ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आशंका तेज़ हो गई है। अमेरिकी मीडिया कई दिनों से यह खबर दे रहा है, लेकिन अब जिस तरह से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान दिया है, उससे इस बार स्थिति गंभीर हो गई है। अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक लावरोव ने बुधवार को सार्वजनिक किए गए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान पर अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी नया हमला गंभीर नतीजा लाएगा। लावरोव का सऊदी अरब के अल-अरबिया टीवी को दिया गया इंटरव्यू, वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते नए संकट को टालने के लिए अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों द्वारा जिनेवा में अप्रत्यक्ष वार्ता आयोजित करने के एक दिन बाद आया है।

आग से कौन खेल रहा है

रूसी विदेश मंत्री ने कहा- “अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के नियंत्रण वाले परमाणु स्थलों पर ईरान पर पहले ही हमले हो चुके हैं। हमारे अनुमान के अनुसार, उस समय परमाणु दुर्घटना का वास्तविक खतरा था।” लावरोव ने कहा- “मैं अरब देशों और खाड़ी देशों की प्रतिक्रियाओं पर बारीकी से नज़र रख रहा हूँ। कोई भी तनाव बढ़ाना नहीं चाहता। हर कोई समझता है कि यह आग से खेलने जैसा है।”

समुद्र में रूस-ईरान संयुक्त अभ्यास

इस बीच अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच रूस और ईरान ने अपने रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। जहाँ एक ओर दोनों देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अरबों डॉलर के समझौतों पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समुद्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • गुरुवार से ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में रूस और ईरान की नौसेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू हो गया है। इसका मकसद समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और आपसी सहयोग बढ़ाना है। रूसी नौसेना कमांडर एलेक्सी सर्गेव ने इस साझेदारी को "करीबी और मैत्रीपूर्ण" बताया है, जो समुद्री चुनौतियों से निपटने में सहायक होगी। हालांकि कूटनीतिक रणनीति पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि यह संयुक्त अभ्यास अमेरिका-इसराइल को एक संकेत है कि वे कोई नादानी नहीं करें।
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रूसी मंत्री तेहरान में, परमाणु बिजली प्लांट पर काम

रूसी ऊर्जा मंत्री सर्गेई त्सिविलेव ने तेहरान में घोषणा की कि रूस, ईरान में नए परमाणु बिजली संयंत्रों के निर्माण की संभावनाओं पर "गंभीरता" से काम कर रहा है।  मौजूदा परियोजना बुशहर परमाणु संयंत्र की दूसरी और तीसरी यूनिट का काम जारी है। सितंबर 2025 में दोनों देशों के बीच दक्षिण-पूर्वी ईरान में परमाणु संयंत्र बनाने के लिए 25 अरब डॉलर का समझौता हुआ था। एक संयुक्त कार्य समूह अगले तीन महीनों में अतिरिक्त हाई-पावर और लो-पावर यूनिट्स के लिए प्रस्ताव पेश करेगा।

अमेरिका की 'तैयारी' और बढ़ता तनाव

तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को बढ़ा दिया है। USS Gerald R. Ford विमानवाहक पोत मिडिल ईस्ट में भेजा गया है। यह पोत पहले से तैनात USS Abraham Lincoln और उसके साथ आए मिसाइल विध्वंसक जहाजों (destroyers) के साथ शामिल होगा।

जंग की आहट के बीच बातचीत जारी

जंग की आहट के बीच कूटनीतिक रास्ते भी खुले हुए हैं। जेनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता हुई।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इसे "सकारात्मक" बताया है। हालाँकि, अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। 
  • चिन्ता क्या हैः पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार ईरान के पास अब 60% तक संवर्धित (enriched) यूरेनियम है, जो हथियार बनाने के स्तर के बेहद करीब है।
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इसराइल का अलर्ट: 'कभी भी हो सकता है हमला'

इसराइली मीडिया के अनुसार, इसराइल अपनी सेना को हाई-अलर्ट पर रख रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि ईरान के साथ टकराव "जल्द ही" शुरू हो सकता है। यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका, ईरान के परमाणु ठिकानों पर स्ट्राइक कर सकता है, जो हफ्तों तक चलने वाले युद्ध में बदल सकता है। इसराइल की विदेश और रक्षा समिति के अध्यक्ष बोआज़ बिस्मुथ ने कहा- "हम ईरान के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण दिनों का सामना कर रहे हैं। जनता और अधिकारी हर स्थिति के लिए तैयार हैं।"