जदयू ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किया। विधानसभा अध्यक्ष से दसवीं अनुसूची के तहत सदस्यता रद्द करने की सिफारिश। क्या जाएगी विधायकी? वरिष्ठ पत्रकार समी अहमद का विश्लेषणः
नीतीश कुमार के साथ अनंत सिंह (दायें)
बाहुबली माने जाने वाले और कई आपराधिक मामलों में नामजद पटना जिले के मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड ने ‘पार्टी के निर्देशों की अवहेलना’ करने के आरोप में पार्टी से निकाल देने की घोषणा की है। इसके अलावा जदयू ने विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए भी पत्र लिखा है।
अनंत सिंह के निष्कासन की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि उन्होंने विधान परिषद की पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार के ‘विरुद्ध कार्य’ किया और ‘दूसरे दल के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार’ किया। नीरज कुमार जदयू के आधिकारिक प्रवक्ता हैं और दो बार से इस सीट से विधान परिषद पहुंच चुके हैं।
अनंत सिंह ने खुले आम जदयू समेत एनडीए के समर्थित उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की कोशिश के साथ ही जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए काफी जोरदार प्रचार अभियान चलाया था और 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद नीरज के हारने और अनुज के जीतने का दावा भी कर रहे हैं। जेडीयू ने मतदान होने तक अनंत सिंह पर इसलिए कार्रवाई नहीं की ताकि भूमिहार समुदाय के वोटर नाराज ना हों हालांकि नीरज का भी संबंध उसी जाति से है।
बिहार में 23 अक्टूबर को चार-चार शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीट के लिए मतदान हुआ है। इन आठों सीटों का परिणाम 27 अक्टूबर को आना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर इस बार नीरज कुमार की हार होती है तो इसके लिए साफ तौर पर अनंत सिंह को ही जिम्मेदार माना जाएगा और अनंत सिंह भी इसका श्रेय लेने से नहीं चूकेंगे।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने 24 अक्टूबर के कार्यालय आदेश में अनंत सिंह की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने की एक वजह, “विगत कुछ दिनों से लगातार पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के लिए अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने” को भी बताया।
इसके बाद उमेश कुशवाहा ने जो बात लिखी है वह अनंत सिंह को बहुत ही महंगी पड़ सकती है। उमेश कुशवाहा ने लिखा, “साथ ही, पार्टी माननीय अध्यक्ष, बिहार विधानसभा से भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधानसभा सदस्य के रूप में उनकी सदस्यता अविलंब रद्द करने हेतु अनुशंसा करती है।”
उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी को भी पार्टी से निकाले जाने का ऐलान करते हुए लिखा, “इसी के साथ श्रीमती नीलम देवी, पूर्व स.वि.स. की प्राथमिक सदस्यता भी दलविरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण रद्द की जाती है और उन्हें भी पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया जाता है।”
ध्यान रखने की बात यह है कि नीलम देवी आरजेडी से विधायक चुनी गई थीं और उन्होंने उस समय पाला बदल लिया था जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़कर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाने का फैसला किया था। ऐसा माना जाता है कि उसे समय अनंत सिंह एक-47 रखने के मामले में जिस केस का सामना कर रहे थे, उन्हें उसमें राहत दिलाने का वादा किया गया था। यह भी माना जाता है कि अगर वह केस फर्जी था तो उसे वापस करने का मामला भी राजनीतिक था, चाहे इसके लिए अदालत का ही सहारा क्यों ना लिया गया हो।
उनके अलावा राजद के एक और प्रमुख विधायक आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने भी उस समय पाला बदलकर नीतीश कुमार के साथ जाने का फैसला किया था। इसके अलावा कुछ और विधायकों ने महागठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया था। इसके बाद राजद और महागठबंधन के दूसरे दलों ने उन बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की थी मगर तब के विधानसभा अध्यक्ष ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अनंत सिंह के मामले में भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखने वाले विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार क्या और कितनी जल्दी फैसला लेते हैं।
अनंत सिंह ने नीरज कुमार के विरोध के लिए यह दलील दी थी कि नीरज ने भी उन्हें हराने के लिए कोशिश की थी। इस मामले को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की चुप्पी और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के उस बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और इस समय केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से यह उम्मीद की थी की थी कि वह अनंत सिंह को मना लेंगे। उस समय ललन सिंह ने कहा था कि वह इन मामलों में नहीं पढ़ते लेकिन बाद में यह कहा था कि अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे।
इसके बावजूद नीरज के खिलाफ प्रचार करने और बयान देने से अनंत सिंह नहीं रुके। अनंत सिंह यह आरोप भी लगाते रहे हैं कि ललन सिंह के चुनाव के समय नीरज ने उनके यानी ललन के खिलाफ भी काम किया था और ललन सिंह भी इस तरह का ही इशारा करते रहे हैं। तब से ही यह माना जा रहा था कि अनंत सिंह के खिलाफ जदयू करवाई तो करेगा लेकिन इस चुनाव के लिए मतदान होने के बाद। अब ठीक वैसे ही कार्रवाई सामने आई है।
दिलचस्प बात यह है की अनंत सिंह ने मतदान के दिन यह बयान भी दिया कि बिहार में 100 ललन सिंह हैं, आप किसके बारे में कह रहे, हम नहीं जानते। दरअसल उनसे यह पूछा गया था कि ललन सिंह किनके साथ हैं। राजनीतिक जानकारों का यह मानना है की अनंत सिंह को निकाले जाने से पार्टी में ललन सिंह और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के बीच मनमुटाव बढ़ सकता है।
एक तरफ संजय झा यह कहेंगे कि ललन सिंह की नजदीकी अनंत सिंह से थी तो दूसरी तरफ अनंत सिंह ने यह बयान देकर ललन सिंह से अपनी दूरी साबित करने की कोशिश की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार अपनी सेहत से इस हालत में है कि वह इस मामले में कोई हस्तक्षेप करें।