यूएन में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मुझे एक बड़ा फ़ैसला लेना है। क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे फिर से अपना देश बना सकें और कहीं ज़्यादा बेहतर बना सकें, या फिर मैं इसको पूरी तरह खत्म कर दूँ और यह काम तेज़ी से करूँ?'
डोनाल्ड ट्रंप ने अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को धमकी दी है। हालाँकि उन्होंने एक तरफ़ बातचीत और समझौते की बात की तो दूसरी तरफ फिर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे डाली। ट्रंप ने कहा कि उन्हें तय करना है कि ईरान के साथ ऐसा समझौता हो जिससे वह दोबारा अपने देश का पुनर्निर्माण कर सके या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को ‘पूरी तरह खत्म’ कर दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि नवंबर के मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह संबोधन अमेरिका और ईरान के बीच क़रीब सात महीने से जारी युद्ध के बीच आया है। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और आगे भी सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई।
ट्रंप ने कहा कि उनके सामने अब एक बड़ा फैसला है- क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जाए जिससे वह दोबारा अपने देश का पुनर्निर्माण कर सके या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए।
संयुक्त राष्ट्र में क़रीब 37 मिनट के भाषण में ट्रंप ने कहा कि उन्हें तय करना है कि ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा या नहीं, जिससे ईरान अपने देश का पुनर्निर्माण कर सके और पहले से बेहतर स्थिति में पहुंच सके। इसके साथ ही उन्होंने दूसरा विकल्प भी सामने रखा। ट्रंप ने कहा कि क्या वह ‘इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म’ कर दें और यह काम तेजी से करें, ताकि ईरान को दोबारा लोगों और देशों को नुक़सान पहुँचाने का मौक़ा न मिले। ट्रंप ने आगे यह सवाल भी उठाया कि क्या अमेरिका को ईरान को ऐसी स्थिति में धकेल देना चाहिए जहां उसके पास भविष्य या आने वाली पीढ़ियों के लिए कोई उम्मीद न बचे।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को सात महीने के करीब हो चुके हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं।
ट्रंप बोले- मिडटर्म चुनाव के बाद होगी डील
ईरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करने के बावजूद ट्रंप ने बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका और ईरान के बीच अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद समझौता हो जाएगा। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को होने हैं।ट्रंप के मुताबिक ईरान फिलहाल यह देखना चाहता है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में उनकी स्थिति कैसी रहती है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ईरान बातचीत को लेकर इंतजार कर रहा है।
मिडटर्म चुनाव अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के नियंत्रण के लिए अहम होते हैं। इनके नतीजे ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाक़ी हिस्से में उनकी घरेलू राजनीति और क़ानून बनाने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। हालाँकि ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा कि वह खुद इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं हैं और वह पहले ही राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं।
ईरान को ‘मिडिल ईस्ट का बुली’ बताया
ट्रंप ने ईरान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए दूसरे देशों से उसके खिलाफ आर्थिक दबाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने ईरान को लंबे समय तक मध्य पूर्व में ‘बुली’ बताया और कहा कि अब वह स्थिति नहीं रही।ट्रंप ने कहा कि ईरान को अलग-थलग करने के लिए दूसरे देशों को आर्थिक दबाव जारी रखना चाहिए। रॉयटर्स के मुताबिक़, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान को पूरी तरह आर्थिक रूप से अलग थलग करने की अपील की।
ईरान लगातार अमेरिका के आरोपों को खारिज करता रहा है। परमाणु हथियार हासिल करने की अमेरिकी चिंताओं को भी तेहरान ने स्वीकार नहीं किया है। ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया। यह ट्रंप का दावा है; ईरान इसे स्वीकार नहीं करता।
‘युद्ध ने ईरान की ताकत खत्म कर दी’
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और इसराइल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध ने ईरान को क्षेत्रीय स्तर पर पहले की तरह प्रभावशाली शक्ति बने रहने से रोक दिया है और ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना को खत्म किया है। ट्रंप का यह संबोधन मुख्य रूप से अपने प्रशासन की ईरान नीति का बचाव करने वाला रहा। उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के अपने फ़ैसले को मजबूती से सही ठहराया।होर्मुज जलडमरूमध्य का भी ज़िक्र
ट्रंप ने अपने भाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ट्रंप ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिकी नौसेना ने इस मार्ग से एक अरब बैरल से ज्यादा तेल की आवाजाही को एस्कॉर्ट किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग से तेल की आवाजाही अब युद्ध शुरू होने के बाद किसी भी समय के मुकाबले ज्यादा है।
होर्मुज में किसी भी लंबे व्यवधान का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम में ईरान की ओर से इस जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की संभावनाओं के संकेत मिलने के बाद तेल बाजारों में भी प्रतिक्रिया देखी गई है।
लंबे समय से जारी युद्ध के कारण अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने ऐसी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ज़रूरत से कहीं अधिक गोला-बारूद है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर हथियारों का उत्पादन कर रहा है और नई म्यूनिशन फैक्ट्रियां भी बनाई जा रही हैं।
ट्रंप का यूएन में दावा- भारत-पाक युद्ध रुकवाया
डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित बड़े युद्ध को रुकवाया था। उन्होंने इसे उन आठ युद्धों में शामिल किया, जिन्हें उन्होंने अपने कार्यकाल में समाप्त कराने का श्रेय लिया। हालाँकि, भारत ट्रंप के दावों को खारिज करता रहा है।
ट्रंप ने कहा, 'जब से मैंने पद संभाला है, मेरे लिए आठ युद्धों को सुलझाना बहुत बड़ा सम्मान रहा है। कई युद्ध सालों और दशकों से चल रहे थे।' उन्होंने कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, आर्मेनिया-अजरबैजान, ग़ज़ा समेत भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का विशेष रूप से नाम लेते हुए ट्रंप ने उन्हें 'शानदार व्यक्ति' बताया। ट्रंप ने दावा किया कि शरीफ ने उन्हें बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने 3 करोड़ लोगों की जान बचाई और शायद इससे भी ज्यादा। ट्रंप ने कहा कि इन देशों के नेताओं ने उन्हें धन्यवाद पत्र भी भेजे हैं।
ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधि बाहर चले गए
ट्रंप के संबोधन के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल से वॉकआउट किया। एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए मौजूद थे, लेकिन ट्रंप के भाषण में शामिल नहीं हुए। हॉल में मौजूद ईरानी प्रतिनिधि ट्रंप के संबोधन के दौरान बाहर चले गए।
बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं
ट्रंप के भाषण की सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने ईरान को लेकर एक साथ सैन्य दबाव और बातचीत, दोनों की संभावनाएं सामने रखीं। एक तरफ उन्होंने ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई और यहां तक कि ‘खत्म’ करने की धमकी दी। दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव के बाद समझौता हो जाएगा।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ आर्थिक अलगाव की अपील की, जबकि ईरान की तरफ से भी इससे पहले बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावनाओं के संकेत दिए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका की नीति में सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों रास्ते खुले हुए हैं। हालांकि, समझौता कब और किन शर्तों पर होगा, इस पर अभी कोई निश्चितता नहीं है।