ईरान के स्कूल पर जिस हमले में अधिकतर बच्चे सहित 175 लोग मारे गए थे, वह अमेरिकी ग़लती का नतीजा था। यह अमेरिकी सेना की शुरुआती जाँच में ही सामने आया है। अमेरिका के प्रतिष्ठित अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह ख़बर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना की शुरुआती जाँच में पता चला है कि 28 फ़रवरी को ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल शजराह तैय्येबा एलीमेंट्री स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइल से हमला अमेरिका की ग़लती से हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि यह हमला ईरान ने खुद किया।

क्या हुआ था 28 फरवरी को?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए थे। इसका नाम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी रखा गया। अमेरिका ने ईरान की नौसेना और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों पर हमले किए, ताकि ईरान की मिसाइल और नौसेना को कमजोर किया जा सके। मिनाब शहर में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड नेवी का एक बेस था। इसी बेस के बगल में शजराह तैय्येबा स्कूल था। इसी स्कूल पर हमला हुआ था। इस हमले में कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। इसमें भी ज्यादातर लड़कियां। यह हाल के दशकों की सबसे बड़ी सैन्य गलतियों में से एक मानी जा रही है।

अमेरिका ने ये ग़लती कैसे की?

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक़, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुरानी जानकारी के आधार पर टारगेट बनाया। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी यानी डीआईए ने पुराने डेटा दिए, जिसमें स्कूल की इमारत को अभी भी सैन्य हिस्सा बताया गया था। लेकिन वास्तव में यह इमारत 2013-2016 के बीच स्कूल में बदल चुकी थी। चारदीवारी बनाई गई, खेल का मैदान बनाया गया, तीन सार्वजनिक प्रवेश द्वार खुले, दीवारें नीली और गुलाबी रंग से रंगी गईं और सैटेलाइट इमेज में यह साफ दिखता है।
स्कूल पहले बेस का हिस्सा था, लेकिन अब अलग हो चुका था। जांच में कहा गया कि पुरानी जानकारी को दोबारा चेक नहीं किया गया। इसमें कहा गया है कि युद्ध की शुरुआत में तेजी से फैसले लेने पड़ते हैं, इसलिए कभी-कभी ऐसी गलतियां हो जाती हैं। 

स्कूल पर हमले की जाँच अभी पूरी नहीं हुई है। कई सवाल बाकी हैं। पुराना डेटा क्यों इस्तेमाल हुआ और क्यों किसी ने चेक नहीं किया?

मौतें और नुकसान

ईरान के अधिकारियों के अनुसार, हमले में 175 लोग मारे गए। इसमें ज्यादातर बच्चे और स्कूल स्टाफ थे। स्कूल में उस समय बच्चे पढ़ रहे थे। ईरानी मीडिया ने वीडियो जारी किया, जिसमें मलबे से बच्चों के हाथ-पैर और सिर निकालते लोग दिखे। कई बच्चे मलबे में दब गए। यह युद्ध का अब तक का सबसे बड़ा नागरिक नुकसान वाला हमला माना जा रहा है।

ट्रंप का बयान और विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि यह हमला ईरान ने खुद किया। उन्होंने कहा था, 'मेरी राय में यह ईरान ने किया। उनके हथियार सटीक नहीं होते।' ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के पास भी टॉमहॉक मिसाइल हो सकती हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि टॉमहॉक सिर्फ अमेरिका के पास है। ईरान के पास ऐसी मिसाइल नहीं है।
ट्रंप ने बाद में कहा कि जांच के नतीजे मान लेंगे, लेकिन पहले ईरान पर इल्जाम लगाया। व्हाइट हाउस ने कहा कि जांच जारी है और ट्रंप नतीजों को मानेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार लेकिन कई अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ट्रंप का बयान जांच को मुश्किल बना रहा है।

वीडियो और सबूत क्या

ईरानी मीडिया मेहर न्यूज ने वीडियो जारी किया, जिसमें टॉमहॉक मिसाइल बेस पर गिरती दिख रही है। यह वीडियो बेलिंगकैट और न्यूयॉर्क टाइम्स ने जियो-लोकेट किया। सैटेलाइट इमेज से साफ है कि स्कूल और बेस पर एक साथ हमला हुआ। मिसाइल के टुकड़ों में अमेरिकी मार्किंग मिली।

अन्य एजेंसियां भी जांच में

जांच में डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी, नेशनल जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस एजेंसी और सेंट्रल कमांड की भूमिका देखी जा रही है। एआई या नई तकनीक से गलती होने की संभावना कम है। ज्यादातर मानवीय गलती बताई जा रही है।

1999 में भी ऐसी गलती हुई थी

1999 के कोसोवो युद्ध में सीआईए के पुराने मैप से चाइनीज दूतावास पर हमला हुआ था, जिसमें 3 लोग मारे गए थे। तब भी पुरानी जानकारी से गलती हुई थी।

अब आगे क्या?

पेंटागन और सेंट्रल कमांड ने कहा कि जांच जारी है, लेकिन इसने कोई अन्य टिप्पणी नहीं। कई अमेरिकी सीनेटरों ने जांच की मांग की है। मानवाधिकार संगठन इसे युद्ध अपराध मानकर जांच चाहते हैं। यह घटना युद्ध में नागरिकों की सुरक्षा की बड़ी चिंता पैदा कर रही है। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन सबूत अमेरिका की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच पूरी होने पर और साफ तस्वीर आएगी।