डोनाल्ड ट्रंप ने जब होर्मुज को 'नया अमेरिकी क्षेत्र' घोषित करने की चेतावनी दी थी तो ईरान ने कहा था कि 'होर्मुज़ को फिर से खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर अपना हक जताने के दावे के बीच का फ़ासला 7000 मील की दूरी से भी ज़्यादा है।'
डोनाल्ड ट्रंप का होर्मुज पर बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को नया अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा करते हुए होर्मुज को 'NEW US Territory' बताया। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इसे उसकी सीमाओं से बाहर अमेरिकी अधिकार थोपने की कोशिश बताया है। ईरान ने साफ़ कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नीति नहीं बदलता तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उसका रुख नहीं बदलेगा।
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी दावा जताने की घोषणा पहले ही कर दी थी। 14 अगस्त को न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड स्थित एक पुलिस अकादमी में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था, 'बहुत जल्द मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकता हूं।' इसके बाद 18 अगस्त को उन्होंने पहली बार 'NEW US Territory' वाली तस्वीर साझा की थी।
ईरान का कड़ा जवाब
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने कहा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर हक जताने के दावे के बीच का फासला, वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच मौजूद 7000 मील की दूरी से भी ज्यादा है।' उन्होंने आगे कहा, 'फारस की खाड़ी में अब अमेरिका के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो चुका है।'अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरानी नेतृत्व के बीच इस दावे-प्रतिदावे के बीच अब रविवार को ट्रंप ने वही तस्वीर दोबारा पोस्ट कर अपना रुख और साफ़ कर दिया। यह सब बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है।
अमेरिका लगाने जा रहा है नए प्रतिबंध
ट्रंप के इस बयान के साथ ही अमेरिका ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी भी कर रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने चीन से भी अपील की है कि वह ईरान से तेल खरीदने के मामले में अमेरिका का सहयोग करे।
ईरान ने प्रतिबंधों को बताया गैरकानूनी
ईरान ने अमेरिका की नई प्रतिबंध नीति को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के खिलाफ बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों पर अपनी इच्छा थोपने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि ऐसे सेकंडरी सैंक्शन अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं मान्य नहीं हैं।बगाई ने कहा, 'अमेरिका का ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला, किसी एक देश के ख़िलाफ़ जारी ग़ैर-क़ानूनी 'आर्थिक युद्ध' से कहीं ज़्यादा है। यह संयुक्त राष्ट्र के हर आज़ाद सदस्य देश पर अपनी सत्ता थोपने जैसा है। कोई भी देश कानूनन दूसरे देशों के बैंकों, कंपनियों या हवाई अड्डों को मजबूर नहीं कर सकता कि वे किसी तीसरे देश के साथ वैध व्यापार बंद कर दें। ये बैंक, कंपनियां और हवाई अड्डे अपने-अपने देश के कानून के अधीन होते हैं।'
'उपनिवेशवाद की वापसी का रास्ता खोल देगा'
बगाई ने कहा कि ऐसे द्वितीयक प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं भी जायज नहीं हैं। ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) में लिखे संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने निकारागुआ मामले में जो हस्तक्षेप न करने का नियम बताया है, उसका भी ये उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, 'इन प्रतिबंधों का पालन करने से किसी को सुरक्षा या सम्मान नहीं मिलता। इससे सिर्फ ये साबित होता है कि आपके बैंक, कंपनियां और हवाई अड्डे किसी विदेशी इजाजत से ही चल रहे हैं। नतीजा ये होगा कि संयुक्त राष्ट्र पर आधारित देशों की व्यवस्था की नींव यानी संप्रभुता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। और ये पुराने जमाने के उपनिवेशवाद की वापसी का रास्ता खोल देगा।'पड़ोसी देशों को भी चेतावनी
मोहसिन रेज़ाई ने क्षेत्र के अन्य देशों को भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पड़ोसी देश अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल होता है तो ईरान उसे अपना विरोधी मानेगा। इस बयान का साफ़ संकेत है कि ईरान इस विवाद को केवल अमेरिका तक सीमित नहीं मान रहा।
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है।
यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करता है। तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग से तेल की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है।
पहले प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक तेल इस रास्ते से गुजरता था। अब यह मात्रा घटकर लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि अमेरिकी सेना की मदद से कुछ जहाजों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन सामान्य स्थिति अभी भी बहाल नहीं हुई है। बड़े तेल टैंकर और एलएनजी जहाज अब भी इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं। हालाँकि, ईरान ने इराक के अनुरोध पर कुछ इराकी तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है।
ईरान ने कूटनीति के संकेत भी दिए
तनाव के बीच ईरान ने बातचीत के रास्ते भी पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा है कि उनका देश सम्मान और राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना कूटनीतिक समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।तनाव अभी कम होने के आसार नहीं
एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आक्रामक बयान दे रहे हैं और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर ईरान भी सख्त रुख अपनाए हुए है और अमेरिका की मांगों को मानने से इनकार कर रहा है।
ऐसे में दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।