दुनिया के तेल उत्पादक देशों के सबसे बड़े संगठन ओपेक को भारी झटका लगा है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने मंगलवार को घोषणा की कि वह 1 मई से ओपेक और ओपेक+ दोनों से बाहर हो जाएगा। अमीरात का ओपेक छोड़ने का यह फ़ैसला लगभग 59 साल बाद आया है और इसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल कार्टेल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

यूएई ने क्या कहा?

यूएई के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, 'यह फैसला हमारे देश की लंबी अवधि की रणनीतिक और आर्थिक विजन को लेकर है। हम अब अपनी ऊर्जा क्षमता को और बढ़ा रहे हैं और घरेलू ऊर्जा उत्पादन में तेजी से निवेश कर रहे हैं। हम वैश्विक ऊर्जा बाजार में जिम्मेदार, भरोसेमंद और भविष्य की ओर देखने वाली भूमिका निभाते रहेंगे।' यूएई ने यह भी कहा कि बाहर निकलने के बाद भी वह जिम्मेदारी से काम करेगा और बाजार की मांग के अनुसार धीरे-धीरे अतिरिक्त तेल उत्पादन बढ़ाएगा।

क्यों है यह फ़ैसला इतना अहम?

यूएई फरवरी 2026 तक सऊदी अरब और इराक के बाद ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश था। यह रोजाना लगभग 30 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है। यूएई ने 1967 में अबू धाबी के ज़रिए ओपेक जॉइन किया था और 1971 में देश बनने के बाद भी सदस्य बना रहा। अब बाहर निकलने के बाद यूएई को ओपेक की उत्पादन कोटा की बाध्यता से मुक्ति मिल जाएगी। वह अपनी क्षमता के अनुसार ज्यादा तेल निकाल सकेगा।
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ओपेक और ओपेक+ क्या है?

ओपेक यानी Organisation of the Petroleum Exporting Countries की स्थापना 1960 में हुई थी। इसके मुख्य सदस्य सऊदी अरब, ईरान, इराक, वेनेजुएला और कुवैत हैं। अभी इसमें 12 सदस्य देश हैं। 2016 में ओपेक ने रूस सहित 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर ओपेक+ बनाया। इसका मक़सद तेल की क़ीमतों को स्थिर रखना और उत्पादन को समन्वयित करना है।

UAE के इस फ़ैसले की वजह क्या?

यह फ़ैसला ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव के समय आया है, जब वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है। यूएई लंबे समय से ओपेक में अपने उत्पादन कोटा से नाखुश था। अब वह अपने राष्ट्रीय हितों और वास्तविक उत्पादन क्षमता के अनुसार फ़ैसले लेना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब के नेतृत्व से कुछ हद तक स्वतंत्रता दिखाने का भी संकेत है। दोनों देश जीसीसी यानी Gulf Cooperation Council के सदस्य हैं और व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन हाल के वर्षों में यमन, सूडान और तेल उत्पादन नीति पर उनके बीच मतभेद बढ़े हैं।

क्या होगा असर?

  • ओपेक और ओपेक+ का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।
  • यूएई ज्यादा तेल उत्पादन बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
  • यह फ़ैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है, जो लंबे समय से ओपेक पर क़ीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं।
  • यूएई के ऊर्जा मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह फैसला बाजार की वास्तविक जरूरतों और यूएई के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है।
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पाक-सऊदी अरब गठबंधन को झटका!

UAE ने पाक-सऊदी अरब गठबंधन के खिलाफ अपना विरोध खुलकर दिखा दिया है। यूएई इसलिए नाराज़ है कि हालिया संघर्ष में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। UAE के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस ने सैकड़ों मिसाइलें और हजारों ड्रोन रोकें। लेकिन GCC यानी खाड़ी सहयोग परिषद के दूसरे देशों से खास समर्थन नहीं मिला। UAE ने पाकिस्तान से ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने को कहा, लेकिन पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इससे UAE नाराज हो गया।

पाकिस्तान पर गुस्से को इससे भी समझा जा सकता है कि UAE ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज समय से पहले वापस मांगा। यह पाकिस्तान की सेंट्रल बैंक की लिक्विडिटी का बड़ा हिस्सा था। बाद में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज दिया और और 5 अरब डॉलर की मदद का वादा किया।

यूएई की नाराज़गी की एक और बड़ी वजह सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने रक्षा समझौता किया, जिसमें पाकिस्तान सऊदी की सुरक्षा में मदद कर सकता है। पाकिस्तान के पास इस्लामी देशों में एकमात्र परमाणु हथियार हैं। UAE को इस बढ़ते गठबंधन से असुविधा हो रही है।
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इसके अलावा UAE और सऊदी अरब के बीच यमन और सूडान में भी रणनीति पर मतभेद हैं। यमन में 2015 से दोनों साथ थे, लेकिन बाद में अलग-अलग गुटों का समर्थन करने लगे। सूडान के गृहयुद्ध में भी दोनों विपरीत पक्षों का साथ दे रहे हैं। तेल उत्पादन के लक्ष्यों पर भी दोनों में अक्सर टकराव होता रहा है। UAE भारत के साथ अच्छे संबंध रखता है, जबकि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक नया गठबंधन बनता दिख रहा है।

बहरहाल, यूएई के ओपेक से बाहर निकलने की यह घटना न सिर्फ तेल बाजार, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि सऊदी अरब और अन्य सदस्य देश इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।