चीन यात्रा पर पहुँचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत में शीन जिनपिंग के नहीं पहुँचने पर सोशल मीडिया पर इतना हंगामा क्यों मचा है? चीन का राजनयिक प्रोटोकॉल तो कुछ और ही कहता है।
अमेरिका से चलकर डोनाल्ड ट्रंप चीन पहुँच गए, लेकिन शी जिनपिंग उनसे मिलने घर से निकलकर एअरपोर्ट भी नहीं पहुँच पाए! सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही कहते हुए लोग सवाल उठा रहे हैं और तंज कस रहे हैं कि ट्रंप को शी जिनपिंग भाव नहीं दे रहे हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? शी जिनपिंग ट्रंप का अनमने ढंग से स्वागत कर रहे हैं, या फिर चीन का कुछ राजनयिक नियम ही ऐसा है?
इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह ट्रंप की चीन यात्रा के बारे में जान लें। ट्रंप बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे। यहां उनका दो दिन का आधिकारिक दौरा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद एअरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत करने नहीं आए। इसके बजाय चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने उन्हें रिसीव किया। यह बात काफी चर्चा में है, खासकर जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव और ईरान मुद्दा गर्म है।
ट्रंप एअर फोर्स वन विमान से उतरे। उनके साथ कई बड़े बिजनेसमैन भी आए, जिनमें टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क और एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग भी शामिल हैं। एअरपोर्ट पर रेड कार्पेट बिछाया गया था। सैकड़ों युवा अमेरिकी और चीनी झंडे लहरा रहे थे। वे 'स्वागत, स्वागत, गर्मजोशी से स्वागत!' के नारे लगा रहे थे। मिलिट्री बैंड बज रहा था। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर यह वायरल हो गया कि आख़िर ट्रंप का स्वागत करने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग क्यों नहीं आए?
शी जिनपिंग एअरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे?
चीनी राजनयिक प्रोटोकॉल के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति आमतौर पर विदेशी नेता का एअरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत नहीं करते। 2017 में जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति के रूप में चीन आए थे, तब भी शी जिनपिंग खुद एअरपोर्ट नहीं गए थे। उस समय स्टेट काउंसलर यांग जिएची ने स्वागत किया था। इस बार उपराष्ट्रपति हान झेंग ने स्वागत किया, जो 2017 से ज्यादा बड़ा पद है।
अमेरिकी डिप्लोमेसी एक्सपर्ट इसाबेल व्लादोइउ ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि 'चीनी प्रोटोकॉल में रैंक कभी संयोग नहीं होता।' उपराष्ट्रपति का आना दिखाता है कि चीन इस यात्रा को ज्यादा अहम मान रहा है। हान झेंग ट्रंप के पिछले साल के उद्घाटन समारोह में भी गए थे, जो चीन की तरफ से सम्मान का संकेत माना जा रहा है।
पुतिन के लिए भी कभी एअरपोर्ट नहीं पहुँचे
शी जिनपिंग ने आमतौर पर एअरपोर्ट पर किसी विदेशी नेता का व्यक्तिगत स्वागत नहीं किया है। यह चीन की स्थापित डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के अनुसार है। चीनी राष्ट्रपति खुद एअरपोर्ट पर जाकर मेहमान नेताओं का स्वागत नहीं करते। इसके बजाय विदेश मंत्रालय के अधिकारी, उप-प्रधानमंत्री या अन्य उच्च अधिकारी स्वागत करते हैं। अमेरिका तो दूर की बात है, रूस जैसे सबसे क़रीबी देश के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर भी शी का रवैया वैसा ही रहा है।
शी जिनपिंग ने व्लादिमीर पुतिन का एअरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत कभी नहीं किया है। जब पुतिन चीन आते हैं तो उनका स्वागत चीनी अधिकारियों द्वारा एअरपोर्ट पर किया जाता है। शी जिनपिंग बाद में आधिकारिक बैठक या समारोह में मिलते हैं।
रूस और चीन के बीच बहुत करीबी दोस्ती और 'नो लिमिट्स' पार्टनरशिप होने के बावजूद, एअरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत दोनों तरफ से प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं होता। कनाडा, यूरोपीय देशों जैसे अन्य नेताओं के साथ भी चीनी राष्ट्रपति का यही प्रोटोकॉल रहा है। चीन में यह पिछले 30-40 सालों से चला आ रहा रिवाज है।
ट्रंप की यात्रा का मक़सद क्या है?
ट्रंप ने वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले कहा कि मुख्य मुद्दा दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध सुधारना है। वे शी जिनपिंग से चीन की अर्थव्यवस्था को बड़े अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए और ज़्यादा खोलने को कहेंगे। ट्रंप ने फेंटेनिल के चीन से आने वाले निर्यात पर भी बात करने की बात कही। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर उन्होंने कहा कि यह मुख्य मुद्दा नहीं होगा और उन्हें चीन की मदद की ज़रूरत नहीं है। फिर भी उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ईरान मुद्दे पर काफी पॉजिटिव रहे हैं। ट्रंप ने इसे एक्साइटिंग ट्रिप बताया और उम्मीद जताई कि अच्छे नतीजे निकलेंगे।दोनों देशों के बीच क्या तनाव है?
अमेरिका और चीन के बीच पिछले कई सालों से व्यापार युद्ध चल रहा है। टैरिफ, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सेमीकंडक्टर चिप्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं। बाइडेन सरकार ने भी ट्रंप के समय के कई टैरिफ जारी रखे थे। चीन अमेरिका की टेक पाबंदियों की आलोचना करता रहा है, खासकर एडवांस्ड एआई चिप्स पर। वहीं अमेरिका चीन पर फेंटेनिल के केमिकल प्रोडक्ट्स भेजने का आरोप लगाता है। चीन कहता है कि वह इस पर कार्रवाई कर रहा है और सहयोग चाहता है।
ट्रंप के साथ कौन-कौन है?
ट्रंप के साथ बड़े बिजनेस लीडर्स हैं क्योंकि उनकी कंपनियां चीन पर निर्भर हैं। टेस्ला का बड़ा कारखाना शंघाई में है। एनवीडिया के चिप्स चीन में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन अमेरिका ने कुछ एडवांस्ड चिप्स पर पाबंदी लगा रखी है। चीनी मीडिया ने कहा है कि बीजिंग अमेरिका के साथ बेहतर भविष्य चाहता है। दुनिया में अनिश्चितता के बीच स्थिर और निश्चित रिश्ता दोनों देशों के लिए जरूरी है। शी जिनपिंग ताइवान को अमेरिकी हथियार बेचने बंद करने और अक्टूबर में बने व्यापार समझौते को जारी रखने की बात रख सकते हैं। ट्रंप की यह यात्रा उनके पहले कार्यकाल के बाद राष्ट्रपति के रूप में चीन की पहली यात्रा है। मार्च में यह यात्रा तय थी, लेकिन ईरान पर हमलों के बाद टाल दी गई थी। ट्रंप गुरुवार को शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता व्यापार, टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से बात करेंगे।