हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ओमान के तट के पास एक अमेरिकी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर (Apache Helicopter) के क्रैश होने के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिकी सेना ने ईरान पर जवाबी हमले शुरू किए। तब ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Navy's 5th Fleet) के मुख्यालय पर ड्रोन और मिसाइल से बड़ा हमला करने का दावा किया है।

तनाव की शुरुआत क्या अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को लेकर हुई

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ओमान के तट के पास गश्त लगा रहा अमेरिकी सेना का एक अत्याधुनिक AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर गिर गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह क्रैश एक ईरानी ड्रोन के साथ टकराने (Collision) की वजह से हुआ। हालांकि ट्रंप का कहना है कि ईरानी सेना ने हमारे अपाचे को मार गिराया। ट्रंप के इस आरोप की पुष्टि इस बात से होती है कि उसके बाद अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर बमबारी की। तब ईरान ने भी पांचवे बेड़े पर हमला करके जवाब दिया।
अपाचे हेलीकॉप्टर के दोनों पायलट सुरक्षित हैं। अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के 'टास्क फोर्स 59' द्वारा संचालित एक समुद्री सी-ड्रोन (Corsair Unmanned Surface Vessel) की मदद से दोनों पायलटों को करीब दो घंटे के भीतर पानी से सुरक्षित निकाल लिया गया। अमेरिकी इतिहास में इस तरह के सी-ड्रोन द्वारा किया गया यह पहला रेस्क्यू ऑपरेशन है।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए साफ कहा, "ईरानियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त कर रहे हमारे आधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। दोनों पायलट सुरक्षित हैं, लेकिन अमेरिका इस हमले का कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए मजबूर है।"

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई ईरान में कहां-कहां हुई

राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों और MQ-9 रीपर ड्रोन्स ने दक्षिणी ईरान के जस्क, सीरिक और केशम द्वीप (Qeshm Island) जैसे इलाकों में ईरानी ठिकानों पर बमबारी की। अमेरिकी सेना ने इसे ईरान की बेवजह की आक्रामकता के खिलाफ अपनी 'आत्मरक्षा' (Self-Defense) में की गई कार्रवाई बताया।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी 5वें बेड़े को कितना नुकसान

अमेरिका के इस हमले के तुरंत बाद ईरान की सेना (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (5th Fleet Headquarters) और कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और घातक ड्रोन्स दागे हैं।
  • ईरान का दावा: ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है, जिसमें सीरिक में एक टेलीकम्युनिकेशन मास्ट और पानी के टैंक तबाह हुए थे।
  • CENTCOM का बयान: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि ईरान द्वारा दागी गई अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट (हवा में नष्ट) कर दिया गया या वे अपने टारगेट तक पहुंचने में विफल रहे। इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक या कर्मचारी के घायल होने की खबर नहीं है।

यूएस के हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने इस तनाव पर अमेरिका को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुला अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने लिखा: "रणभूमि में अपनी हार के बावजूद, अमेरिका ने हमारे संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या खतरे को अनुत्तरित (Unanswered) नहीं छोड़ेंगी। अगर सुरक्षित रहना चाहते हो, तो हमारे क्षेत्र को छोड़ दो। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के इतिहास में घुसपैठियों के भयानक अंजाम के कई अध्याय दर्ज हैं।"

इससे पहले ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के जरिए यह भी कहा था कि उसने अमेरिकी हेलीकॉप्टर को जानबूझकर नहीं गिराया था, बल्कि विदेशी सेनाएं अपनी मानवीय गलतियों या तकनीकी खराबी के चलते खुद हादसों का शिकार हो रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाहाकार और वैश्विक चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग छिड़ने की खबरों के बाद वैश्विक बाजारों में भारी उथल पुथल देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस मार्ग पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका है, जिससे भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। क्रूड आयल के दाम बढ़ने लगे हैं।