किसी आतंकी के ख़िलाफ़ भारत के प्रयासों पर इस तरह की प्रक्रिया पहले कभी नहीं हुई है। बताया जाता है कि सुरक्षा परिषद के 14 सदस्यों ने अज़हर पर प्रस्तावित प्रतिबंध का समर्थन किया है।
एक तरफ़ तो अपने घर में ही चीन लाखों मुसलिमों को प्रताड़ित करता है, लेकिन दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र में उग्र आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने से बचाता है।
चीन तर्क देता रहा है कि मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पिछली बैठक से पहले कहा था कि मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।