ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता के बीच फिर से अमेरिका का दोहरा रवैया सामने आया है। ईरान से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत को बढ़िया बताया तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को तबाह करने की धमकी दे दी।

दरअसल, स्विट्ज़रलैंड में बातचीत का नया दौर शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद ट्रं ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में अपनी सबसे कड़ी चेतावनियों में से एक जारी कर दी। ट्रंप ने लिखा, 'ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी को गड़बड़ी फैलाने से तुरंत रोकना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे- ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ़्ते किया था, बल्कि उससे भी ज़्यादा ज़ोरदार हमला होगा!' ये वही ट्रंप हैं जो अब से पहले इसराइल को इसलिए धमका रहे थे कि वह अमेरिका ईरान के शांति वार्ता के प्रयासों के बीच लेबनान पर हमला कर वार्ता को पटरी से उतारने की कोशिश न करे। ट्रंप के साथ साथ वेंस ने भी इसराइल और नेतन्याहू को भला बुरा कहा था।
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इधर, स्विट्जरलैंड में वेंस की शांति वार्ता

जब अमेरिका में बैठे डोनाल्ड ट्रंप ईरान को ख़त्म करने की धमकी दे रहे थे उसी वक़्त उन्होंने जेडी वेंस को ईरान से शांति वार्ता के लिए स्वट्ज़रलैंड भेजा हुआ था। स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बीच वेंस ने कहा कि पिछले कुछ घंटों में 'बहुत अच्छी प्रगति' हुई है। वेंस ने पत्रकारों से कहा, 'अमेरिका ईरान के साथ अपने रिश्तों को बुनियादी रूप से बदलने को तैयार है। ईरानी और अमेरिकी नेतृत्व पहले कभी इतने उच्च स्तर पर नहीं मिले थे।' ये बातचीत तकनीकी स्तर पर शुरू हुई है।

इतना ही नहीं, वेंस ने ट्रंप का संदेश पढ़कर सुनाया कि अमेरिका पूरे क्षेत्र में 'पूर्ण संघर्ष विराम' चाहता है। लेबनान में स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में किसी भी सरकार से ज्यादा शांति स्थापित करने की कोशिश की है।

वार्ता से ईरान का वॉकआउट!

वेंस कुछ भी कहें, लेकिन ट्रंप की धमकी ईरान के डेलिगेशन को पसंद नहीं आई और उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के साथ पहले से तय फोटो सेशन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, बातचीत शुरू होने से पहले अमेरिकी डेलिगेशन के आयोजकों और सदस्यों ने दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और साझा फोटो सेशन की योजना बनाई थी। हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने आयोजकों को यह भी बताया कि वे किसी भी फोटो-ऑप में शामिल नहीं होंगे, इसे अमेरिकी 'मीडिया शो' करार दिया।

बाद में ईरानी वार्ता दल ने विरोध स्वरूप बैठक से कुछ देर के लिए वॉकआउट किया। प्रेस टीवी के हवाले से एक सूत्र ने बताया कि ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिकी पक्ष के सामने औपचारिक रूप से आपत्तियां उठाई थीं। पहले दिन के अंत तक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ईरानी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में हो रही बातचीत 'रुक गई है, लेकिन खत्म नहीं हुई है।'

डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी स्पीकर गालिबाफ़

'प्रतिबंधों में छूट का ड्राफ्ट फाइनल'

इस बीच, ईरानी डेलिगेशन के एक सदस्य ने सरकारी मीडिया को बताया कि ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में छूट के संबंध में एक ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि छूट जल्द ही जारी की जाएगी। ईरानी डेलिगेशन का हिस्सा रहे ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि रविवार की बातचीत में वैश्विक बैंकों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जो युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा रखी गई एक प्रमुख पूर्व-शर्त थी। हालाँकि, बातचीत के बावजूद सूत्रों ने ईरानी डेलिगेशन के हवाले से चेतावनी भी दी कि भविष्य की बातचीत की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनान में इसराइली हमले बंद होते हैं या नहीं।

वेंस ने लेबनान मुद्दे पर क्या कहा?

जहां ट्रंप और ईरान ने लेबनान के मुद्दे को गरमाए रखा, वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने इस मुद्दे पर अधिक सुलहपूर्ण रुख अपनाया। उन्होंने लेबनान में हिंसा के प्रभाव को कम करके आंका और कहा कि वहां शत्रुता को ख़त्म करने की दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, 'ऐसी चीज़ें हमेशा थोड़ी उलझी हुई होती हैं।'

लेबनान का पूरा विवाद क्या है?

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन यानी MoU हुआ था, जिसमें दोनों देशों ने दुश्मनी रोकने पर सहमति जताई थी। लेकिन लेबनान में इसराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह गुट के बीच तनाव अभी भी जारी है।
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ट्रंप का कहना है कि ईरान को हिजबुल्लाह को काबू में रखना होगा, वरना अमेरिका फिर से हमला करेगा। ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा था कि अगर इसराइल लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन करता रहा और अमेरिका समझौते का पहला हिस्सा लागू नहीं करेगा, तो ईरान होर्मुज बंद कर सकता है।

यह स्थिति काफी नाजुक है। एक तरफ अमेरिका उच्च स्तरीय शांति वार्ता चला रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप खुलकर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देश आमने-सामने हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।