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आंध्र प्रदेश में बीजेपी जारी रखेगी 'ऑपेरशन लोटस'

बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में 'ऑपरेशन लोटस' शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन के तहत बीजेपी ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के चार राज्यसभा सदस्यों को अपना बना लिया है। यह ऑपरेशन यहीं नहीं रुकने वाला है। अब बीजेपी की नज़र टीडीपी के विधायकों पर है। इसके साथ ही बीजेपी दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों में भी ऑपरेशन लोटस चलाने की तैयारी में है। बता दें कि इस ऑपरेशन की शुरुआत बीजेपी ने कर्नाटक में 2008 में की। हालाँकि शुरुआत में यह बीजेपी के चुनाव प्रचार का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसका नाम जोड़-तोड़ करके सरकार बनाने से जुड़ गया।

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बताया जा रहा है कि बीजेपी के इसी ऑपरेशन के तहत राज्यसभा सांसद वाई. एस. चौधरी, सी.एम. रमेश, गरिकपाटि मोहन राव और टी.जी. वेंकटेश ने टीडीपी का दामन छोड़कर बीजेपी को अपना बना लिया है। इन चारों ने मिलकर टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ बगावत की और न सिर्फ़ बीजेपी में शामिल हुए बल्कि राज्यसभा में टीडीपी दल को ही बीजेपी में विलय करवा दिया। यह सारा घटनाक्रम काफ़ी दिलचस्प रहा। ग़ौर करने वाली बात यह है कि गुरुवार की सुबह तक राज्यसभा में टीडीपी के छह सदस्य थे। इनमें से चार ने मिलकर बग़ावत की और दल बदल लिया। चूँकि ये चारों सांसद मिलकर दो-तिहाई होते हैं, इनके दल बदलने से दल-बदल क़ानून के तहत इनके ख़िलाफ़ कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

पिछले लोकसभा चुनाव और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में टीडीपी की क़रारी हार के बाद से ही बीजेपी की नज़र टीडीपी के सांसदों, विधायकों और दूसरे बड़े नेताओं पर टिकी है।

'सत्य हिन्दी' ने ही सबसे पहले यह ख़बर दी थी कि बीजेपी आंध्र प्रदेश में भी ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने वाली है। बीजेपी की नज़र टीडीपी के असरदार और ताक़तवर नेताओं पर है। अपनी पहली बड़ी कार्रवाई में बीजेपी के रणनीतिकार टीडीपी के चार राज्यसभा सदस्यों को तोड़ने में कामयाब रहे हैं। सबसे पहले राज्यसभा सदस्यों को इस वजह से तोड़ा गया क्योंकि संसद के इस सदन में बीजेपी के पास बहुमत नहीं है। संसद के इसी सत्र के दौरान बीजेपी कई महत्वपूर्ण बिल संसद में पास करवाना चाहती है। बहुमत जुटाने के मक़सद से ही उसने सबसे पहले टीडीपी के राज्यसभा सदस्यों को अपनी ओर खींच लिया है। 

क्या विधायकों को तोड़ पाएगी?

अब बीजेपी की नज़र टीडीपी के विधायकों पर है। 175 सीटों वाली आंध्र प्रदेश विधानसभा में टीडीपी के 23 विधायक हैं। अगर बीजेपी इन 23 में से 16 को तोड़ने में कामयाब हो जाती है तो ये विधायक दल-बदल क़ानून के तहत कार्यवाही से बच जाएँगे। और अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी आंध्र प्रदेश विधानसभा में 16 विधायकों के साथ मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़, बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि टीडीपी के नेताओं का विश्वास अपने नेता चंद्रबाबू नायडू पर से उठ चुका है। ये सभी नेता जानते हैं कि अब आंध्र प्रदेश में टीडीपी का अस्तित्व ख़तरे में है और इसी वजह से इन नेताओं को राजनीतिक छत्रछाया की तलाश है। चूँकि ये सभी नेता अपनी धुर विरोधी वाईएसआर कांग्रेस में नहीं जा सकते हैं, बीजेपी इन्हें अपनी ओर खींच रही है।

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भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने की कोशिश?

इसी बीच कुछ टीडीपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार-धांधली के मामलों से बचने के लिए ही राज्यसभा सदस्य बीजेपी में शामिल हुए हैं। जबकि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस के कुछ नेताओं का आरोप है कि चंद्रबाबू नायडू ने ख़ुद को भ्रष्टाचार के मामलों से बचाने के लिए अपने चार वफ़ादारों को बीजेपी में भिजवाया है। ग़ौर करने वाली बात यह है कि जो चार राज्यसभा सदस्य टीडीपी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं सभी उद्योगपति हैं और चंद्रबाबू के सबसे क़रीबी माने जाते हैं।

बहरहाल, बीजेपी ने सिर्फ़ आंध्र प्रदेश में ही नहीं, बल्कि दक्षिण के सभी पाँचों राज्यों में ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने और दूसरी पार्टियों के ताक़तवर नेताओं को अपना बनाने की ठानी है। आंध्र प्रदेश में वह टीडीपी को ख़त्म कर वाईएसआर कांग्रेस को टक्कर देने की स्थिति में आना चाहती है। तेलंगाना में बीजेपी की नज़र कांग्रेस के दमदार नेताओं पर है।

अरविंद यादव
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