ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के पांचवें हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपनी युद्ध रणनीति में बदलाव करते नजर आ रहे हैं। संकेत मिल रहे हैं कि वह “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को जल्द समाप्त करने के इच्छुक हैं, भले ही अहम होर्मुज समुद्री रास्ता खुले या न खुले। अमेरिका का यह कदम न केवल युद्ध की दिशा बदल सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि फिलहाल इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलना प्राथमिकता नहीं है। उनका मानना है कि ऐसा करने की कोशिश से सैन्य अभियान उनकी तय चार से छह सप्ताह की समयसीमा से आगे खींच सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस अहम मार्ग पर नियंत्रण हासिल करना बेहद जटिल और समय लेने वाला काम होगा, जिससे अमेरिका की क्षेत्र में उलझन और बढ़ सकती है।
अगर यह रणनीति लागू होती है, तो इसका मतलब होगा कि तेहरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा। इस समुद्री रास्ते की आंशिक नाकेबंदी ने पहले ही वैश्विक बाजारों को झटका दिया है। तेल की आपूर्ति बाधित हुई है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। हालांकि भविष्य में इसे खोलने के लिए अभियान से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन फिलहाल इसे टालकर युद्ध को जल्दी खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।
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इसी के साथ-साथ सैनिकों की तैनाती भी बढ़ रही है

हालांकि, तनाव कम करने की इस कोशिश के साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ती जा रही है। शनिवार को युद्धपोत USS Tripoli 2,500 से अधिक मरीन सैनिकों के साथ पहुंचा, जबकि प्रशासन 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिकों की तैनाती पर भी विचार कर रहा है। सबसे आक्रामक विकल्पों में ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा करने का जटिल मिशन भी शामिल है, जो संघर्ष को और भड़का सकता है।

बंद दरवाजों के पीछे की सोच कुछ और

बंद दरवाजों के पीछे ट्रंप और उनके सलाहकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि होर्मुज समुद्री रास्ते को जबरन खोलने से उनकी रणनीति की समयसीमा बिगड़ जाएगी। इसके बजाय अब ध्यान ईरान की नौसैनिक क्षमता को कमजोर करने और उसकी मिसाइल ताकत को घटाने पर है, जिसके बाद कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ा जाएगा। इस रणनीति के तहत तेहरान पर दबाव बनाया जाएगा कि वह खुद ही व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल करे, जबकि यूरोपीय और खाड़ी देशों के सहयोगियों को जरूरत पड़ने पर जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी देने की योजना है।
हाल ही में व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी इस रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को खत्म करने के लिए होर्मुज को सुरक्षित बनाना ट्रंप प्रशासन के “मुख्य उद्देश्यों” में शामिल नहीं है।
हालांकि वॉशिंगटन का संदेश पूरी तरह एक जैसा नहीं है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में ज्यादा सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि होर्मुज समुद्री रास्ता “किसी भी हाल में खुलेगा।” चाहे ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करे या फिर बहुराष्ट्रीय गठबंधन कार्रवाई करे।
लगातार अमेरिकी हमलों और नौसेना को हुए नुकसान के बावजूद ईरान इस अहम मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को लेकर धमकियां देता रहा है। हालांकि भारत समेत कुछ सहयोगी देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलने की खबर है, लेकिन व्यापक स्तर पर बाधा ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है।
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ट्रंप के बदलते बयान

इस बीच ट्रंप के बयान भी बदलते रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने कभी इस जलमार्ग की अमेरिका के लिए अहमियत को कमतर बताया, तो कभी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसे तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरान के तेल ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
जैसे-जैसे यह संघर्ष आगे बढ़ रहा है, वॉशिंगटन की रणनीति, तेजी से सैन्य लक्ष्य हासिल करने और क्षेत्रीय जटिलताओं के बीच संतुलन बनाने की एक अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा करती है, जहां संयम और आक्रामकता साथ-साथ चलते नजर आ रहे हैं।