ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस समझौते पर अंग्रेजी और फारसी दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि अनुवाद को लेकर भविष्य में कोई मतभेद न हो।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन पीस डील पर साइन दिखाते हुए
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।
इस समझौते को 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (Islamabad Memorandum of Understanding) का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "यह साइन हो चुका है। मैंने अभी-अभी इस पर हस्ताक्षर किए हैं।" दूसरी तरफ ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और अन्य अधिकारियों ने भी इसे डिजिटल रूप से साइन किया है।
शहबाज़ शरीफ का महत्वपूर्ण बयान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी इस पर बयान जारी कर कहा, "यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पहले कदम के रूप में, ईरान तुरंत हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोल देगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।"
समझौते की 14 मुख्य बातें क्या हैं
व्हाइट हाउस और ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए समझौते के मुख्य प्वाइंट इस प्रकार हैं:
- तत्काल युद्धविराम: अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तत्काल और स्थायी रूप से सैन्य अभियानों को समाप्त करने की घोषणा करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी या हमला नहीं करेंगे।
- संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करते हैं।
- 60 दिनों की समयसीमा: दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते (Final Deal) पर बातचीत पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।
- सेना की वापसी: अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेनाएं हटा लेगा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: ईरान शुरुआती 60 दिनों के लिए फारस की खाड़ी से ओमान के समुद्र तक वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Vessels) के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन की व्यवस्था करेगा। 30 दिनों के भीतर नौसैनिक और तकनीकी बाधाओं (जैसे बारूदी सुरंगें हटाना) को दूर किया जाएगा।
- भविष्य का प्रशासन: ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान और अन्य तटीय देशों के साथ बातचीत करेगा।
- 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (USD $300 Billion) की योजना विकसित करेगा।
- प्रतिबंधों की समाप्ति: एक तय समय सारणी के तहत अमेरिका, ईरान के खिलाफ सभी एकतरफा (प्राइमरी और सेकेंडरी) प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देता है।
- परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा।
- यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) का निपटारा: ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार का निपटारा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में 'ऑन-साइट डाउन-ब्लेंडिंग' (यूरेनियम की क्षमता कम करना) के जरिए किया जाएगा।
- यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना: अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्तर पर ही रोके रखेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।
- तेल निर्यात को छूट और फंड की बहाली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल छूट (Waivers) जारी करेगा। साथ ही विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की संपत्तियों को वापस इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
- निगरानी तंत्र की स्थापना: समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र (Executive Mechanism) स्थापित किया जाएगा। इस अंतिम समझौते को UNSC के एक बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
पारदर्शिता के लिए दो भाषाओं में हस्ताक्षर
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस समझौते पर अंग्रेजी और फारसी (Farsi) दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि अनुवाद को लेकर भविष्य में कोई मतभेद या कोई और व्याख्या न हो। ईरान ने अपनी केंद्रीय बैंक (Central Bank) के साथ मिलकर जब्त संपत्तियों को वापस पाने के तकनीकी तौर-तरीकों को भी अंतिम रूप दे दिया है।ईरान की मांग और समझौते के सामने चुनौतियांः इस बड़ी कामयाबी के बावजूद, समझौते को पूरी तरह लागू करने में एक बड़ा पेंच फंसता दिख रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ किया है कि जब तक इसराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पूरी तरह पीछे नहीं हट जाती, तब तक युद्ध को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। ईरान का कहना है कि लेबनान से इसराइल की वापसी इस शांति प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
हालांकि, अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों का कहना है कि समझौते में इसराइली सेना की वापसी की ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है। इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी रुख साफ किया है कि इसराइली सैनिक जब तक जरूरत होगी लेबनान में बने रहेंगे। इस विरोधाभास के कारण स्विट्जरलैंड में होने वाले आगामी औपचारिक समारोह से पहले थोड़ी अनिश्चितता जरूर बन गई है।
यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते के सफल होने से न केवल तेल की वैश्विक कीमतें स्थिर होंगी, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने का एक नया रास्ता खुलेगा।