देश में दलितों पर बढ़ते अत्याचार के बीच सवाल उठ रहा है—दलित नेता चुप क्यों हैं? क्या सवर्ण राजनीति के दबाव में दलित नेतृत्व कमजोर पड़ गया है? सामाजिक न्याय की लड़ाई पर गहराता संकट।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।

























