ईरान पर अमेरिका-इसराइल द्वारा थोपे गए युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने व्हाइट हाउस से करीब 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। क्योंकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में और सैनिक तैनात करने की तैयारी कर रहा है। इस युद्ध पर पहले ही अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष के पहले 100 घंटों में ही 3.7 अरब डॉलर खर्च हो गए, जबकि एक सप्ताह के भीतर 11 अरब डॉलर से अधिक यूएस टैक्सपेयर्स का पैसा युद्ध में झोंक दिया गया।

होर्मुज खुलवाने के लिए पैसा चाहिए

ताजा घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका Strait of Hormuz पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस लड़ाई के लिए पैसा चाहिए। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि पार करने की कोशिश करने वाले जहाजों पर बमबारी की जाएगी। साथ ही क्षेत्र में समुद्री माइंस बिछाने की रणनीति अपनाई जा रही है। इस नाकेबंदी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बिगड़े तो कच्चे तेल का दाम 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। 19 मार्च को कच्चे तेल की कीमत 114.3 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है।

वॉशिंगटन पोस्ट की खबर

नई फंडिंग की मांग की खबर सबसे पहले अमेरिकी अखबार The Washington Post ने दी। रिपोर्ट में कहा गया कि पेंटागन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए व्हाइट हाउस के जरिए अमेरिकी संसद में इसे पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि व्हाइट हाउस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति Donald Trump को आशंका है कि डेमोक्रेट सांसद इस मांग का विरोध कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने युद्ध शुरू करने को लेकर ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की है।
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युद्ध के नए मोर्चे बिना पैसे कैसे खुलेंगे

इससे पहले रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका मध्य-पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि तेल टैंकरों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हॉर्मुज़ क्षेत्र में सैन्य अभियान का विस्तार किया जा सकता है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि ऐसी कार्रवाई की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को ईरान के समुद्री तट पर भी उतारना पड़ सकता है। इसके अलावा Kharg Island पर ग्राउंड फोर्स भेजने पर भी विचार चल रहा है, जो ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात का केंद्र है।

ईरान पर हमले के बाद उसने ताबड़तोड़ अटैक किए

बुधवार देर रात एक पोस्ट में ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने Qatar पर हमला किया तो अमेरिका “पूरे के पूरे South Pars Gas Field को उड़ा देगा।” दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक पर ऐसी कार्रवाई से तेल और गैस की कीमतों में उछाल आ रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को पहले से इसकी जानकारी नहीं थी कि इसराइल इस गैस फील्ड पर हमला करेगा, लेकिन उन्होंने खुद बड़े हमले की चेतावनी दे दी।
उधर, ईरान ने भी युद्ध को और व्यापक बनाने की धमकी दी है। मध्य-पूर्व में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस संयंत्र रास लफ्फान और सऊदी अरब की राजधानी रियाद में धमाकों की सूचना मिली है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

अरागची का अमेरिका पर तंज़

इसी बीच ईरान के वरिष्ठ नेता और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि “वॉशिंगटन अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन हॉर्मुज़ की हकीकत नहीं बदल सकता।” उन्होंने दावा किया कि युद्ध को लंबा खींचना अमेरिका की रणनीतिक गलती साबित होगा और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर इसका उल्टा असर पड़ेगा।

अमेरिकियों पर इसराइल फर्स्ट टैक्स लगने वाला हैः अरागची

ईरानी विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा- "यह युद्ध की पसंद (war of choice) है जो ईरानियों और अमेरिकियों दोनों पर थोपा गया है। इस युद्ध को सिर्फ तीन हफ्ते ही हुए हैं। यह 200 अरब डॉलर मांगना तो कुल फंड का एक अंश मात्र है। आम अमेरिकी नागरिक बेंजामिन नेतन्याहू और कांग्रेस में उनके चमचों को धन्यवाद दे सकते हैं कि उनके कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ट्रिलियन डॉलर का 'इसराइल फर्स्ट टैक्स' लगने वाला है।"

अरागची ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को खरी-खरी सुनाई

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया कि मैक्रों ने ईरान पर इसराइल-अमेरिका के युद्ध की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा है। उन्होंने तब भी इसराइल की निंदा नहीं की जब उसने तेहरान में फ्यूल स्टोरेज को उड़ा दिया, जिससे लाखों लोग ज़हरीले पदार्थों के संपर्क में आ गए। उनकी मौजूदा "चिंता" इसराइल द्वारा हमारे गैस संयंत्रों पर हमले के बाद नहीं, बल्कि हमारी जवाबी कार्रवाई के बाद सामने आई है। दुखद!