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'बाहुबली' से नाम जुड़ा तो जगन की बहन बोलीं- टीडीपी की चाल

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी की बहन शर्मिला का नाम सुपरहिट फ़िल्म 'बाहुबली' के एक्टर प्रभास से जोड़े जाने से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर शर्मिला और प्रभास को लेकर तरह-तरह की बातें कही और लिखी जा रही हैं। कुछ लोगों ने दोनों के बीच रिश्ते होने की भी बात कही है। शर्मिला ने मीडिया से मुख़ातिब होते हुए कहा है कि उनका प्रभास से कोई संबंध नहीं है। शर्मिला के मुताबिक़, प्रभास से मिलना तो दूर की बात है, उन्होंने कभी उनसे बात भी नहीं की है। 

शर्मिला ने आरोप लगाया है कि चुनाव के मद्देनज़र तेलुगु देशम पार्टी उनकी छवि को ख़राब करने के मक़सद से अफ़वाहें फैला रही है। शर्मिला का कहना है कि अगर वह इन अफ़वाहों पर चुप रहतीं तो लोगों के बीच ग़लत संदेश जा सकता था।

इसी वजह से उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाने और मीडिया के ज़रिये लोगों के सामने सच लाने का फ़ैसला किया। शर्मिला ने हैदराबाद पुलिस कमिश्नर से मिलकर उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर अफ़वाह फैलाने और उनकी छवि को ख़राब करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की है। जब शर्मिला पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुँची थीं तब उनके पति अनिल कुमार भी उनके साथ थे। हैदराबाद पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने शर्मिला की शिकायत पर मामला दर्ज़ कर जाँच शुरू कर दी है।

ग़ौर करने वाली बात यह भी है कि साल 2014 में भी ठीक चुनावों से पहले शर्मिला का नाम एक फ़िल्म स्टार से जोड़ा गया था। उस समय शर्मिला वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में काफ़ी सक्रिय थीं। उस समय भी शर्मिला ने अफ़वाहों का ज़ोरदार तरीक़े से खंडन किया था और पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाई थी। उस समय पुलिस ने सोशल मीडिया पर शर्मिला के ख़िलाफ़ पोस्ट लिखने वालों के ख़िलाफ़ मामले भी दर्ज़ किए थे। कुछ लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई थी। उस समय भी शर्मिला ने तेलुगु देशम पार्टी पर ही आरोप लगाए थे। लेकिन आंध्र प्रदेश चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की हार के बाद धीरे-धीरे मामला ख़त्म हो गया और शर्मिला से जुड़े पोस्ट भी सोशल मीडिया पर कम हो गए।

शिकायत दर्ज़ करवाई

ख़ुद शर्मिला भी राजनीति से दूर रहीं। लेकिन फिर चुनाव के नज़दीक आते ही शर्मिला के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर तरह-तरह की ख़बरें आने लगीं। प्रभास से उनका नाम फिर से जोड़ा जाने लगा। इस बार भी शर्मिला ने मामले को गंभीरता से लिया और अफ़वाहों का खंडन करने के अलावा पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवा दीं। उधर, तेलुगु देशम पार्टी के नेता और आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाने को लेकर शर्मिला की आलोचना की है। 

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पलटवार किया कि जब शर्मिला और उनके भाई जगन को आंध्र प्रदेश की पुलिस पर भरोसा ही नहीं है तो वह आंध्र से चुनाव लड़ने की सोच भी कैसे सकते हैं?

तेलुगु देशम पार्टी इस बात से साफ़ इनकार कर रही है कि शर्मिला के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में आ रहे पोस्ट के पीछे उसका हाथ है। बड़ी बात यह भी है कि इन दिनों सोशल मीडिया में तरह-तरह के पोस्ट आ रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर जंग

चूँकि आंध्र में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं, सभी राजनीतिक पार्टियाँ और सभी प्रमुख नेता भी सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय हैं। 

  • ज़मीन पर राजनीतिक जंग जितनी तेज़ और तीखी है, सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक पार्टियों के बीच जंग उतनी ही तगड़ी, तीखी और ‘गला-काट’ है। 

राजनेताओं के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने या फिर दूसरे से बड़ा साबित करने की होड़ मची हुई है। राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं ने एक नहीं, बल्कि कई लोगों, कई एजेंसियों को अपने सोशल मीडिया चलाने के लिए किराये पर रखा हुआ है। राजनेता जान चुके हैं कि मोबाइल के दौर में सोशल मीडिया में पिछड़ने का मतलब राजनीतिक लड़ाई में हार मान लेना है। सभी नेता और पार्टियाँ सोशल मीडिया की ताक़त को जान चुकी हैं। यही वजह है कि शर्मिला ने भी समय गँवाए बग़ैर सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ शुरू की गई अफ़वाहों पर विराम लगाने को प्राथमिकता दी। अब सभी की नज़र इसी पर है कि हैदराबाद पुलिस की जाँच में क्या निकल कर सामने आता है।

  • सभी यही जानने को इच्छुक हैं कि शर्मिला और प्रभास का नाम जोड़कर दोनों के ख़िलाफ़ किसने अफ़वाहें उड़ाने की कोशिश की, क्या इस कोशिश के पीछे कोई राजनीतिक चाल या साजिश है? क्या तेलुगु देशम पार्टी पर लगाये शर्मिला के आरोप सही हैं?

शर्मिला आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. वाई. एस. राजशेखर रेड्डी की बेटी हैं। शर्मिला के भाई जगन मोहन रेड्डी अपने पिता की मौत के बाद कांग्रेस से अलग हो गए थे और वाईएसआर कांग्रेस के नाम से अपनी पार्टी बना ली थी। 2014 में जगन की पार्टी ने तेलुगु देशम पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के गठजोड़ को कड़ी टक्कर दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों की राय में पिछले साढ़े चार सालों में जगन और भी मज़बूत नेता के रूप में उभरे हैं और इस बार आंध्र में मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार हैं।

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अरविंद यादव
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