असम के कोकराझार जिले में दो लोगों की मौत के बाद हिंसा भड़क गई है। यहां भीड़ ने हमला किया, आगजनी हुई और बोडो तथा आदिवासी समुदायों के बीच झड़पें हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील इलाकों में सेना तैनात कर दी गई है। पूरे कोकराझार जिले में निषेधाज्ञा लगा दी गई है। सावधानी के तौर पर कोकराझार और चिरांग जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

घटना की शुरुआत 19 जनवरी की रात को हुई। करीगांव थाना क्षेत्र के मानसिंह रोड पर एक स्कॉर्पियो गाड़ी में तीन बोडो व्यक्ति सवार थे। गाड़ी ने दो आदिवासी व्यक्तियों को टक्कर मार दी। इसके बाद पड़ोसी आदिवासी गांववालों ने उन तीन बोडो व्यक्तियों पर हमला कर दिया और गाड़ी को आग लगा दी। एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे घायल व्यक्ति की 20 जनवरी को मौत हो गयी। बाकी का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

बोडो और आदिवासी में झगड़ा

मंगलवार को स्थिति और बिगड़ गई। बोडो और आदिवासी दोनों समुदायों के लोगों ने करीगांव थाना के पास नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर दिया। उन्होंने टायर जलाए, एक सरकारी कार्यालय को आग लगा दी और करीगांव पुलिस चौकी पर हमला किया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई लोग घायल हुए, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार सेना के चार कॉलम कोकराझार जिले में तैनात हैं। मंगलवार रात को सेना के जवान जिला प्रशासन के साथ करीगांव और आसपास के इलाक़ों में गश्त कर रहे थे।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही कहा था कि सेना तैनात करने की व्यवस्था है। रैपिड एक्शन फोर्स पहले से ही मौके पर है। कोकराझार और पड़ोसी चिरांग जिले में सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

जिला प्रशासन ने करीगांव हाई स्कूल और ग्वाजनपुरी अमनपारा हाई स्कूल में दो राहत शिविर बनाए हैं। कई गांववासी डर के मारे अपने घर छोड़कर भाग गए थे।

यह घटना बोडो और आदिवासी (संथाल) समुदायों के बीच तनाव को दिखाती है। अधिकारियों का कहना है कि अब कोई नई हिंसा नहीं हुई है और स्थिति सामान्य हो रही है। पुलिस ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। स्थानीय लोग शांति की अपील कर रहे हैं।