अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन में खलबली मच गई है, क्योंकि एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका ईरान युद्ध में अब तक 850 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुका है। स्टॉक कम हो गया है। यूक्रेन से कुछ हथियार मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं।
इसराइल जहां सेना में मैनपावर की कमी से जूझ रहा है, वहां अब अमेरिका भी मिसाइलों की कमी का सामना कर रहा है। पेंटागन के अंदर हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने टॉमहॉक मिसाइल संकट को पूरी तरह उजागर कर दिया है, जबकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ बनाए हुए है।
इसराइल सेना में मैनपावर की कमी की रिपोर्ट शुक्रवार को सत्य हिन्दी पर पढ़ चुके होंगे। अब पेंटागन में टॉमहॉक मिसाइल कमी की अंदरुनी कहानी जानिए।
20 लाख डॉलर है एक टॉमहॉक मिसाइल की कीमत
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में पेंटागन के अंदरूनी सूत्रों ने चिंता जताई है कि ईरान के साथ चल रही जंग के महज चार हफ्तों में अमेरिका की अपनी टॉमहॉक मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हुआ। अब तक अमेरिका 850 टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुका है। हर मिसाइल की कीमत 20 लाख से 36 लाख डॉलर तक है। ये मिसाइलें इसलिए खास मानी जाती हैं क्योंकि ये 1,000 मील (लगभग 1,600 किलोमीटर) दूर तक के लक्ष्यों को बिना पायलट को खतरे में डाले नष्ट कर सकती हैं।
पेंटागन के अंदर अब इस स्टॉक की कमी को लेकर फुसफुसाहट शुरू हो गई है। मिसाइलों के निर्माण में आने वाली दिक्कतों के कारण यह चिंता और बढ़ गई है। एक अधिकारी ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि स्टॉक "alarmingly low" (चिंताजनक रूप से कम) हो गया है। दूसरे अधिकारी ने कहा कि टॉमहॉक की आपूर्ति अब "Winchester" के करीब पहुंच गई है, जो सैन्य भाषा में गोला-बारूद खत्म होने का संकेत है।
पेंटागन में टॉमहॉक के कुल स्टॉक की सही संख्या गुप्त रखी गई है, लेकिन हर साल केवल कुछ सौ टॉमहॉक मिसाइलें ही बनाई जाती हैं। पिछले साल रक्षा बजट के अनुसार सिर्फ 57 मिसाइलें खरीदी गई थीं। अब अधिकारी जल्दबाजी में चर्चा कर रहे हैं कि इंडो-पैसिफिक जैसे अन्य थिएटरों से टॉमहॉक मिसाइलें मध्य पूर्व भेजी जाएं या नहीं, क्योंकि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना हमला जारी रखे हुए है।
टॉमहॉक मिसाइल नया टारगेट तलाश सकती है
टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के समय गल्फ वॉर से ही अमेरिकी सैन्य शक्ति का अहम हिस्सा रही हैं। ये सतह के जहाजों या पनडुब्बियों से लॉन्च की जा सकती हैं। इनमें सैटेलाइट के जरिए संचार की सुविधा है, जिससे पहले से प्रोग्राम किए टारगेट को मारा जा सकता है या जीपीएस के जरिए रीयल-टाइम में नए टारगेट ढूंढे जा सकते हैं। ये मिसाइलें युद्धक्षेत्र के ऊपर लटककर रह सकती हैं और उनमें लगा कैमरा लाइव फीड कमांडरों तक पहुंचा सकता है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के शुरुआती दिनों में कई टॉमहॉक दागे गए, जिनमें से एक ईरान के शहर मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर गिरा, जिसमें 165 बच्चियों और 20 शिक्षकों की मौत हो गई। इस घटना को पूरी दुनिया में निन्दा हो रही है। ईरान ने इसके लिए अमेरिका युद्ध अपराधी कहा और यूएन सुरक्षा परिषद से कार्रवाई की मांग की है।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे विमान अब इन जटिल मिसाइलों की जगह ग्रेविटी बम गिरा सकते हैं। लेकिन इसमें भी जोखिम है। पिछले हफ्ते एक अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर दुश्मन के हवाई क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हो गया और उसे मिडिल ईस्ट के एक अमेरिकी अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
पेंटागन ने ईरान के जवाबी हमलों के जवाब में पैट्रियट और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम समेत 1,000 से ज्यादा एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें भी दागी हैं। ये दुनिया की सबसे एडवांस मिसाइलें हैं, लेकिन इनका स्टॉक भी सीमित है। ये ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सस्ते मिसाइलों और ड्रोनों से कहीं ज्यादा महंगी हैं।
मिसाइलों की घटती इन्वेंट्री लंबे समय तक चलने वाली ईरान अभियान में प्रशासन के लिए सिरदर्द बन सकती है, खासकर जब अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने की कोशिश कर रहा है और तेल-गैस की कीमतें बढ़ रही हैं। शुक्रवार को दो चीनी जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने से रोक दिए जाने के बाद तेल की कीमतें और बढ़ गईं। इससे साफ है कि ईरान लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के महज एक हफ्ते बाद व्हाइट हाउस में बड़े अमेरिकी डिफेंस निर्माताओं के एक्जीक्यूटिव्स को बुलाया। ट्रंप ने पुष्टि की कि कंपनियों ने 'exquisite-class' हथियारों (हाइपरसोनिक मिसाइलें और टॉमहॉक जैसी हाई-प्रिसीजन, लॉन्ग-रेंज क्षमता वाली मिसाइलें) के उत्पादन को चार गुना करने पर सहमति जताई है।
RTX नामक प्रमुख अमेरिकी डिफेंस ठेकेदार इन हथियारों का एकमात्र निर्माता है। ये एरिजोना के टक्सन प्लांट में बनाई जाती हैं और ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देश भी इन्हें इस्तेमाल करते हैं। टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल ईरान में हमला करने के लिए किया जा रहा है। वहीं ईरान को जवाबी हमलों के लिए अपने बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉक का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करना पड़ रहा है। रॉयटर्स को दिए गए बयानों में कई सूत्रों ने बताया कि अमेरिका को केवल इतना यकीन है कि उसने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल आर्सेनल का एक-तिहाई हिस्सा नष्ट कर दिया है। दूसरे एक-तिहाई की स्थिति अनिश्चित है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि वे मलबे के नीचे दबे हुए, क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा, "रक्षा विभाग के पास राष्ट्रपति की पसंद के समय और स्थान पर किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए सब कुछ उपलब्ध है।"इस बीच अधिकारी टॉमहॉक मिसाइलों के उत्पादन को बढ़ाने पर भी चर्चा कर रहे हैं ताकि बढ़ी हुई मांग पूरी हो सके। सैन्य प्लानर्स टॉमहॉक की खपत की दर पर नजर रखे हुए हैं और यह गणना कर रहे हैं कि ईरान युद्ध के अलावा अन्य संभावित संघर्षों के लिए कितनी मिसाइलें जरूरी होंगी।