बांग्लादेश के आठ गांवों को हाल में आधिकारिक रूप से भारत में मिलाने की एक खबर फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि काजीपुर, हरिदासपुर उत्तर, आनंद पारा,उत्तर आनंदपारा ,गोपालपुर , श्यामनगर, सीमांत रामचंद्रपुर, कृष्णनगर पूर्व और दौलतपुर दियारा को बी एस एफ ने भारत में शामिल कर लिया है। ये गांव भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब, एक संकरी पट्टी में बताए जा रहे हैं। इस इलाके में कई जगह घुमावदार बॉर्डर हैं। इसलिए वो गांव बांग्लादेश में होने के बावजूद भारत की सीमा के भीतर लगते हैं।
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि स्थानीय लोगों और जान प्रतिनिधियों ने “प्रस्ताव” पास करके भारत में शामिल होने का फैसला लिया, और बीएसएफ ने सुरक्षा घेरा आगे बढ़ाकर इन्हें भारत में शामिल कर लिया। ये दावे मुख्य रूप से सनसनीखेज यूट्यूब और फेसबुक चैनलों पर तेजी से फ़ैल रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले को लेकर भारत के बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और बांग्लादेश पुलिस, तथा बांग्लादेश बार्डर गार्ड (बीजीबी) के बीच कई जगहों पर झड़प हो चुकी है।

सच क्या है

हमने फैक्ट चेक करने वाली संस्थाएं जैसे ए एफ पी , बूम , फैक्टली आदि से चेक करके इन वीडियोज की सच्चाई का पता करने की कोशिश की तो मामला कुछ और ही निकला। ये वीडियो और रिपोर्ट पूरी तरह से ग़लत निकलीं। बी एस एफ , भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और यहाँ तक कि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय या बी जी बी और बांग्लादेश पुलिस की किसी भी वेबसाइट पर इस तरह के किसी ख़बर की पुष्टि नहीं की गयी है। यह कैसे हो सकता है कि बांग्लादेश के आठ गांवों पर भारत कब्जा कर ले और बांग्लादेश की कोई प्रतिक्रिया नहीं हो। भारत के मुख्यधारा की मीडिया जैसे इंडिया टुडे , द टाइम्स आफ़ इंडिया और कोलकाता के द टेलीग्राफ़ में भी इस तरह की कोई खबर दिखाई नहीं दी। बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार और प्रथोम आलो में भी इस तरह की कोई ख़बर नहीं मिली। गूगल मैप पर इन नामों के गांव भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। तो फिर ये ख़बरें कहां से आ रही हैं।
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बार्डर फेंसिंग पर विवाद

अधिकृत ख़बरों के अनुसार भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ ने सर्वे और फेंसिंग का काम तेज कर दिया है। बांग्लादेश और भारत के बीच खुली सीमा पर फेंसिंग का काम लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीमा के कुछ क्षेत्रों में फेंसिंग के लिए जमीन देने से इंकार कर दिया था। चर्चा है कि इन्हीं क्षेत्रों से बांग्लादेश के घुसपैठिए नाजायज तरीके से भारत में घुस आते थे। बी जे पी की सरकार बनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बी एस एफ को जमीन देने की घोषणा कर दी। इसके बाद बी एस एफ ने फेंसिंग के लिए जमीन के सर्वे का काम तेज कर दिया। 
इस दौरान कुछ क्षेत्रों में आम नागरिकों, बी एस एफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच मामूली झड़प हो गयी। आजादी के समय भारत और पूर्व पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के बीच सिर्फ़ मैप पर विभाजन कर दिया गया था इसलिए कई जगहों पर स्पष्ट सीमा नहीं बन पायी थी। एकाध इलाक़े में तो एक घर का आधा हिस्सा भारत में तो दूसरा हिस्सा पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश ) में चला गया था। लेकिन 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद सीमा का ज्यादातर विवाद सुलझा लिया गया।

एनक्लेव पर समझौता

भारत - पाकिस्तान के बंटवारे के समय भारत के कुछ गांव पूर्वी पाकिस्तान में तो पूर्वी पाकिस्तान के कुछ गांव भारत की सीमा के भीतर रह गए थे। अंग्रेजों ने देसी रजवाड़ों के भारत या पाकिस्तान में विलय की घोषणा की थी। इन रजवाड़ों की जमीन एक दूसरे की सीमा में थी इसलिए दोनों देशों के कई गांव अपनी सीमा से पूरी तरह कट गए थे। बांग्लादेश बनने के बाद इस समस्या का हल निकालने की कोशिश शुरू हुई। 2015 में भारत-बांग्लादेश लैंड बाउंड्री अग्रीमेंट (एलबीए ) हुआ, जिसके तहत भारत की सीमा में आने वाले बांग्लादेश के 51 एनक्लेव भारत में और बांग्लादेश की सीमा में आने वाले 111 भारतीय एनक्लेव बांग्लादेश को ट्रांसफर कर दिए गए। 
इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी अपनी इक्षा से नागरिकता चुनने और स्थांतरित करने की सुविधा दी गयी। इस बदलाव के लिए भारत और बांग्लादेश की संसद में प्रस्ताव पास किया गया। क़ानून बने। ये कोई दोनों देशों के बॉर्डर गार्डों के बीच का समझौता नहीं है। इस तरह के बदलाव के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन भी करना होता है। हाल फिलहाल बांग्लादेश के 8 गांवों को भारत में मिलाने के लिए इस तरह की कोई प्रक्रिया नहीं हुई है।

कहां से आया विवाद

बॉर्डर पर सर्वे और फेंसिंग के दौरान छोटे मोटे विवाद सामने आए हैं। कुछ जगहों पर एडवर्स पज़ेशन का विवाद भी बताया जा रहा है। इसका मतलब है कि कुछ इलाके जिन पर भारत अपना होने का दावा करता है उस पर बांग्लादेश का कब्जा है। वायरल वीडियो में इस तरह के विवादों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। लेकिन ये विवाद भी बी एस एफ और बी जी बी के स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौता, संसदीय मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रक्रिया का पालन किए बिना ऐसे कब्जे नहीं हो सकते हैं। लेकिन इस तरह के वीडियो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 
इनको देख कर साफ़ लगता है कि ये वीडियो भारत और बांग्लादेश के बीच नफ़रत फैलाने के लिए बनाये जा रहे हैं। 1971 में बांग्लादेश बनाने के बाद सीमा आमतौर पर शांत रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन काल में दोनों देशों के बीच बहुत सारी समस्याएं सुलझा ली गयीं। शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोध का एक दौर शुरू हुआ। इसमें पाकिस्तान समर्थक तत्वों का बड़ा हाथ बताया जाता है। इसके मुखिया मुहम्मद यूनुस थे जिन्हें सरकार का अंतरिम प्रधान बनाया गया था। लेकिन फ़रवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में बी एन पी की सरकार बनने के बाद स्थिति सामान्य हो रही है। फर्जी वीडियो के ज़रिए नफ़रत को बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है।