loader
प्रतीकात्मक तसवीर।

असमिया टीवी सीरियल ‘‘बेगम जान’’ पर लगे प्रतिबंध को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने किया रद्द

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुरूवार को असम के टीवी सीरियल ‘‘बेगम जान’’ पर पुलिस की ओर से लगाए गए प्रतिबंध को रद्द कर दिया है। जस्टिस सुमन श्याम वाली एक सदस्यीय बेंच ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में बिना प्रभावित पक्ष को सुने और केबल टीवी नेटवर्क (रेग्युलेशन) एक्ट, 1994 का पालन किए बिना ही कार्रवाई कर दी गई। 

गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने  24 अगस्त के एक आदेश में कहा था कि "बेगम जान" पर दो महीने का प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस ने तर्क दिया था कि इसने समाज के एक वर्ग की धार्मिक भावना को आहत किया है।

ताज़ा ख़बरें

गुप्ता ने पत्र में लिखा था, "आरोप है कि सीरियल "बेगम जान" ने समाज के कुछ वर्गों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और सीरियल में किसी धर्म और समाज के खंड और अवमानना ​​के दृश्य या शब्द शामिल हैं और इससे हिंसा को प्रोत्साहित करने या उकसाने की संभावना पैदा होती है।"

कानून-व्यवस्था की समस्या का हवाला

आदेश में कहा गया था कि शिकायतों को केबल अधिनियम के तहत जिला स्तरीय निगरानी समिति के समक्ष रखा गया था। "समिति ने विचार-विमर्श और सीरियल "बेगम जान" की वीडियो क्लिप को देखने के बाद भारी बहुमत के साथ निर्णय किया है कि उपरोक्त सीरियल केबल टीवी नेटवर्क नियम, 1995 के नियम 6 में निर्धारित कार्यक्रम कोड का उल्लंघन करता है। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि इस सीरियल ने समाज के कुछ वर्गों की धार्मिक भावना को आहत किया है। अगर सीरियल का प्रसारण तत्काल प्रभाव से बंद नहीं किया जाता तो समाज में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है।” 

गुवाहाटी पुलिस आयुक्त गुप्ता ने मीडिया को बताया कि 2 अगस्त को रेंगोनी टीवी चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और एक महीने के भीतर जवाब मांगा गया था। गुप्ता ने अपने आदेश में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 19 को लागू करने की बात कही थी, जो "जनहित में कुछ कार्यक्रमों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति" से संबंधित है। 

‘‘बेगम जान’’ के ख़िलाफ़ दक्षिणपंथी संगठन हिन्दू जागरण मंच, ऑल असम ब्राह्मण यूथ काउंसिल, यूनाइटेड ट्रस्ट ऑफ़ असम और गुनजित अधिकारी नामक एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई थी।
दक्षिणपंथी संगठन एक महीने से अधिक समय से इस शो का विरोध करते हुए यह आरोप लगा रहे हैं कि यह सीरियल "लव-जिहाद" को बढ़ावा देता है। 

शूटिंग अस्थायी रूप से बंद 

सीरियल की शूटिंग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। हालांकि इसके निर्माता इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ अदालत जाने की योजना बना रहे हैं। "बेगम जान" सीरियल में प्रमुख भूमिका निभाने वाली प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति कोकंगाना ने कहा है कि जिन लोगों ने शो को "अपमानजनक" माना है, वे उन्हें बलात्कार और हत्या की ऑनलाइन धमकी देते रहे हैं। उन्होंने इस सीरियल पर "लव-जिहाद" को बढ़ावा देने के आरोप का खंडन करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक हिंदू महिला की कथा है जो संकट से उबरने के लिए एक मुसलिम व्यक्ति की मदद लेती है। 

असम से और ख़बरें

रेंगोनी टीवी पर तीन महीने पहले इस सीरियल का टेलीकास्ट होने के तुरंत बाद सीरियल को लेकर विवाद शुरू हो गया था। दक्षिणपंथी संगठन हिंदू जनजागृति समिति ने शो के ख़िलाफ़ एक अभियान शुरू किया, जिसमें दावा किया गया कि इस शो के जरिये "लव-जिहाद" को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

आरोप पूरी तरह निराधार

रेंगोनी चैनल चलाने वाले एएम टेलीविज़न के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजीव नारायण ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने कहा, “सिर्फ इसलिए कि एक मुसलिम युवक और हिंदू युवती सीरियल के प्रमुख किरदार हैं, वे यह सब कह रहे हैं। अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए वे ये आरोप लगा रहे हैं।” 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
दिनकर कुमार
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

असम से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें