जेडीयू से 6 साल के लिए निकाले जाने के एक दिन बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह ने रविवार को पार्टी और उसके नेतृत्व पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 'खत्म' हो गए हैं और जेडीयू अब आने वाले चुनावों में 10 सीटें भी नहीं जीत पाएगी। अनंत सिंह ने साफ़ कहा कि उन्हें निकाले जाने का कोई पछतावा नहीं है और वे अपनी खुद की पार्टी बनाने की सोच रहे हैं। अनंत सिंह ने जेडीयू के मौजूदा नेतृत्व की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब जब नीतीश कुमार ही ख़त्म हो गए हैं तो पार्टी में क्या बचा है? हालाँकि उन्होंने नीतीश कुमार से निजी रिश्ते बरकरार रखने की बात कही।
अनंत सिंह ने कहा, 'मुझे निकाले जाने का कोई पछतावा नहीं है। यह पार्टी नीतीश कुमार की थी, उन्होंने ही इसे बनाया था। अब, जब नेता ही ख़त्म हो गये हैं तो पार्टी में बचा ही क्या है? जिस व्यक्ति ने मुझे निकाला है, उसकी कोई अहमियत नहीं है।' उनके इस बयान को जेडीयू नेतृत्व के खिलाफ खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अनंत सिंह ने नीतीश कुमार से अपने निजी संबंधों को लेकर कहा कि उनके बीच कोई दूरी नहीं है और वह पहले की तरह उनका सम्मान करते रहेंगे। सिंह ने यह भी कहा कि वह समय मिलने पर नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, 'नीतीश जी और मेरे बीच कोई दूरी नहीं है। हमारे संबंध अच्छे हैं। मैं उनसे कभी मिल लूंगा, इसमें कोई परेशानी नहीं है।'

‘मुझे निकालने से जेडीयू पर असर पड़ेगा’

अनंत सिंह ने दावा किया कि आने वाले चुनाव में जेडीयू को अपने फ़ैसले का राजनीतिक नुक़सान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी 10 सीटें जीतने की स्थिति में भी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव होने दीजिए, तब पता चलेगा कि पार्टी से उन्हें निकालने का क्या असर पड़ा है। अनंत सिंह के मुताबिक, जेडीयू को अपने फैसले का जवाब चुनाव में मिल जाएगा।
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अनंत सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने की जानकारी मीडिया के ज़रिए मिली थी। उनके मुताबिक़ पार्टी की ओर से उन्हें इस फ़ैसले के बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

‘कहीं और क्यों जाऊंगा, अपनी पार्टी बनाऊंगा’

जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह किसी अन्य दल में जाने के बजाय अपनी पार्टी बनाएंगे। उन्होंने कहा, 'मैं कहीं क्यों जाऊंगा? मैं अपनी पार्टी बना लूंगा।'
अनंत सिंह के इस बयान से बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। मोकामा और आसपास के इलाकों में उनके परिवार का लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में यदि वह अलग राजनीतिक संगठन बनाते हैं, तो उसका असर स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल उन्होंने अपनी प्रस्तावित पार्टी के नाम, गठन की तारीख या चुनावी रणनीति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

अनंत सिंह ने अपने निष्कासन के राजनीतिक असर को लेकर कहा कि आखिरकार जनता ही फैसला करती है। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने कोई गलती की है तो जनता उन्हें जवाब देगी। इसी तरह अगर पार्टी ने गलत किया है तो उसे भी जनता के सामने जवाब देना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, 'जनता मालिक है। अगर हमने कुछ गलत किया है तो जनता हमें जवाब देगी। अगर पार्टी ने कुछ गलत किया है तो पार्टी को इसका जवाब देना पड़ेगा।' उनका यह बयान तब आया है जब जेडीयू ने अनंत सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है और पार्टी नेतृत्व ने उनके व्यवहार को संगठन के निर्देशों के ख़िलाफ़ बताया है।

अनंत सिंह को जेडीयू से क्यों निकाला गया?

