई थी? दरअसल, मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका ने बड़ी चतुराई से जाल बिछाया था।

पेंटागन ने कैरिबियन क्षेत्र में बड़ा सैन्य जमावड़ा किया था। एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 11 युद्धपोत, दर्जनों एफ-35 लड़ाकू विमान और 15000 से ज्यादा सैनिक तैनात थे। अधिकारियों का कहना था कि यह ड्रग्स के ख़िलाफ़ ऑपरेशन था, लेकिन असल में मादुरो को पकड़ने की तैयारी थी। ऑपरेशन में 150 से ज्यादा विमान शामिल थे, जो 20 बेस से उड़े थे। इसमें एफ-35, एफ-22 जेट और बी-1 बॉम्बर थे। ट्रंप ने कहा, 'हर संभव स्थिति के लिए हमारे पास लड़ाकू विमान थे।' अमेरिका ने रिफ्यूलिंग टैंकर, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग वाले विमान भी लगाए।
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'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम से जाने जा रहे इस अभियान की ख़बर दुनिया भर में फैलते ही सब हैरान रह गए, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसकी प्लानिंग कई महीनों से चल रही थी। रायटर्स ने इस पर ख़बर दी है। घंटों तक चले ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व में क्या हुआ, यह उन चार सूत्रों के इंटरव्यू पर आधारित है जो इस मामले से परिचित हैं और उन डिटेल्स पर भी जो खुद ट्रंप ने बताई हैं।

अभियान में अमेरिकी आर्मी की एलीट यूनिट डेल्टा फोर्स ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने मादुरो के सुरक्षित घर की बिल्कुल नकल बनाकर कई बार रिहर्सल की। कैसे अंदर घुसना है, कैसे स्टील के दरवाजों को तोड़ना है, सब कुछ प्रैक्टिस किया गया।

महीनों की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अगस्त से ही सीआईए की एक छोटी टीम वेनेजुएला में थी। वे मादुरो की रोज की आदतों पर नज़र रख रहे थे- कहाँ सोते हैं, क्या खाते हैं, कब कहाँ जाते हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि मादुरो के बहुत करीब एक व्यक्ति भी अमेरिका के लिए जानकारी दे रहा था, जो ऑपरेशन के समय उनकी सटीक लोकेशन बताता रहा।

ट्रंप ने चार दिन पहले इस ऑपरेशन को मंजूरी दी थी, लेकिन मौसम बेहतर होने का इंतजार किया गया। शुक्रवार रात 10:46 बजे ट्रंप ने अंतिम हरी झंडी दी। ट्रंप अपने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो क्लब में सलाहकारों के साथ बैठकर लाइव स्ट्रीम देख रहे थे। उनके साथ स्टीफन मिलर, मार्को रूबियो, पीट हेगसेथ और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ जैसे लोग थे। ये लोग महीनों से रोज मीटिंग कर रहे थे।
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शुक्रवार देर रात से शनिवार तड़के तक अमेरिकी विमानों ने काराकस और आसपास के इलाकों पर हमले किए। एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। रॉयटर्स की तस्वीरों में काराकस के ला कार्लोटा एयर बेस पर जले हुए वाहन दिखे।

कैसे पकड़े गए मादुरो?

अमेरिकी समय के अनुसार शनिवार सुबह करीब 1 बजे स्पेशल फोर्सेस भारी हथियारों से लैस होकर काराकस पहुंचीं। उनके पास ब्लोटॉर्च भी था, ताकि स्टील के दरवाजे काट सकें। रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने बताया कि सैनिक मादुरो के कंपाउंड में पहुंचे तो गोलीबारी हुई। एक हेलिकॉप्टर को गोली लगी, लेकिन वह उड़ता रहा।

शहर के लोग कम ऊंचाई पर उड़ते हेलिकॉप्टरों की आवाज सुनकर डर गए। सोशल मीडिया पर वीडियो आए, जिसमें हेलिकॉप्टरों का काफिला दिखा।
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सैनिक मादुरो के घर में घुसे, जो एक बेहद सुरक्षित किला जैसा था। ट्रंप ने कहा, 'वे ऐसे दरवाजे तोड़े जो तोड़े नहीं जा सकते थे। सेकंडों में सब हो गया।' ट्रंप बोले, 'मादुरो सेफ रूम में पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दरवाजा बंद नहीं कर पाए। इतनी तेजी से सैनिक पहुंच गए।' मादुरो और उनकी पत्नी ने सरेंडर कर दिया। अमेरिकी सैनिकों पर कुछ गोली लगी, लेकिन कोई मारा नहीं गया। सैनिक मादुरो दंपति को लेकर निकले तो रास्ते में कुछ झड़पें हुईं।