ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से नजर न आने से वैश्विक खुफिया एजेंसियों में हलचल मची हुई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और इसराइली खुफिया एजेंसी मोसाद सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय खुफिया संगठन उनके ठिकाने और स्वास्थ्य की स्थिति का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान अमेरिका और इसराइल द्वारा थोपे गए युद्ध में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
मुजतबा खामेनेई को 9 मार्च 2026 को ईरान की एक्सपर्ट्स असेंबली ने सुप्रीम लीडर  नियुक्त किया था। यह नियुक्ति उनके पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की युद्ध की शुरुआत में हत्या (28 फरवरी) के बाद हुई थी। नियुक्ति के बाद से मुजताबा एक भी बार सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, न ही कोई वीडियो संदेश जारी किया है।
इस अनुपस्थिति ने उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और वास्तविक सत्ता संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की कोशिश की है, जिससे संकेत मिलता है कि वे जीवित हैं, लेकिन उनके सक्रिय रूप से देश का संचालन करने का कोई ठोस सबूत नहीं है। एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी ने एक्सियोस को बताया, "हमारे पास कोई सबूत नहीं है कि वास्तव में वही आदेश दे रहे हैं।" 
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अनुपस्थिति के कारण और अटकलें

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी यह अनुपस्थिति मुख्य रूप से सुरक्षा कारणों से है, क्योंकि युद्ध के दौरान सर्वोच्च नेता का सार्वजनिक प्रकट होना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, फारसी नववर्ष नौरोज (Nowruz) के दौरान पारंपरिक लाइव संबोधन की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय केवल एक लिखित बयान और कुछ तस्वीरें जारी की गईं, जिससे अटकलें और बढ़ गईं।
मुजतबा ने ईद अल-फित्र और नौरोज के अवसर पर एक वीडियो के बजाय लिखित संदेश जारी किया, जिसे ईरानी राज्य टेलीविजन पर पढ़ा गया। इस संदेश में उन्होंने अमेरिका-इसराइल हमलों को खारिज करते हुए कहा, "यह युद्ध इस भ्रम के साथ हुआ कि यदि व्यवस्था के प्रमुख और कई प्रभावशाली सैन्य व्यक्तियों को शहीद कर दिया जाए, तो लोगों में डर और निराशा पैदा हो जाएगी, और इस तरह ईरान पर कब्जा करने और उसे तोड़ने का सपना साकार हो जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "पिछले एक साल में हमारे लोगों ने तीन सैन्य और सुरक्षा युद्धों का सामना किया है।" उन्होंने दावा किया कि जून में पहले युद्ध में दुश्मन ने सोचा था कि लोग इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेंकेंगे, लेकिन लोगों की सतर्कता और इस्लामी लड़ाकों की बहादुरी से दुश्मन में हताशा के संकेत दिखे।
अली खामेनेई की हत्या 28 फरवरी को हुई थी, जिसके बाद मुजतबा को उत्तराधिकारी बनाया गया। खुफिया एजेंसियां उनके ठिकाने का पता लगाने में जुटी हैं, क्योंकि उनकी अनुपस्थिति से ईरान की युद्ध नीति और प्रतिक्रिया पर असर पड़ सकता है। ईरानी पक्ष ने दावा किया है कि यह युद्ध अमेरिका-इसराइल की ओर से व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश थी, लेकिन जनता की एकजुटता से यह विफल हुई।
ईरानी सरकार ने किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या विदेश में इलाज की अफवाहों को खारिज किया है। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मुजतबा रूस में इलाज करा रहे हैं, लेकिन ईरान के रूस में राजदूत ने इसे सिरे से नकार दिया।
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वर्तमान में स्थिति यह है कि मुजतबा खामेनेई ईरान में ही हैं, लेकिन अत्यधिक सुरक्षित स्थान पर छिपे हुए हैं और सीमित कम्युनिकेशन के साथ काम कर रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति ने वैश्विक स्तर पर ईरान की लीडरशिप पर सवाल उठाए हैं कि आखिर ईरान का नेतृत्व कौन कर रहा है, जबकि युद्ध जारी है।