डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे 19 जून को स्विट्जरलैंड में ईरान समझौते के लिए होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल नहीं हो सकते हैं। वाशिंगटन का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। समझौते का मसौदा शुक्रवार के बाद कभी भी जारी किया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी स्पीकर गालिबाफ़
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के लिए जो मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू हुआ है उस पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। रायटर्स ने रिपोर्ट दी है कि डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस और ईरान के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने इसपर दस्तख़त किए। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एमओयू पर हस्ताक्षर के लिए औपचारिक समारोह होगा। समझौते का पूरा विवरण इसके बाद जारी किए जाने की संभावना है। यानी अमेरिका और ईरान के बीच लगभग चार महीने पुराने युद्ध को ख़त्म करने के लिए एक समझौता पूरा हो गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ ने समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं। शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है।
पेज़ेशकियन ने बताया, कैसे MoU हुआ
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने बताया है कि ईरान किस तरह इस समझौता ज्ञापन यानी MoU पर सहमत हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'गंभीर बातचीत के बाद मजलिस के लगभग सभी सदस्यों ने समझौता ज्ञापन के मसौदे का समर्थन किया, ताकि ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करने के अमेरिका के असली इरादे को असल में परखा जा सके।'
उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली शर्तों को शामिल करने में सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की सबसे बड़ी भूमिका रही। पेज़ेशकियन ने कहा कि यह MoU महीनों की 'बातचीत और लगातार फॉलो-अप' का नतीजा है, और यह युद्ध रोकने तथा बातचीत शुरू करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि ईरान ने सभी विकल्पों के लिए खुद को तैयार कर लिया है और अगर MoU की सभी शर्तों को लागू किया जाता है तो इसे 'देश के लिए गर्व का दस्तावेज़' माना जा सकता है।
समझौते की बड़ी बातें
यह एमओयू शांति समझौते का आधार तैयार करता है।
दोनों पक्षों ने लड़ाई रोकने और तनाव कम करने का फैसला किया है।
कुछ अहम मुद्दों पर अभी और बातचीत होनी है, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर।
क्षेत्र में कई मोर्चों पर लड़ाई रोकने की कोशिश इस समझौते से जुड़ी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बढ़ेगा
यह समझौता होने के बाद दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'आप होर्मुज में यातायात में काफी बढ़ोतरी देखेंगे। यह पहले से ही शुरू हो चुका है और समय के साथ और बढ़ेगा।' हालांकि उन्होंने साफ किया कि दो हफ्तों में पूरी तरह सामान्य नहीं होगा, लेकिन अच्छा खासा सुधार जरूर दिखेगा। इस जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।ईरान को प्रतिबंध से तुरंत राहत नहीं: ट्रंप
फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, 'इस शांति समझौते में ईरान को तुरंत कोई प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी। यह उनके व्यवहार पर निर्भर करता है। अगर वे जो करना चाहिए, वह करेंगे तो राहत शुरू होगी।' ट्रंप ने आगे कहा कि MoU का पूरा टेक्स्ट शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा। उन्होंने इसे बहुत शक्तिशाली दस्तावेज बताया और कहा कि यह ओबामा काल के समझौते जैसा बुरा नहीं है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए 20 देशों के साथ मिलकर नेतृत्व करेंगे।
डील से फायदे में कौन?
अमेरिका और ईरान के बीच शांति बातचीत में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है, लेकिन ऐसा लगता है कि ईरान को ही सबसे पहले फ़ायदा मिल रहा है। अमेरिका के पूर्व राजदूत और 2015 की परमाणु डील में बातचीत करने वाले अधिकारी हेनरी एंशर का यह कहना है। उन्होंने अल जज़ीरा से कहा, 'समझौता ज्ञापन के बारे में आ रही खबरों से संकेत मिलता है कि ईरान किसी भी बात पर सहमत होने से पहले ही कुछ हासिल कर लेगा।' हालाँकि, उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि यूरेनियम संवर्धन से जुड़े नियम बहुत अहम होंगे। अगर संवर्धन न करने की अवधि लंबी होती है, तो यह एक सुधार होगा।'
यह युद्ध फरवरी 2026 में अमेरिका-इसराइल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों पर हमले किए थे। अमेरिका ने साफ किया कि ईरानी स्पीकर ग़ालिबाफ को ईरान के सर्वोच्च नेता का पूरा समर्थन प्राप्त है। अमेरिका कुछ फ्रोजन ईरानी फंड्स छोड़ने और सीमित प्रतिबंध राहत देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए ईरान को ऐसे क़दम उठाने होंगे जिसकी पुष्टि हो सके।
दोनों देश अब आगे की तकनीकी बातचीत की तैयारी कर रहे हैं। पूरी दुनिया इस समझौते के असर पर नज़र रखे हुए है, खासकर तेल की क़ीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर। अभी देखना यह होगा कि शुक्रवार का औपचारिक समारोह कितना सुचारू होता है और दोनों देश आगे के मुद्दों पर कितनी जल्दी सहमति बना पाते हैं।