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बिहार: आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या हुई थी, बेटे को आत्महत्या क्यों करना पड़ा?

बिहार के मोतीहारी में न्याय के लिए लड़ाई लड़ते-लड़ते एक 14 साल के किशोर को भारी क़ीमत चुकानी पड़ी। महीनों तक 14 वर्षीय रोहित कुमार अग्रवाल ने स्थानीय पुलिस स्टेशन और जिला-स्तरीय प्रशासनिक और पुलिस कार्यालयों के चक्कर लगाए। वह अपने पिता एक आरटीआई एक्टिविस्ट के हत्यारों को सज़ा दिलाने की मांग कर रहे थे। वह न्याय के लिए लड़ाई करते करते निराश हो गये थे। उन्होंने खुद को आग लगाकर तीन मंजिली इमारत से छलांग लगा दी। अब तक न्याय तो नहीं ही मिल पाया, उस किशोर की जान ज़रूर चली गई।

यह मामाला 24 सितंबर 2021 में एक आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या से जुड़ा है। हरसिद्धि प्रखंड कार्यालय गेट पर बाइक सवार अपराधियों ने रोहित के पिता व आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह स्थानीय भूमाफिया का पर्दाफाश करते रहे थे। आरोप लगाया गया है कि पर्दाफाश करने के कारण ही उनकी हत्या कर दी गई थी। 

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इस मामले में न्याय की मांग को लेकर विपिन का परिवार लगातार संघर्ष कर रहा था। अपने पिता की हत्या की जांच की धीमी गति का विरोध करते हुए रोहित ने कई बार धमकी भी दी थी। 

रिपोर्टों के मुताबिक़ रोहित कुमार पूर्वी चंपारण के एसपी कुमार आशीष से मिलने गया था, लेकिन कर्मचारी कथित तौर पर मुलाक़ात नहीं करा पाए। रोहित ने कथित तौर पर एसपी कार्यालय में धमकी दी थी कि अगर पुलिस ने उनके पिता की हत्या के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन नहीं दिया तो वह आत्मदाह कर लेगा।

कहा जा रहा है कि इसी से परेशान होकर वह घर लौटा और अपने घर के सामने के एक तीन मंजिला मकान पर चढ़ गया। मकान के ऊपरी मंजिल पर चढ़ने के बाद उसने अपने शरीर में आग लगाई और छलांग लगा दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रोहित के दादा विजय अग्रवाल ने कहा, 'रोहित घर लौटने पर परेशान दिख रहा था। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, वह बगल की इमारत की तीसरी मंजिल पर गया, खुद को आग लगा ली और कूद गया। ज़मीन पर गिरने से पहले वह हाईटेंशन बिजली के तारों में फँस गया।' 

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इस घटना के बाद रोहित को एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया और शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार विजय अग्रवाल ने हरसिद्धि पुलिस पर उनके बयान को बदलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया, जिसमें उन्होंने रोहित के ऐसा कदम उठाने के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था।

इधर, एसपी कुमार आशीष ने विजय के दावे का खंडन करते हुए कहा, 'जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन लड़के की मां ने हमें बताया कि वह गुरुवार शाम को एक छत से गिर गया था और बिजली के तारों के संपर्क में आने के बाद बिजली का करंट लग गया था। हमने परिवार पर बयान बदलने के लिए दबाव नहीं डाला।'

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आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार एसपी डॉ. कुमार आशीष ने विपिन अग्रवाल हत्याकांड की सीआईडी जाँच के लिए अनुशंसा करने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि विपिन हत्याकांड की जाँच में 26 लोगों का नाम सामने आया था, जिसमें से 15 लोगों के ख़िलाफ़ मामला सही पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अबतक 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य 8 लोग फरार हैं। बाक़ी बचे हुए 11 लोगों के ख़िलाफ़ जांच जारी है।

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