असम के नगाँव ज़िले में एक व्यक्ति ने एक ही बूथ के 64 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई और कुछ को ‘मृत’ बताया, जबकि वे ज़िंदा हैं। आख़िर ये कौन कर रहा है और कौन निशाने पर? पढ़ें रिपोर्ट।
असम में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ग़ज़ब ही खेल हो गया! नगांव जिले के एक बूथ का ही हाल पढ़ेंगे तो चौंक जाएँगे। एक शख्स ने 64 वोटरों के नाम काटने के लिए आपत्ति दर्ज करा दी। इसमें कई लोगों को मृत बता दिया। यहाँ तक कि बीएलओ को भी मृत बताकर नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई गयी। नोटिस मिलने के बाद कई लोगों ने खुद को ज़िंदा बताया है और आपत्ति दर्ज कराने वाले पर नाम काटने की साज़िश का आरोप लगाया है।
दरअसल, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की तर्ज पर असम में विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल रिवीजन यानी वोटर लिस्ट की विशेष संशोधन प्रक्रिया चल रही है। इसमें बड़ा हंगामा मचा हुआ है। नगांव जिले के नगांव-बतद्राबा विधानसभा क्षेत्र में एक ही व्यक्ति ने एक ही पोलिंग बूथ के 64 वोटरों पर आपत्ति दर्ज कराई है। आपत्ति का कारण ज़्यादा मामलों में 'मौत' बताया गया है। लेकिन कई लोग कह रहे हैं कि वे जिंदा हैं।
मुस्लिम निशाने पर हैं?
पिछले शुक्रवार को रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हाफिजुद्दीन अहमद को नोटिस मिला। द इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर दी है कि नोटिस में कहा गया कि उनके नाम को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई गई है कि वह 'मर चुके' हैं। उन्हें उसी दिन सुनवाई के लिए बुलाया गया। हाफिजुद्दीन नगांव शहर में रहते हैं। वे जल्दी से दस्तावेज लेकर ऑफिस पहुंचे। उन्होंने वोटर आईडी दिखाई और कहा कि वे पहले पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में काम करते थे, इसलिए वहां के अफसर उन्हें जानते हैं। अफसरों ने चेक किया और कहा कि सब ठीक हो जाएगा।
यह सिर्फ हाफिजुद्दीन की बात नहीं है। दर्जनों लोगों को ऐसे ही नोटिस मिले हैं। इनमें से ज़्यादातर आपत्तियां एक ही व्यक्ति बिशल रॉय ने दर्ज कराई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नगांव-बतद्राबा में बिशल रॉय ने एक ही बूथ के 64 लोगों पर आपत्ति लगाई है। इसमें बूथ लेवल ऑफिसर यानी नुरुद्दीन अहमद और उनकी पत्नी का नाम भी शामिल है। बीएलओ ने अंग्रेज़ी अख़बार से कहा, 'मुझे नहीं पता यह व्यक्ति कौन है। वह किसी राजनीतिक पार्टी का बूथ लेवल एजेंट नहीं है। मुझे सिर्फ लिस्ट मिली है जिसमें आपत्ति करने वाले का नाम है।'
रिपोर्ट के अनुसार एक पड़ोसी जावेद अख्तर को दो नोटिस मिले। एक उनके 80 साल के बीमार ससुर अजिरुद्दीन अहमद के लिए, दूसरा उनकी पत्नी फरहाना यास्मिन के लिए। एक नोटिस में 'मौत' और दूसरे में 'शिफ्ट हो गए' का कारण बताया गया। 77 साल के रिटायर्ड प्रोफेसर अब्दुल सलाम और उनकी पत्नी के नाम के ख़िलाफ़ भी 'मौत' की आपत्ति लगाई गई है। रिपोर्ट है कि वे पश्चिम बंगाल घूमने गए थे तो उनका बेटा सुनवाई में जाना चाहा, लेकिन कहा गया कि खुद आना होगा। वे गुरुवार को नगांव पहुंचकर ऑफिस जाएंगे।
सुनवाई क्यों रोकी?
इन आपत्तियों से नगांव जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों बरहमपुर, नगांव-बतद्राबा और राहा में पब्लिक हियरिंग रोक दी गई है। मंगलवार शाम को जिला कमिश्नर और जिला चुनाव अधिकारी देवाशीष शर्मा ने नोटिस जारी किया। कहा गया कि जनता की शिकायतों के कारण सुनवाई आगे के आदेश तक रोक दी जाती है। प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई योग्य वोटर बाहर नहीं होगा।
शर्मा ने कहा कि सुनवाई रोकने का मुख्य कारण छोटे हियरिंग सेंटर में बड़ी भीड़ को संभालने में दिक्कतें आना भी है। सुविधाएँ बेहतर होने पर फिर सुनवाई शुरू होगी। उन्होंने माना कि एक साथ बहुत सारी और झूठी आपत्तियां आ रही हैं। चुनाव आयोग किसी को भी आपत्ति करने की अनुमति देता है, लेकिन वे जांच करते हैं। कुछ राजनीतिक एजेंट, कुछ ज्यादा उत्साही लोग या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण ऐसा कर सकते हैं। झूठी आपत्ति करने वालों को सजा मिलेगी।
ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष इम्तियाज हुसैन ने कहा कि नगांव का आदेश प्रक्रिया में खामी होने का कबूलनामा है। वे सभी जिलों में ज्ञापन दे रहे हैं।
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि झूठी, गुमराह करने वाली या परेशान करने वाली आपत्ति दर्ज कराने वालों पर पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई होगी। बता दें कि फॉर्म 7 भरकर कोई भी वोटर आपत्ति कर सकता है, लेकिन झूठ बोलने पर 1 साल जेल या जुर्माना हो सकता है।
लखीमपुर जिले में भी ऐसी ही शिकायतें
लखीमपुर जिले में भी इसी तरह की शिकायतों पर डीसी ने नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा कई वोटरों पर आपत्ति गैरकानूनी है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग के बाद नगांव डीसी को आदेश दिया गया। सात सीनियर आईएएस ऑफिसर जिलों में हैं। वे पार्टियों से बात कर रहे हैं और प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।असम में स्पेशल रिवीजन की स्थिति
असम में विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल रिवीजन की प्रक्रिया चल रही है। बीएलओ घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करते हैं। अब तक 4.78 लाख मृत वोटरों को हटाने की पहचान हुई है। 5.23 लाख शिफ्टेड और 53,619 डुप्लिकेट एंट्री सुधारने हैं। दावे और आपत्तियों का समय गुरुवार को ख़त्म हो रहा है। 2 फरवरी तक डिस्पोज करना है। फाइनल लिस्ट 10 फरवरी को आएगी।
यह मामला वोटर लिस्ट की साफ-सफाई के नाम पर गड़बड़ी के आरोपों को बढ़ावा दे रहा है। विपक्ष कह रहा है कि इससे वैध वोटरों को बाहर करने की कोशिश हो रही है। प्रशासन कह रहा है कि जांच हो रही है और कोई योग्य वोटर नहीं हटेगा।