अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका यूक्रेन के लिए पैट्रियट मिसाइल सिस्टम भेजेगा ताकि वो खुद की रक्षा कर सके। हालांकि कुछ हफ्ते पहले तक ट्रंप साफ कह रहे थे कि अब यूक्रेन को हथियार नहीं मिलेंगे। उनका कहना था कि अमेरिका पहले अपने काम देखेगा। लेकिन अब अचानक उन्होंने यू-टर्न ले लिया — कह रहे हैं कि यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम दिए जाएंगे, और साथ ही रूस पर नए कड़े प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। अब सवाल उठता है — आखिर हुआ क्या? ट्रंप की सोच अचानक बदल कैसे गई?
रविवार को ट्रंप ने एक बार फिर रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर नाराज़गी जताई — यूक्रेन में चल रही जंग को लेकर वो खासे खफा नज़र आए। यूक्रेन को मिलने वाले इन जरूरी हथियारों की घोषणा ट्रंप ने ऐसे वक्त में की है, जब उन्होंने कहा है कि सोमवार को वो रूस को लेकर एक "बड़ा बयान" देने वाले हैं। ये एलान ऐसे समय पर हो रहा है जब सोमवार को कई अहम कूटनीतिक बैठकों की तैयारी है — अमेरिका का विशेष दूत यूक्रेन दौरे पर जा रहा है और ट्रंप वॉशिंगटन में नाटो के महासचिव मार्क रिटे से मिलने वाले हैं।
यूक्रेन और रूस की जंग पिछले कई सालों से खबरों में बनी हुई है। इस जंग में अमेरिका क्या करता है, उस पर सबकी नज़र रहती है। अब ट्रंप ने जो नया फैसला लिया है — यानी यूक्रेन को बेहद एडवांस हथियार देने का — वो पूरे खेल को बदल सकता है। खास बात ये है कि ये सब कुछ नाटो देशों के साथ मिलकर हो रहा है। अब सवाल उठता है — ये पैट्रियट सिस्टम आखिर है क्या? और क्यों इसे इतना खास माना जा रहा है? तो चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि ये सिस्टम कैसे काम करता है और इससे यूक्रेन को क्या फायदा होगा।
पैट्रियट वायु रक्षा सिस्टम एक सुपर एडवांस टेक्नोलॉजी है जो हवा में आती मिसाइलों और ड्रोन्स को पल भर में पकड़ लेती है और गिरा देती है। इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की कई बार कह चुके हैं कि उन्हें कम से कम 10 ऐसे सिस्टम चाहिए, क्योंकि रूस लगातार उनके शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। अब ट्रंप ने रविवार को ऐलान किया कि अमेरिका यूक्रेन को ये पैट्रियट सिस्टम देगा।
लेकिन दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप ने कहा, "हम उन्हें एडवांस हथियार ज़रूर देंगे, लेकिन उसका पूरा पैसा वो हमें चुकाएँगे।" यानी यूक्रेन या उसके साथी देश जैसे यूरोपीय यूनियन को इन हथियारों की कीमत चुकानी होगी। ट्रंप ने तो साफ कहा, "ये अमेरिका के लिए एक अच्छा बिजनेस है।" ट्रंप ने ये भी बताया कि नाटो अमेरिका से ये सिस्टम खरीदेगा और फिर यूक्रेन को देगा। ज़ेलेंस्की ने बताया कि जर्मनी दो सिस्टम्स के लिए फंड देने को तैयार है, नॉर्वे एक के लिए और बाकी यूरोपीय देश भी मदद करने को तैयार हैं। अब सवाल ये है — ट्रंप ने अचानक यूक्रेन की मदद का फैसला क्यों किया?
रूस के खिलाफ मैदान में उतरे ट्रंप सिर्फ हथियार भेजने तक ही नहीं रुके हैं — अब वो रूस पर और भी सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं। उन्होंने इशारा किया है कि रूस पर नए, भारी-भरकम प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। रविवार को कुछ अमेरिकी सीनेटरों ने भी एक ऐसे बिल की तारीफ की, जो ट्रंप को रूस पर "हथौड़े जैसे" सख्त प्रतिबंध लगाने की पूरी ताकत देगा। यानी रूस पर अब और दबाव बनाया जाएगा।
ये एलान ऐसे समय पर हुआ है जब सोमवार को वॉशिंगटन में ट्रंप की नाटो महासचिव मार्क रुटे से अहम मुलाकात होने वाली है। साथ ही अमेरिका का एक खास दूत भी यूक्रेन के दौरे पर निकल रहा है। मतलब, हथियारों के साथ-साथ कूटनीति की रफ्तार भी अब तेज हो गई है। ट्रंप ने ये भी बताया कि नाटो के साथ मिलकर एक डील हो चुकी है, जिसके तहत यूक्रेन को हथियार मिलेंगे और उसका ज़्यादातर खर्च नाटो उठाएगा।
ज़ेलेंस्की ने रोम में साफ कहा कि जर्मनी, नॉर्वे और बाकी यूरोपीय देश पैट्रियट मिसाइल सिस्टम्स की लागत उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ट्रंप से शुक्रवार को फोन पर बात की और उस बातचीत को “बहुत ज़रूरी और फायदेमंद” बताया। मतलब ये कि अब अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में फिर से गर्माहट आ गई है और बातचीत सही दिशा में जा रही है। रूस के ताज़ा हमलों को देखते हुए, अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर यूक्रेन को ये हाईटेक मिसाइल सिस्टम मिलते हैं, तो उनकी सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी। लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है — क्या इतने हथियार आने से ये जंग जल्दी खत्म होगी या और ज़्यादा लंबी खिंच जाएगी?