बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के क़रीब डेढ़ साल बाद अब अपने देश लौटने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वह इस साल दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के सामने सरेंडर करेंगी। हसीना ने यह भी कहा कि उन्हें अपनी जान का ख़तरा है और संभव है कि उनकी वापसी पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए या उनकी हत्या भी कर दी जाए, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटना चाहती हैं। रॉयटर्स को दिए एक लंबे टेलीफोन इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उनकी पार्टी आवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ बांग्लादेश लौटकर अदालत का सामना करेंगे।

शेख हसीना ने सरेंडर करने की बात तब कही है जब ढाका भारत से उनके प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी रखे हुए है। बांग्लादेश की ओर से लगातार भारत सरकार पर इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है कि वह शेख हसीना को भारत से निष्कासित करे। इसके अलावा शेख हसीना के लिए एक बड़ी मुसीबत यह भी है कि बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें फाँसी की सजा सुनाई है। ऐसी ही स्थिति में उनका यह इंटरव्यू आया है और उन्होंने आशंका जताई है कि उनकी हत्या भी की जा सकती है।
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हसीना को हत्या की आशंका क्यों?

शेख हसीना ने कहा है कि उन्हें मालूम है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने रायटर्स से कहा, 'वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मुझे मार भी सकते हैं। लेकिन मुझे वापस जाना ही होगा। मेरे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं पर लगातार अत्याचार हो रहा है। अगर मेरी मौत भी हो तो मैं अपने देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूँ जहाँ मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।'

हसीना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी वापसी का संभावित समय बताया है। उन्होंने कहा कि वह दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटकर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस अदालत में सरेंडर करेंगी और न ही वापसी की कोई निश्चित तारीख बताई। बताया जा रहा है कि उनके साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल भी लौट सकते हैं, जिन्हें भी एक मामले में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़े मामले में शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। हसीना लगातार इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज करती रही हैं।

मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है: हसीना

बांग्लादेश की पूर्व पीएम हसीना ने कहा कि वह अदालत में इसलिए जाना चाहती हैं क्योंकि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि जब अदालत में सुनवाई शुरू होगी तो लोगों के सामने साफ हो जाएगा कि मेरे खिलाफ बनाए गए मामले कितने राजनीतिक और बेबुनियाद हैं। मैं इसे अदालत में साबित करना चाहती हूं।' उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले राजनीतिक बदले की भावना से बनाए गए हैं।

पहले एक केस फर्जी साबित हुआ था

इस साल बांग्लादेश की पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने शेख हसीना समेत 113 लोगों के खिलाफ दर्ज एक कथित हत्या के प्रयास के मामले को बंद करने की सिफारिश की थी। जांच एजेंसी ने कहा था कि कथित पीड़ित का कोई पता नहीं चल सका और शिकायत में कई तथ्य मनगढ़ंत पाए गए। जांच अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया था कि उन पर मामले को आगे बढ़ाने का दबाव था। इस घटना के बाद आवामी लीग ने दावा किया था कि उसके नेताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में 'फर्जी राजनीतिक मुकदमे' दर्ज किए गए हैं।

अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं

शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश में छात्र आंदोलन और सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद सेना प्रमुख की सलाह पर उन्होंने देश छोड़ दिया था। इसके बाद भारत ने उन्हें शरण दी। उनके देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और अंतरिम सरकार बनने के बाद आवामी लीग पर कार्रवाई शुरू हुई।

बांग्लादेश की सरकार कई बार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। पहले अंतरिम सरकार और अब नई सरकार की ओर से भारत को कई पत्र भेजे गए हैं। हसीना ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें पता है कि ढाका सरकार लगातार भारत से उन्हें वापस भेजने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, 'वे भारत को बार-बार पत्र भेज रहे हैं ताकि मुझे वापस भेजा जाए। लेकिन मैं खुद ही लौटूंगी।'

भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जा रही है। विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ़ किया था कि भारत बांग्लादेश की नई सरकार के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी।

आवामी लीग को फिर से संगठित करने की कोशिश

शेख हसीना ने बताया कि भारत में रहते हुए भी वह ऑनलाइन बैठकों के ज़रिए अपनी पार्टी को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से 125 सीटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं।
अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल पर बात करते हुए हसीना ने माना कि लंबे समय तक सरकार चलाने के दौरान गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा, 'कोई भी सरकार पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं होती। लेकिन यह फैसला जनता को करना है कि हमारी सरकार ने अच्छा काम किया या बुरा। अंतिम निर्णय जनता का ही होना चाहिए।'

बांग्लादेश की राजनीति में फिर बढ़ेगी हलचल

अगर शेख हसीना वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटती हैं तो यह देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम होगा। मौत की सजा का सामना कर रहीं पूर्व प्रधानमंत्री की वापसी से न केवल कानूनी प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है।