असम में जीत का हैट्रिक लगाने का सपना देखने वाली भाजपा इस बार ध्रुवीकरण के सहारे मैदान में है। दूसरी ओर, उसे चुनौती देने वाली कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के कथित भ्रष्टाचार को अपना हथियार बनाया है।
मुख्यमंत्री हिमंता लंबे समय से मियां मुसलमानों के खिलाफ मुखर रहे हैं। चुनाव की घोषणा से ठीक पहले राजधानी गुवाहाटी में आयोजित एक कॉन्क्लेव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने कहा था कि सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश से घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा। हिमंता ने भी कहा है कि उनकी सरकार के सत्ता में लौटने के बाद सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले बांग्लादेशियों के खिलाफ बुलडोजर उतारेगी।
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दूसरी ओर, कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ सत्तारूढ़ पार्टी के आक्रामक बयानों के अलावा मुख्यमंत्री के कथित भ्रष्टाचार को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री रहने के दौरान हिमंता के खिलाफ पीपीई किट से लेकर सारदा चिटफंड घोटाले में शामिल होने तक कई आरोप लगे थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगते रहे हैं।

सीएम की पत्नी पर भी आरोप

मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि अब तक कहीं कुछ साबित नहीं हो सका है। लेकिन विपक्षी दलों का दावा है कि सरकार में रहने के कारण ही ऐसे आरोप साबित नहीं हो सके हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति रखने का भी आरोप लगाया है। रिनिकी भुइयां एक मीडिया संस्थान की मालकिन हैं। विपक्ष का आरोप है कि पति के मुख्यमंत्री होने की वजह से पत्नी की संस्था को कई सहूलियतें दी गई हैं।

हिमंता की अस्थाई संपत्ति बीते पांच साल में 60 लाख से कुछ ज्यादा बढ़ कर 2.36 करोड़ है। लेकिन पत्नी की संपत्ति पति के मुकाबले पंद्रह गुनी ज्यादा है। हलफनामे के मुताबिक दोनों की साझा संपत्ति करीब 35 करोड़ है।

राज्य में वर्ष 2023 में सीटों के परिसीमन के बाद पहली बार कोई चुनाव हो रहा है। परिसीमन के कारण राज्य में मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 29 से घट कर 22 रह गई है। यानी वैसी सात सीटें घट गई हैं जहां तत्कालीन पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से आने वाले मुसलमान निर्णायक स्थिति में हो सकते थे।

चुनाव हिमंता के लिए अग्निपरीक्षा

वर्ष 2021 का विधानसभा चुनाव उस समय मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में हुआ था। इस लिहाज से यह चुनाव हिमंता सरमा के लिए अग्निपरीक्षा है। यह सही है कि विभिन्न वजहों से कांग्रेस हाल के वर्षों में कुछ कमजोर हुई है। उसके कई नेता पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। लेकिन इस सप्ताह उल्टी गंगा भी बही है। हिमंता मंत्रिमंडल में खेल व युवा कल्याण मंत्री नंदिता कांग्रेस में शामिल हो गई हैं।
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कांग्रेस के कमजोर होने के बावजूद बीजेपी सांसद में है। उसे जीत के लिए अरुणोदय और लखपति बाइदेव जैसी महिला कल्याण योजनाओं पर निर्भर करना पड़ रहा है। इन योजनाओं के तहत हर महीने महिलाओं के बैंक खाते में पैसे भेजे जाते हैं।
बीजेपी अपने चुनावी गणित के मुताबिक़ प्रतिद्वंद्वियों से आगे है। दूसरी ओर, कांग्रेस को उम्मीद है कि अखिल गोगोई के राइजोर दल और दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन के जरिए वह चुनाव में भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है।