जेडीयू ने शनिवार को मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी व पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। बिहार जेडीयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई है। पार्टी ने इसके लिए तीन प्रमुख कारण बताए-
  • पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करना।
  • पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना।
  • हाल के विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करना।
जेडीयू के मुताबिक़ अनंत सिंह की गतिविधियां पार्टी के अनुशासन और निर्देशों के खिलाफ थीं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उनकी पत्नी नीलम देवी की पार्टी सदस्यता भी कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में समाप्त कर दी गई।

विधान परिषद चुनाव बना विवाद की बड़ी वजह

अनंत सिंह और जेडीयू के बीच विवाद की एक बड़ी वजह हाल में हुए विधान परिषद चुनाव को माना जा रहा है। अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने जेडीयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने की बात भी कही थी। अनंत सिंह ने अनुज सिंह की जीत का भरोसा जताते हुए कहा था कि नतीजे आने से पहले ही यह साफ़ है कि जीत किसकी होगी। उन्होंने कहा था कि वोट किसी दुकान से खरीदे नहीं जा सकते और उन्हें जनता पर भरोसा है।
उन्होंने कहा था, 'वोट किसी दुकान से खरीदे नहीं जा सकते। जनता भगवान की तरह है और मुझे भरोसा है कि उसने हमें वोट दिया है। जीत तय है।' विधान परिषद चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित होने हैं। अनंत सिंह के इस खुले समर्थन को जेडीयू ने पार्टी के निर्देशों के उल्लंघन के रूप में देखा। निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि आने वाले चुनाव में जेडीयू को अपने फैसले का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

विधानसभा सदस्यता खत्म करने की भी सिफारिश

अनंत सिंह को पार्टी से निकालने के साथ ही जेडीयू ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी बिहार विधानसभा अध्यक्ष से की है। पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यह कदम उठाने की मांग की है। दसवीं अनुसूची में दल-बदल से जुड़े प्रावधान हैं, जिनके तहत कुछ परिस्थितियों में किसी विधायक की सदस्यता समाप्त हो सकती है। अनंत सिंह फिलहाल मोकामा से विधायक हैं। यदि उनकी सदस्यता को लेकर कोई अंतिम निर्णय होता है, तो उसका उनके राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।
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कौन हैं अनंत सिंह, मोकामा में कितना प्रभाव?

अनंत सिंह बिहार की राजनीति में मोकामा के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्हें इलाके में ‘छोटे सरकार’ के नाम से भी जाना जाता है। मोकामा विधानसभा सीट पर उनके परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है। वर्ष 1990 से यह सीट अधिकतर समय उनके परिवार के पास रही है, हालांकि बीच में एक प्रतिद्वंद्वी नेता भी यहां से चुनाव जीता था।
अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से मोकामा और आसपास के क्षेत्र में रहा है। उनकी राजनीतिक यात्रा में कई बार दल बदलने और अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ने के पड़ाव भी आए हैं। उन्होंने 2020 का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर लड़ा था। बाद में कानूनी मामले में दोषसिद्धि के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद मोकामा सीट पर उपचुनाव हुआ। वर्ष 2022 के उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने उनकी पत्नी नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया था। वह चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं और इस तरह परिवार का मोकामा सीट पर राजनीतिक प्रभाव बना रहा। बाद में 2024 में नीलम देवी एनडीए के साथ आ गईं।

क्या अपनी पार्टी बनाएँगे अनंत सिंह?

जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने अपनी पार्टी बनाने का जो संकेत दिया है, उससे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, अभी यह साफ़ नहीं है कि उनकी प्रस्तावित पार्टी किस विचारधारा या राजनीतिक गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी।
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उनकी राजनीतिक ताकत का मुख्य आधार मोकामा और आसपास के क्षेत्र में उनका प्रभाव रहा है। ऐसे में नई पार्टी बनाने का फैसला उनके समर्थकों को एक अलग राजनीतिक मंच दे सकता है। लेकिन विधानसभा सदस्यता को लेकर जेडीयू की सिफारिश और आगामी चुनावों में संभावित प्रदर्शन जैसे सवाल भी उनके सामने रहेंगे। दूसरी ओर, जेडीयू के लिए भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनंत सिंह के निष्कासन का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।