यह याचिका न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (US Court of International Trade) में दाखिल की गई है। टैरिफ मामला पिछले महीने से लागू किए गए 10% से 12.5% तक के आयात शुल्कों का है। अगर कोर्ट रोकता है तो भारत समेत कई देशों को फायदा होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाए गए नए टैरिफ (आयात शुल्क) के खिलाफ अमेरिका के भीतर ही एक नई कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के गठबंधन ने सोमवार को एक याचिका दायर कर इन टैरिफ को अदालत में चुनौती दी है। राज्यों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन बार-बार अदालती फैसलों की अवहेलना करते हुए अपने कानूनी अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (US Court of International Trade) में दाखिल की गई है। मामला पिछले महीने से लागू किए गए 10% से 12.5% तक के आयात शुल्कों का है, जिन्हें ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत लागू किया गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये शुल्क उन देशों पर लगाए गए हैं जो बंधुआ मजदूरी (forced labour) से बने सामानों के निर्यात को रोकने में पर्याप्त कदम उठाने में असमर्थ रहे हैं।
- भारत पर असर: नई नीति के तहत, प्रवर्तन उपायों को मजबूत करने वाले कुछ देशों को शुल्क दरों में राहत दी गई। इसी के तहत भारत पर लगने वाले टैरिफ को 12.5% से घटाकर 10% किया गया है।
राज्यों का तर्क: "पुराने अवैध करों को नया रूप देने की कोशिश"
ओरेगन और न्यूयॉर्क सहित सभी 25 राज्यों के डेमोक्रेटिक गवर्नरों और अटॉर्नी जनरलों ने एक साथ आकर यह कानूनी चुनौती दी है। राज्यों की दलीलें इस तरह हैं:
- धारा 301 का गलत इस्तेमाल: ऐतिहासिक रूप से धारा 301 का उपयोग केवल अनुचित व्यापार नीतियों के आरोपी किसी विशेष देश या उद्योग को लक्षित करने के लिए किया जाता रहा है, न कि अमेरिका में आने वाले लगभग सभी आयातों पर व्यापक कर थोपने के लिए।
- बंधुआ मजदूरी को बहाना बनाना: याचिका में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन बंधुआ मजदूरी का केवल बहाना बनाकर उन टैरिफ को दोबारा लागू करने की कोशिश कर रहा है जिन्हें अदालतें पहले ही अवैध घोषित कर चुकी हैं।
- ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने कहा- "अदालतों में लगातार हार का सामना करने के बावजूद, ट्रंप ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों और कामकाजी परिवारों पर एक बार फिर अव्यवस्था और अनिश्चितता थोपने का प्रयास कर रहे हैं।"
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का पक्ष
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने प्रशासन के इस कदम का बचाव करते हुए कहा: "अमेरिका में लगभग एक सदी से बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लागू है और हम इसे सख्ती से लागू करते हैं। अब समय आ गया है कि हमारे वैश्विक व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें।"ट्रंप की नई कानूनी रणनीति और पृष्ठभूमि
यह मामला ट्रंप की उस व्यापक व्यापार नीति की अगली परीक्षा है, जो अमेरिकी अदालतों में लगातार झटके मिलने के बावजूद जारी है:
- IEEPA टैरिफ खारिज: इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) राष्ट्रपति को व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
- धारा 122 पर रोक: इसके जवाब में प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत अस्थायी शुल्क लगाए, जिन्हें भी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने अवैध करार दिया।
- धारा 301 का सहारा: अब प्रशासन ने धारा 301 का रुख किया है- वही प्रावधान जिसका उपयोग ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर शुल्क लगाने के लिए किया था और जिसे अदालत में कानूनी मान्यता मिली थी।
ट्रंप अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए घरेलू विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार को नए सिरे से ढालने के लिए टैरिफ को अपना मुख्य हथियार मानते आ रहे हैं।