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बिहार: क्या पांडेय ने चुनाव लड़ने के लिए दिया था रिया की ‘औकात’ वाला बयान?

‘रिया चक्रवर्ती की औकात नहीं है कि वह बिहार के मुख्यमंत्री पर टिप्पणी कर सके’ ख़बर की शुरुआत इस वाक्य से इसलिए की गई है कि आपको शायद समझ में आ गया होगा कि किसके बारे में बात की जा रही है। जी हां, बात हो रही है बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बारे में। पांडेय के बारे में पिछले कुछ महीने से इस तरह की जोरदार चर्चा थी कि वे बिहार के विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं और अब यह बात सच साबित होती दिख रही है। 

गुप्तेश्वर पांडेय ने पुलिस की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया है और इसे स्वीकार भी कर लिया गया है। मतलब, अब बचा कुछ नहीं है और पांडेय जी नेता जी बनने के लिए तैयार हैं।

जिस तरह पांडेय ने सुशांत मामले में नीतीश सरकार का पक्ष रखा था और मुंबई पुलिस पर निशाना साधा था, तभी यह साफ हो गया था कि पांडेय की चुनावी राजनीति में एंट्री होने जा रही है। क्योंकि वह उन दिनों बनाए गए ‘बिहार बनाम महाराष्ट्र’ के मुद्दे के चलते बिहार के लोगों में बन रहे इमोशन को देखकर बयान दे रहे थे। 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला आया कि सुशांत मामले की जांच अब मुंबई पुलिस नहीं सीबीआई करेगी, उसके बाद पत्रकारों से बातचीत में अति उत्साहित होकर पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने रिया को लेकर यह टिप्पणी की थी। हालांकि बवाल बढ़ने के बाद उन्होंने माफी भी मांग ली थी। 

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मुंबई पुलिस पर की थी टिप्पणी

इस दौरान पांडेय ने मुंबई पुलिस के कामकाज पर भी टिप्पणी की थी और कहा था कि मुंबई पुलिस के काम करने का ढंग ग़ैर कानूनी और अनैतिक था। तब यह कहा गया था कि एक राज्य के पुलिस महकमे का मुखिया होने के नाते दूसरे राज्य की पुलिस पर की गई इस तरह की टिप्पणी को ठीक नहीं ठहराया जा सकता। 

तब यह सवाल उठा था कि पुलिस आख़िर क्यों नेताओं की भाषा बोल रही है। बिहार सरकार, बिहार बीजेपी के नेता रिया के ख़िलाफ़ बोल रहे थे लेकिन डीजीपी के पद पर बैठे व्यक्ति ने अपनी वर्दी की जिम्मेदारी और भाषा का संयम छोड़कर रिया और मुंबई पुलिस के लिए ऐसे बयान क्यों दे दिए, इसे लेकर चर्चाएं हुई थीं। 

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आज कर सकते हैं घोषणा

बहरहाल, गुप्तेश्वर पांडेय के बारे में यह चर्चा है कि वह बक्सर जिले की किसी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं और इसे लेकर उनकी जिले के जेडीयू नेताओं के साथ बैठक भी हो चुकी है। पांडेय ने ट्वीट कर कहा है कि वह 23 सितंबर को शाम 6 बजे अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लाइव आएंगे। माना जा रहा है कि इसमें वह चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं। 

पांडेय ने कुछ दिन पहले पत्रकारों के साथ बातचीत में चुनाव लड़ने का साफ संकेत दिया था। उन्होंने कहा था, ‘मुझसे चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा जाता है तो मैं कहता हूं कि क्या चुनाव लड़ना पाप है, आप भी लड़ लीजिए।’

किसी भी शख़्स के चुनावी राजनीति में आने की जोरदार हिमायत करते हुए पांडेय ने कहा था, ‘अगर कोई इस्तीफ़ा देकर या सेवानिवृत्त होकर राजनीति में आना चाहता हो, तो क्या यह अनैतिक है, असंवैधानिक है या ग़ैर क़ानूनी है, यह तो कोई पाप नहीं है।’ 

जेडीयू के टिकट पर लड़ेंगे?

बस, इस बयान के बाद औपचारिकता शेष थी और अब नौकरी से इस्तीफ़ा देकर उन्होंने इस बात पर मुहर लगा दी है कि उनके जेडीयू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं पूरी तरह सही हैं और हो सकता है कि आज शाम को ही वह इसकी घोषणा कर दें। देखना होगा कि पुलिस महकमे में बेहद दबंग अफ़सर माने जाने वाले पांडेय राजनीति में कितने सफल हो पाते हैं। 

दुबे को ब्राह्मण शेर बताने पर भड़के थे 

गुप्तेश्वर पांडेय ने कानपुर के कुख़्यात अपराधी विकास दुबे को ब्राह्मण समाज के कुछ लोगों द्वारा ब्राह्मण शेर बताने पर करारा जवाब भी दिया था। डीजीपी ने कहा था कि कितने शर्म और अफ़सोस की बात है कि ऐसे पेशेवर हत्यारे का महिमामंडन किया जा रहा है और अपनी-अपनी जाति के अपराधियों को लोग हीरो बना रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अगर लोग इस तरह बर्ताव करेंगे तो अपराध की संस्कृति तो फूलेगी-फलेगी ही। 

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