कहा जाता है कि जब विध्वंस शुरू हुआ तो वहाँ मौजूद पत्रकारों को भगा दिया गया, महिला-पुरुष सभी के साथ बदसलूकी की गई, उन्हें मारा-पीटा गया, उनके कैमरे तोड़ दिए गए और ऐसी सारी रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी गईं जिनसे इन नेताओं की मिलीभगत साबित हो सकती थी।
दरअसल, अचानक कुछ भी नहीं हुआ था और इस जजमेंट को भी अचानक आया फ़ैसला नहीं माना जा सकता है। पिछले साल के अयोध्या फ़ैसले के बाद आये इस जजमेंट से एक तरह से हिंदू ब्रिगेड की जीत न केवल पूरी हो गयी, बल्कि उस पर वैधानिक मुहर भी लग गयी।