शांति वार्ता के प्रयासों के बीच अमेरिका ने ईरान के अंदर एक सैन्य ठिकाने पर फिर से हमले किए हैं। यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित बंदर अब्बास में किया गया। अमेरिका का कहना है कि यह ठिकाना उनके सैनिकों और व्यापारी जहाजों के लिए खतरा बन रहा था। अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने ईरानी ड्रोन इंटरसेप्ट किए और उन्हें मार गिराया। इसके बाद ईरानी सेना IRGC ने कहा है कि उसने वॉशिंगटन के हालिया हमलों के जवाब में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है। रॉयटर्स ने तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के हवाले से बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हालिया हमलों के जवाब में एक अमेरिकी बेस को निशाना बनाया।

ईरानी मीडिया के मुताबिक़ गुरुवार तड़के क़रीब 1:30 बजे बंदर अब्बास के पूर्वी इलाक़े में कम से कम तीन जोरदार धमाके हुए। इसके बाद ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कई मिनट तक सक्रिय रहा। रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में ईरान के ग्राउंड कंट्रोल सेंटर पर हमला किया। यह जगह एक ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी कर रही थी। इसने कहा है कि यह ईरान का पांचवां ड्रोन होता। अमेरिकी बलों ने कई ईरानी ड्रोन भी मार गिराए, जो अमेरिकी सैनिकों और जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कहा, 'ये कार्रवाई बहुत सोची-समझी, पूरी तरह रक्षात्मक थी और युद्धविराम को बनाए रखने के लिए की गई।'
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युद्ध ख़त्म करने के लिए शांति वार्ता

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तीन महीने पुराने युद्ध को ख़त्म करने के लिए बातचीत चल रही है। इस युद्ध की शुरुआत 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों से हुई थी। अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और दुनिया भर में तेल की क़ीमतें बहुत बढ़ गई हैं।

पहले भी हमले हो चुके

इस हफ्ते की शुरुआत में ही अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में ऐसे ही हमले किए थे। अमेरिकी सेना सेंट्रल कमांड ने उन्हें 'आत्मरक्षा' के हमले बताया था। उस समय ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और जहाजों को निशाना बनाया गया था, जो समुद्री रास्ते में माइन्स बिछाने की कोशिश कर रहे थे। 

ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है। ईरान कहता है कि पिछले सात हफ्तों से चले आ रहे सीजफायर को अमेरिका बार-बार तोड़ रहा है।

MoU ड्राफ्ट समझौते पर विवाद

अभी भी वाशिंगटन और तेहरान के बीच औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। दोनों तरफ़ से अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं। ईरानी सरकारी टीवी ने बुधवार को एक ड्राफ्ट समझौते की जानकारी दी। इसमें कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारी जहाजों की आवाजाही एक महीने में पहले जैसी हो जाएगी। इसने कहा था कि अमेरिका अपने सैनिकों को ईरान के पास से हटाएगा और 'नौसैनिक ब्लॉकेड' खत्म करेगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ईरान ओमान के सहयोग से इस जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों का प्रबंधन करेगा। हालांकि, इसमें सैन्य जहाज शामिल नहीं होंगे। रिपोर्ट के अनुसार अगर अमेरिका अपनी सेनाएं ईरान के आसपास से हटा लेता है तो होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो जाएगी। अगर 60 दिनों के अंदर अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC का बाध्यकारी प्रस्ताव बना दिया जाएगा।
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लेकिन अमेरिका ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह फर्जी बता दिया। व्हाइट हाउस ने एक्स पर लिखा, 'ईरानी मीडिया की यह रिपोर्ट झूठी है। उन्होंने जो MOU जारी किया है, वह पूरी तरह मनगढ़ंत है। किसी को भी ईरानी स्टेट मीडिया पर भरोसा नहीं करना चाहिए।' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानी मीडिया की एक और खबर को खारिज कर दिया। ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य की नौवहन लेन को संयुक्त रूप से नियंत्रित करेंगे। ट्रंप ने साफ़ कहा कि यह अहम जलमार्ग खुला रहेगा।

सीजफायर की स्थिति

सीजफायर बहुत कमजोर नज़र आ रहा है। ईरान ने अमेरिका के इन हमलों का जवाब देने की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी जारी है और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

अब्राहम एकोर्ड्स की शर्त से भी तनाव बढ़ा

इसी बीच, ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते से पहले एक नई और कड़ी शर्त रख दी थी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी डील होने से पहले सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन को इसराइल के साथ अब्राहम एकोर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। यह या तो सबके लिए बहुत अच्छा समझौता होगा, वरना कोई समझौता नहीं होगा।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो बड़ी लड़ाई हो सकती है। ट्रंप ने सऊदी अरब और कतर को इस प्रक्रिया की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंपी।
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ट्रंप ने शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसीम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान समेत कई नेताओं से फोन पर बात की और अब्राहम एकोर्ड्स में शामिल होने पर जोर दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने इस मांग को साफ़ तौर पर खारिज कर दिया है। पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इसराइल को मान्यता देना पाकिस्तान की मूल विचारधारा के ख़िलाफ़ है। बाक़ी देशों ने भी इसको लेकर कोई उत्साहजनक बयान नहीं दिया। इसके बाद से अब्राहम एकोर्ड्स को लेकर ट्रंप की ओर से कोई बयान नहीं आया है।