असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने दावा किया है कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे। इस बयान से असम की राजनीति में हलचल तेज। कांग्रेस नेताओं के मनाने के बाद भी क्यों नहीं माने?
भूपेन बोरा और हिमंता सरमा।
असम के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा शीर्ष नेताओं के मानाने के बाद भी नहीं माने? असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने अब दावा किया है कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह दावा किया। हिमंता सरमा मंगलवार को ही दिन में गुवाहाटी के घोरामारा इलाके में भूपेन बोरा के घर जाकर उनसे मुलाकात की। सरमा के उनके घर पहुँचने पर उनकी पत्नी और बेटे ने 'आरती' से स्वागत किया।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'भूपेन बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे। इसके सारे इंतजाम असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया करेंगे। उनके साथ कई अन्य कांग्रेस नेता भी गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर में भाजपा में शामिल होंगे।'
सरमा ने भूपेन बोरा को कांग्रेस में आखिरी मान्यता प्राप्त हिंदू नेता बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहले ही उनकी सदस्यता को मंजूरी दे दी है और उनका स्वागत किया है। भूपेन बोरा को पार्टी में पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी। सरमा ने कहा, 'भाजपा में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा, क्योंकि यहां ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पिता ने कभी कोई बड़ा पद नहीं संभाला।'
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भूपेन बोरा ने कांग्रेस में लंबे समय तक संघर्ष किया है। अब बीजेपी में उन्हें वह मंच मिलेगा जहां वे जो चाहें, वह कर सकेंगे।
बोरा के घर हिमंता का 'आरती' से स्वागत
इससे पहले मंगलवार को दिन में हिमंत सरमा ने गुवाहाटी के घोरामारा इलाके में भूपेन बोरा के घर जाकर उनसे मुलाकात की। बोरा की पत्नी और बेटे ने मुख्यमंत्री का 'आरती' करके स्वागत किया। यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली।
बता दें कि सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की और इस्तीफा वापस लेने के लिए कहा, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने सोचने के लिए कुछ समय मांगा, लेकिन अब फैसला पक्का हो गया है।पहले भी हिमंता सरमा ने कहा था कि भाजपा के दरवाजे भूपेन बोरा के लिए खुले हैं। अगर वे शामिल होते हैं तो उन्हें विधानसभा चुनाव में सुरक्षित सीट से जिताने में मदद की जाएगी।
भूपेन बोरा कौन हैं?
55 साल के भूपेन बोरा 1994 से कांग्रेस में जुड़े। वह 2006-2016 तक बिहपुरिया सीट से दो बार विधायक रहे हैं। असम प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के तौर पर 2021 से जून 2025 तक रहे। इसके बाद गौरव गोगोई अध्यक्ष बने हैं। बोरा के अध्यक्ष रहते असम कांग्रेस को कई हार मिलीं। कई नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ गए।
बोरा का मुख्य काम था भाजपा विरोधी क्षेत्रीय गठबंधन बनाना। इसमें राइजोर डॉल, असम जतियो परिषद, सीपीआई, सीपीआई(एम) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस जैसे दल शामिल थे। 2024 लोकसभा चुनाव में यह गठबंधन सफल रहा, लेकिन उप-चुनाव में सीट बंटवारे पर समस्या आई। अन्य दल कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं कि केंद्रीय लीडरशिप उन्हें जगह नहीं देती।
हाल ही में गौरव गोगोई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन बोरा का इन पार्टियों से अच्छा रिश्ता है। इसलिए पिछले हफ्ते उन्हें गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन कुछ दिनों में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लगता है उन्हें सीमित भूमिका मिलने से नाराजगी हुई।
बहरहाल, यह घटना असम में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। बोरा के जाने से संगठन और गठबंधन पर असर पड़ सकता है। वे क्षेत्रीय दलों से अच्छे संपर्क रखते हैं। यह घटना असम की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। भाजपा इसे अपनी ताकत बढ़ाने का मौका बता रही है। 22 फरवरी को गुवाहाटी में उनका औपचारिक शामिल होना होगा, जहां कई नेता मौजूद रहेंगे।