अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गाबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने दिए गए बयान में दो अहम खुलासे किए हैं। एक ओर उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को आगे बढ़ाकर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित कर सकता है। ये मिसाइलें अमेरिकी धरती यानी वाशिंगटन तक पहुंच सकती है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका-इसराइल हमलों से पहले अपना परमाणु संवर्धन (enrichment) कार्यक्रम दोबारा नहीं बना रहा था।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में ईरान पर अमेरिका, इसराइल ने युद्ध थोप दिया है। ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। उन पर आरोप लग रहा है कि उनके सलाहकारों ने इसराइल की ओर से ट्रंप पर युद्ध में शामिल होने के लिए दबाव बनाया।

पाकिस्तान पर तुलसी गाबार्ड का बयान

तुलसी गाबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी को बताया कि पाकिस्तान का लंबी दूरी का मिसाइल कार्यक्रम आगे विकसित होकर ICBM स्तर तक पहुंच सकता है, जो अमेरिकी होमलैंड (वाशिंगटन सहित) को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान समेत कई देश ऐसे मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं जो परमाणु और पारंपरिक दोनों पेलोड ले जाने में सक्षम हैं और अमेरिकी क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं।
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अमेरिकी खुफिया समुदाय (US Intelligence Community) का अनुमान है कि वर्तमान में अमेरिका पर मिसाइल खतरा 3,000 से अधिक है, जो 2035 तक बढ़कर 16,000 से अधिक हो सकता है। चीन और रूस तो पहले से ही अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को भेदने या बायपास करने वाले एडवांस्ड सिस्टम बना रहे हैं। उत्तर कोरिया की ICBM पहले से ही अमेरिकी धरती तक पहुंचने में सक्षम है।
गाबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान का लंबी दूरी का मिसाइल कार्यक्रम ICBM स्तर तक विकसित हो सकता है, जिससे अमेरिका पर सीधा खतरा बढ़ जाएगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर महत्वपूर्ण खुलासा

तुलसी गाबार्ड ने सीनेट के सामने लिखित गवाही में स्पष्ट किया कि जून 2025 में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के परमाणु सुविधाओं पर किए गए हमले (Operation Midnight Hammer) के बाद ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो गया था। उन्होंने लिखा: “Operation Midnight Hammer के परिणामस्वरूप ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम नष्ट हो गया। उसके बाद से संवर्धन क्षमता को दोबारा बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।”

यह बयान ट्रंप प्रशासन के उस दावे को सीधे चुनौती देता है जिसमें उन्होंने ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षा को युद्ध का मुख्य कारण बताया था। गाबार्ड ने मौखिक गवाही के दौरान इस हिस्से को पढ़ा नहीं, जिस पर डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने सवाल उठाया कि “आपने वो हिस्सा जानबूझकर छोड़ा जो ट्रंप के दावों के खिलाफ है।“ गाबार्ड ने जवाब दिया कि उनके पास समय नहीं था, लेकिन उन्होंने इस आकलन से इनकार नहीं किया।

ईरान युद्ध पर अन्य टिप्पणियां

गाबार्ड ने कहा कि ईरान की सरकार को Operation Epic Fury से झटका तो जरूर लगा है, लेकिन रिजीम अभी भी बरकरार है। ईरान और उसके प्रॉक्सी अभी भी मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी हितों पर हमले जारी रखने में सक्षम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान की शत्रुतापूर्ण सरकार बची रही तो वह मिसाइल और ड्रोन क्षमता दोबारा बनाने का प्रयास करेगी।
ये बयान तुलसी गाबार्ड की सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी में Annual Threat Assessment पेश करते समय दिए गए। एक दिन पहले ही उनकी एजेंसी के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने ईरान युद्ध का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था।
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तुलसी गाबार्ड खुद पहले मध्य पूर्व युद्धों की आलोचक रही हैं, लेकिन अब उन्होंने ट्रंप के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप को ही तय करना है कि खतरा तात्कालिक था या नहीं।
ये खुलासे अमेरिका-ईरान युद्ध की वैधता पर नए सवाल खड़े कर रहे हैं और पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी अमेरिका में नई चिंता पैदा कर सकते हैं।