प्यू रिसर्च सेंटर के 2026 के सर्वे के मुताबिक़ टैरिफ़, सख़्त इमिग्रेशन नियमों और ईरान-गजा जैसे संघर्षों पर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से भारतीयों में अमेरिका की साख घटी है। अब सिर्फ 39% भारतीयों को अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा है।
पीएम मोदी और यूएस राष्ट्रपति ट्रंप।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन डोनाल्ड ट्रंप को बेहद 'घनिष्ठ दोस्त' बताते नहीं थकते हैं, उन्हीं की नीतियों से भारतीय इतने ख़फा हैं कि उनमें भारतीयों का भरोसा घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है। अमेरिका के प्रति भारतीयों की राय 25 साल में सबसे ज़्यादा नकारात्मक बन गई है। ऐसी स्थिति टैरिफ़, सख़्त इमिग्रेशन नियमों और ईरान-गजा जैसे संघर्षों पर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से हुई है। यह प्यू सर्वे में सामने आया है। प्यू रिसर्च सेंटर दुनिया भर में पब्लिक ओपिनियन के लिए सम्मानित संस्थान माना जाता है।
प्यू सर्वे के अनुसार अब केवल 45 प्रतिशत भारतीय अमेरिका को लेकर सकारात्मक राय रखते हैं, जबकि 31 प्रतिशत लोगों की अमेरिका के प्रति नकारात्मक सोच है। यह वर्ष 2002 से अब तक का सबसे अधिक नकारात्मक आंकड़ा माना जा रहा है। सर्वे में केवल 39 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप पर वैश्विक मामलों में सही फैसले लेने का भरोसा है। यह पिछले करीब 25 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भारतीयों का सबसे कम विश्वास का स्तर है।
पिछले वर्ष की तुलना में यह गिरावट काफी बड़ी है। 2025 के सर्वे में 52 प्रतिशत भारतीयों ने ट्रंप पर भरोसा जताया था, जबकि अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय 54 प्रतिशत और नकारात्मक राय केवल 19 प्रतिशत थी। ये स्थिति तब है जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की 'दोस्ती' का बखान किया जाता है।
ट्रंप को दोस्त बताते रहे हैं मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार एक दूसरे को दोस्त बताते रहे हैं। ट्रंप ने पीएम मोदी को कई मौकों पर अपना 'लॉन्ग टाइम फ्रेंड', 'ग्रेट फ्रेंड' और 'माई फ्रेंड' कहा है। उन्होंने जी7 की बैठक के दौरान मोदी को 'like an angel' भी बताया था। पीएम मोदी ने ट्रंप को 'मेरे दोस्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप' कहा है। दोनों ने फोन कॉल्स और संयुक्त बयानों में व्यक्तिगत दोस्ती और भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया है। यह दोस्ती 2017 से शुरू हुई थी, जब ट्रंप का पहला कार्यकाल था। तब 'Howdy Modi' और 'Namaste Trump' जैसे कार्यक्रम हुए थे। 2025-2026 में टैरिफ़, ट्रेड टेंशन, रूसी तेल और कुछ अन्य मुद्दों के बावजूद दोनों नेता सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत दोस्ती पर जोर देते रहे।तो किन मुद्दों पर ट्रंप से नाराज़ हैं भारतीय?
प्यू सर्वे के मुताबिक़ भारतीयों ने ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों का समर्थन नहीं किया। इनमें दुनिया भर में लगाए गए टैरिफ, ईरान और वेनेजुएला से जुड़े फैसले, सख्त इमिग्रेशन नीति, गजा युद्ध को लेकर अमेरिकी रुख, रूस-यूक्रेन युद्ध से निपटने की नीति, USAID जैसी अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों को बंद करने जैसे फैसले शामिल हैं।
सिर्फ 32 प्रतिशत भारतीयों ने ट्रंप की इमिग्रेशन नीति का समर्थन किया। वहीं, ईरान नीति का समर्थन केवल 28 प्रतिशत और वेनेजुएला नीति का समर्थन महज 17 प्रतिशत लोगों ने किया।
ओबामा के समय US की लोकप्रियता 76% थी
प्यू रिसर्च के आँकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों तक भारतीयों में अमेरिका के प्रति सकारात्मक सोच बनी रही थी। 2005 में अमेरिका की लोकप्रियता भारत में 71 प्रतिशत थी। 2009 में जब बराक ओबामा राष्ट्रपति बने तब यह आँकड़ा रिकॉर्ड 76 प्रतिशत तक पहुंच गया था। ओबामा को भारतीयों का सबसे अधिक समर्थन मिला। 2009 में उन पर 77 प्रतिशत और 2015 में 75 प्रतिशत भारतीयों ने भरोसा जताया था।
सर्वे के अनुसार, 2023 में 64 प्रतिशत भारतीयों को तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन पर भरोसा था। हालांकि उनके कार्यकाल के अंत तक 2024 में यह घटकर 44 प्रतिशत रह गया था। इसी तरह अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय भी 2023 में 65 प्रतिशत से घटकर 2024 में 51 प्रतिशत हो गई थी।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में स्थिति
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भारतीयों का समर्थन समय के साथ बढ़ा था। 2017 में ट्रंप पर भरोसा 40 प्रतिशत था। 2020 तक यह बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया। इसी दौरान अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय भी 60 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। लेकिन दूसरे कार्यकाल में शुरुआती सकारात्मक माहौल धीरे-धीरे नकारात्मक होता गया और अब दोनों आंकड़े रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
13 भाषाओं में हुआ सर्वे
प्यू रिसर्च सेंटर ने बताया है कि 2026 का यह सर्वे देशभर में 3566 भारतीयों से आमने-सामने बातचीत के आधार पर किया गया। सर्वे 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित किया गया। सर्वे के लिए टेलीफोन, ऑनलाइन और प्रत्यक्ष साक्षात्कार जैसी विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
क्या संकेत देता है सर्वे?
जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति, व्यापारिक टैरिफ, आव्रजन नियमों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर अपनाए गए रुख का असर भारतीय जनमत पर भी पड़ा है। यही वजह है कि अमेरिका के प्रति भारतीयों की सकारात्मक धारणा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
हालांकि सर्वे यह भी दिखाता है कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन आम भारतीयों के बीच अमेरिकी नेतृत्व और उसकी नीतियों को लेकर भरोसा पहले की तुलना में काफी कम हुआ है।