अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य में चीनी सैन्य अतिक्रमण की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर प्रभावी ढंग से गश्त कर रही है और देश की सीमाओं की मुस्तैदी से रक्षा कर रही है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण का कोई संकेत नहीं है; भारतीय सेना सीमांत क्षेत्रों में प्रभावी गश्त कर रही है और भारतीय क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रख रही है।"

केंद्र ने जारी किया अरुणाचल का नया आधिकारिक नक्शा

मुख्यमंत्री का यह बयान भारत सरकार द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 27 महत्वपूर्ण स्थानों को 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' (Survey of India) के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक और पारंपरिक नामों के साथ चिह्नित करने के ठीक एक दिन बाद आया है। सरकार के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य: इन स्थानों की सटीक और सही पहचान सुनिश्चित करना। आम जनता के बीच इनके भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
विदेश मंत्रालय और भारत सरकार ने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने के प्रयासों को लगातार "व्यर्थ और हास्यास्पद" (Vain and Preposterous) करार दिया है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान और ऐतिहासिक स्थल

आधिकारिक नक्शे में शामिल किए गए कई स्थान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो एलएसी (LAC) के करीब हैं या 1962 के भारत-चीन युद्ध व सैन्य झड़पों का हिस्सा रहे हैं:

  • लॉन्ग जू (Long Ju): भारत और चीन के बीच शुरुआती विवादित बिंदुओं में से एक। 1962 के युद्ध से तीन साल पहले, 1959 में चीनी सैनिकों ने यहाँ घुसपैठ की थी।

  • थाग ला (Thag La): उच्च ऊंचाई वाला दर्रा, जहाँ 1962 के भारत-चीन युद्ध की शुरुआती लड़ाइयों में से एक लड़ी गई थी।

  • माजा गांव (Maja Village): ऊपरी सुबनसिरी जिले में लॉन्ग जू के पास स्थित।

  • महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे (Passes): जो ला (Dzo La), रिज़ा ला (Riza La) और पुकुर ला (Pukur La)।

  • जयरामपुर (Jairampur): चांगलांग जिले का यह शहर पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में कार्य करता है।

मानचित्र में जोड़े गए अन्य प्रमुख स्थान

उच्च ऊंचाई वाली झील: सांभो सरोवर। स्मारक व ऐतिहासिक स्थल: जसवंत गढ़, शेर-ए-थापा मेमोरियल, बुद्धमंदिर। अन्य क्षेत्र व गांव: बीसा गांव, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रितनगर, तेरितनगर, रामनगर, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपक, बड़ा रोपक, शिवाजी नगर, सुनापुरा और कमलांग नगर।

चीन के 'नामकरण राजनीति' का इतिहास

चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना बेबुनियाद दावा जताने के लिए इसे 'ज़ैंगनान' (Zangnan) कहता है। चीन ने अब तक तीन बार इन क्षेत्रों के नाम बदलने की कोशिश की है:

2017: पहली बार 6 स्थानों के चीनी नाम जारी किए।

2021: 15 स्थानों की दूसरी सूची जारी की।

2023: 11 स्थानों की तीसरी सूची जारी की।
भारत ने चीन की इन कोशिशों को "काल्पनिक नाम गढ़ने" की नीति करार देते हुए खारिज कर दिया है और चेतावनी दी है कि इस तरह के जमीनी हकीकत से परे कदम द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाते हैं।