अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता 'नष्ट' हो चुकी है। व्हाइट हाउस ने कहा, “ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता स्पष्ट रूप से नष्ट हो गई है। उनकी नौसेना युद्ध नहीं लड़ सकती है। ईरान के ऊपर हमारा पूरा हवाई प्रभुत्व हासिल है।” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रविवार को कहा था कि अमेरिकी बलों ने ईरान की ड्रोन निर्माण क्षमता को भी तबाह कर दिया है। ये सारे अमेरिका और इसराइल के संयुक्त सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के बाद किए गए हैं। लेकिन हम लोग देख रहे हैं कि ईरान की तरफ से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार हो रहे हैं। होर्मुज का रास्ता ईरान के दुश्मनों के लिए बंद पड़ा है।

पेंटागन के दावे

पेंटागन के अनुसार, युद्ध के पहले दिन की तुलना में ईरान के मिसाइल लॉन्च में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 86 प्रतिशत की कमी आई है। यह अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। हालांकि, इन दावों के बावजूद ईरान क्षेत्रीय लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की क्षमता भले ही काफी कम हो गई हो, लेकिन उसके पास अभी भी पर्याप्त मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर हैं, जिनसे वह रणनीतिक रूप से हमले कर क्षेत्र को अस्थिर रख सकता है।

ईरान के हमले जारी रहने की वजहें

  • ईरान ने अपनी मिसाइल कमान को विकेंद्रीकृत कर दिया है और मोबाइल लॉन्चरों पर अधिक निर्भर है, जो पता लगाने और नष्ट करने में कठिन हैं।
  • युद्ध से पहले छिपे हुए स्थानों में रखी मिसाइलें अभी भी उपलब्ध हैं।
  • ईरान अब बड़े पैमाने पर सैल्वो (वॉली) फायरिंग की बजाय एक-दो मिसाइलों से 'परेशान करने वाली फायरिंग' (harassment fire) कर रहा है, जिसका उद्देश्य आसपास के देशों के अलर्ट सिस्टम को थकाना और लोगों में डर पैदा करना है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की रणनीति घिसावट की लड़ाई (war of attrition) है। वह मानता है कि गल्फ देश और इसराइल के डिफेंस सिस्टम पहले खत्म हो जाएंगे, जबकि उसके पास अभी भी मिसाइलें बची हैं।
  • डेविड डेस रोचेस (नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी) ने कहा, “लॉन्चरों को पहचानना आसान नहीं है। बिना जमीन पर सैनिकों के, ईरान की पूरी क्षमता खत्म करना मुश्किल है।”
  • हमीद रज़ा अज़ीज़ी (जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स) ने कहा कि ईरान मोबाइल लॉन्चरों और विकेंद्रीकृत कमान से हमले जारी रख रहा है।
  • मुहानद सेलूम (दोहा इंस्टीट्यूट) ने कहा, “कितनी मिसाइलें लॉन्च की जाती हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता, जब तक credible threat बनी रहे। एक सफल ड्रोन भी सुरक्षा की भावना को तोड़ सकता है।”
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अमेरिकी दावों के बाद- ईरानी मिसाइल के ताज़ा हमले

सोमवार 16 मार्च को ईरानी हमलों पर नज़र डालिए तो हालात साफ हो जाएंगे।
  • सोमवार दोपहर को कतर ने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक लिया।
  • अबू धाबी में एक मिसाइल एक कार पर गिरी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। यूएई डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि वे जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।
  • दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन से आग लगी, जिससे उड़ानें प्रभावित हुईं।
  • फुजैराह इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रोन हमले से आग लगी।
  • इसराइल के केंद्रीय हिस्से में एयर सायरन बजे, ईरान से एक मिसाइल दागी गई।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में सैकड़ों जहाज डर से रुके हुए हैं, युद्ध शुरू होने के बाद हमलों की 20 घटनाएं दर्ज।
  • युद्ध के पहले 24 घंटों में ईरान ने यूएई पर 167 मिसाइलें और 541 ड्रोन दागे थे। अब दिन 15 पर मात्र 4 मिसाइलें और 6 ड्रोन।
  • इसराइल पर पहले दो दिनों में लगभग 100 प्रोजेक्टाइल दागे गए, अब सिंगल-डिजिट संख्या में।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान क्षेत्र में सबसे बड़ी बैलिस्टिक मिसाइल इन्वेंटरी रखता है। 2022 में अनुमानित हजारों मिसाइलें थीं। पिछले साल जून के 12-दिन के युद्ध में कुछ कम हुईं। इसराइल ने 410-440 अनुमानित लॉन्चरों में से 290 को निष्क्रिय किया है। ईरान सस्ते और प्रभावी ड्रोन जैसे शाहेद-136 का उत्पादन करता है, जो सरल फैक्टरियों में बनाए जा सकते हैं।

संघर्ष का प्रभाव

युद्ध से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। कतर ने उत्पादन बंद किया, बहरीन ने शिपमेंट पर फोर्स मेज्योर घोषित किया, इराक के दक्षिणी तेल उत्पादन में 70% गिरावट आई। होर्मुज जलडमरूमध्य (वैश्विक ऊर्जा का 20%) ठप है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका-इसराइल लॉन्चरों को निशाना बनाने पर फोकस कर रहे हैं, लेकिन बिना ग्राउंड फोर्स के पूरी क्षमता खत्म करना चुनौतीपूर्ण है। संघर्ष जारी है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ता जा रहा है।