कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज एफआईआर मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ‘आपने राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष महिला को घसीटा’। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना ज़रूरी है।

जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की एकल पीठ ने अपने 9 पन्नों के आदेश में कहा कि पवन खेड़ा ने राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए एक ‘निर्दोष महिला’ को विवाद में घसीटा। अदालत ने साफ़ किया कि अगर आरोप सीधे मुख्यमंत्री पर लगाए जाते तो इसे राजनीतिक बयानबाज़ी माना जा सकता था, लेकिन उनकी पत्नी को इसमें शामिल करना गंभीर मामला है।
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'केवल मानहानि नहीं, गंभीर आरोप'

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला केवल साधारण मानहानि का नहीं है। अदालत के अनुसार, पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई साबित नहीं हुई है। खेड़ा यह साबित नहीं कर पाए कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं या उन्होंने अमेरिका में कोई कंपनी खोलकर भारी निवेश किया है।

कस्टोडियल पूछताछ को बताया जरूरी

अदालत ने इस मामले में ‘कस्टोडियल इंटरोगेशन’ यानी हिरासत में पूछताछ को ज़रूरी बताया। कोर्ट के अनुसार, यह जानना ज़रूरी है कि वे लोग कौन थे जिन्होंने पवन खेड़ा को कथित दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिनके आधार पर ये आरोप लगाए गए।

रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल, अपमान और मानहानि जैसी धाराएं शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट में क्या हुआ था?

इस मामले में पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में पेश हो सकें। हालांकि, असम पुलिस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

इसके बाद 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इस रोक को हटाने की मांग की थी। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत बढ़ाने की अपील भी ठुकरा दी।
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'असम की अदालत में जाएँ'

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ़ किया है कि अगर पवन खेड़ा असम के अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं तो उनके मामले पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बयानबाज़ी और व्यक्तिगत आरोपों की सीमा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अदालत के सख्त रुख से साफ संकेत है कि सार्वजनिक जीवन में आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।