वाशिंगटन में स्थित फोर्ट मैकनैयर सेना अड्डे के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे गए, वहां विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का घर है। ईरान के साथ युद्ध के बढ़ते खतरों के मद्देनजर अधिकारी सेना के अड्डे को ट्रांसफर करने पर विचार कर रहे हैं।
मार्को रूबियो और पीट हेगसेथ
अमेरिकी अधिकारियों ने वाशिंगटन में स्थित एक सेना बेस फोर्ट मैकनेयर के ऊपर अज्ञात ड्रोन्स का पता लगाया है। जहां विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं। यह जानकारी वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में 18 मार्च 2026 को दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 दिनों में एक रात में फोर्ट मैकनेयर के ऊपर कई अज्ञात ड्रोन्स देखे गए। इन ड्रोन्स का मूल या संचालक अभी तक तय नहीं हो सका है। इस घटना ने सुरक्षा अधिकारियों में चिंता पैदा कर दी है, और कुछ अधिकारियों ने रुबियो तथा हेगसेथ को ट्रांसफर करने पर विचार किया, लेकिन दोनों मंत्रियों को अभी तक किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जाया गया है। सैन्य अड्डे को भी हटाने पर विचार हो रहा है, लेकिन यह आसान नहीं है।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने पुष्टि की कि किसी को ट्रांसफर नहीं किया गया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान के खिलाफ जबरन युद्ध थोप दिया है। यूएस में सतर्कता का लेवल बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी सेना संभावित खतरों पर अधिक सतर्कता से नजर रख रही है, क्योंकि ईरान से प्रतिशोध की आशंका जताई जा रही है जो अमेरिकी धरती पर भी पहुंच सकती है।
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने ड्रोन्स या हेगसेथ की गतिविधियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "विभाग रक्षा मंत्री की गतिविधियों पर सुरक्षा कारणों से टिप्पणी नहीं कर सकता, और ऐसी रिपोर्टिंग अत्यधिक गैरजिम्मेदाराना है।"
पेंटागन और स्टेट डिपार्टमेंट ने इस मामले पर कमेंट करने के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। रॉयटर्स ने स्वतंत्र रूप से इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की। वाशिंगटन पोस्ट ने तीन लोगों का हवाला दिया जो स्थिति से वाकिफ हैं, और दो लोगों ने कहा कि ड्रोन्स का स्रोत अज्ञात है।
फोर्ट मैकनेयर वाशिंगटन डीसी में एनाकॉस्टिया नदी के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण सेना बेस है, जहां उच्च स्तरीय अधिकारियों के आवास हैं। इस घटना ने व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय बैठकें भी बुलाईं, जहां प्रतिक्रिया पर चर्चा की गई और सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी राजधानी में सुरक्षा चूक की आशंका को दर्शाती है, जहां ईरान के साथ तनाव चरम पर है।
अमेरिका–ईरान संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर अचानक हवाई हमले किए। यह युद्ध तेजी से बढ़ता गया और इसमें अमेरिका-इसराइल के सीधे हवाई अभियान, पूरे मध्य-पूर्व में ईरान की जवाबी कार्रवाई और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर शामिल हो गया। युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” जैसे अभियान के तहत पहले 12 घंटों में लगभग 900 हमले किए, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल ठिकानों, परमाणु से जुड़े प्रतिष्ठानों, सैन्य अड्डों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। इन हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई, जिससे ईरान की नेतृत्व संरचना में भारी उथल-पुथल मच गई और बाद में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
19 मार्च 2026 तक युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और किसी युद्धविराम के संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका-इसराइल के हजारों हवाई हमलों ने ईरान के 31 में से कम से कम 26 प्रांतों को प्रभावित किया है, जिनका फोकस बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और लॉन्च साइटों, वायु रक्षा प्रणालियों, आंतरिक सुरक्षा बलों, नौसैनिक संसाधनों और परमाणु सुविधाओं पर रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने इज़राइल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरियों, कतर के रस लाफ़ान गैस टर्मिनल और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़रानी को बाधित करने की कोशिशें भी इस संघर्ष का हिस्सा बनी हैं।
इस युद्ध का क्षेत्रीय और वैश्विक असर लगातार बढ़ रहा है। लेबनान सीमा पर हिज़्बुल्लाह-इसराइल झड़पें, हूती समूहों की धमकियाँ और खाड़ी देशों में हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ गया है। अमेरिका के भीतर संभावित साइबर हमलों, ड्रोन गतिविधियों या असममित जवाबी कार्रवाइयों को लेकर अलर्ट जारी किए गए हैं, हालांकि अभी तक मुख्य अमेरिकी भूमि पर कोई पुष्टि-योग्य हमला नहीं हुआ है। कूटनीतिक स्तर पर ओमान और मिस्र की मध्यस्थता की कोशिशें असफल रही हैं और दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं, जिससे यह संघर्ष फिलहाल कम होने के बजाय और लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है।