अमेरिका की ट्रंप सरकार ने गुरुवार को बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड पाने के कार्यक्रम से बाहर कर दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल के साथ-साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम यानी PERM से सस्पेंड कर दिया है। इस फ़ैसले की घोषणा अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख के साथ मिलकर की। उन्होंने इन कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे रोजगार वीजा कार्यक्रमों का ग़लत इस्तेमाल कर रही हैं और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रही हैं।
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा, 'मैं दुनिया की सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी- को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से तुरंत सस्पेंड कर रहा हूँ।' उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इसी सूची में शामिल किया। सॉन्डरलिंग ने आगे कहा कि श्रम विभाग अब इन कंपनियों से जुड़े कोई भी नए या लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन स्वीकार या प्रोसेस नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा, '2009 से सिर्फ इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की। इन्हें 2 लाख 30 हजार से ज्यादा एच-1बी वीजा और 1 लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन मिल चुके हैं। ये सैकड़ों हजार नौकरियां अमेरिकी कर्मचारियों से छीन ली गईं।'

PERM प्रोग्राम क्या है?

PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन एक प्रक्रिया है जिसके ज़रिए कंपनी को साबित करना पड़ता है कि किसी खास नौकरी के लिए योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं। इसके बाद ही वह विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी यानी ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर कर सकती है। यह रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का एक ज़रूरी क़दम है। एच-1बी वीजा अस्थायी होता है, जबकि PERM स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का रास्ता खोलता है।

भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?

भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए यह ख़बर काफी बड़ी है। इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियों के अमेरिका में हजारों भारतीय कर्मचारी काम करते हैं। एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय प्रोफेशनल्स ही करते हैं। लगभग तीन-चौथाई एच-1बी वीजा भारतीयों को मिलते रहे हैं। इस सस्पेंशन से इन कंपनियों के कर्मचारी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में अटक सकते हैं। 

अगर किसी का PERM आवेदन लंबित है या नया आवेदन करना है तो फिलहाल वह रुक जाएगा। इससे कई भारतीय परिवारों की भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

क्या H-1B वीजा भी बंद हो गया?

यह फैसला एच-1बी वीजा को रद्द नहीं करता। मौजूदा एच-1बी वीजा वाले कर्मचारी काम जारी रख सकते हैं। सिर्फ ग्रीन कार्ड को लेकर PERM वाली प्रक्रिया प्रभावित हुई है। H-1B अमेरिका में विशेष योग्यता वाले कर्मचारियों को अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देने वाला वीजा, स्टेटस है। दूसरी ओर, PERM रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए अभी की कार्रवाई का तत्काल असर नई और लंबित PERM आवेदन पर है।
किसी कर्मचारी पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका ग्रीन कार्ड केस किस चरण में है। जिन कर्मचारियों का मामला अभी PERM दाखिल करने या उसके प्रोसेस होने के चरण में है, उनके लिए यह रोक ज्यादा अहम हो सकती है।

विदेशी कर्मचारियों पर ट्रंप की सख़्ती

ट्रंप प्रशासन विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के कार्यक्रमों पर सख्ती बढ़ा रहा है। हाल ही में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए 70 हजार डॉलर फीस का प्रस्ताव रखा है। श्रम विभाग ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड सहित नौ विश्वविद्यालयों की भी जाँच शुरू की है।

यह पूरा क़दम अमेरिकी नौकरियों को बचाने और कंपनियों को ज़्यादा अमेरिकी कर्मचारियों को रखने के लिए दबाव बनाने का हिस्सा बताया जा रहा है। हालाँकि कंपनियों पर लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। सस्पेंशन सिर्फ PERM प्रोग्राम से जुड़ा है। भारतीय आईटी सेक्टर और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह फ़ैसला चिंता का विषय बन गया है। आगे क्या होता है, यह सरकार के अगले फ़ैसलों और क़ानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।